मुंबई। हिंदी सिनेमा के अभिनेता चंकी पांडे ने करीब चार दशक के अपने सफर में कई तरह के किरदार निभाए हैं। वह 80 और 90 के दशक के फिल्मों में हीरो और सपोर्टिंग एक्टर के तौर पर नजर आए। बाद में कॉमेडी और नेगेटिव किरदारों ने उन्हें एक नई पहचान दी। 'तेजाब', 'आंखें', 'पाप की दुनिया' और 'हाउसफुल' जैसी फिल्मों में उनके काम को दर्शकों ने खूब पसंद किया। चंकी के फिल्मी सफर की शुरुआत भी काफी दिलचस्प रही। उन्होंने खुद एक इंटरव्यू में बताया था कि उनकी पहली फिल्म मलने से पहले ऐसा वाकया हुआ था, जिसे वह आज भी याद करते हैं।
चंकी पांडे का जन्म 26 सितंबर 1962 को मुंबई में हुआ था। उनका असली नाम सुयश पांडे है। उनके पिता डॉ. शरद पांडे मशहूर हार्ट सर्जन थे। चंकी ने अपने पिता की तरह डॉक्टर बनने की कोशिश की थी लेकिन पढ़ाई में अच्छे न हो पाने के कारण बात नहीं बनी। फिल्मों में आने से पहले उन्होंने मॉडलिंग की और अपने खर्च के लिए मार्बल, पुरानी कारें और घर का सामान बेचने जैसे काम भी किए।
फिल्मों में आने से पहले चंकी ने कई ऑडिशन दिए थे लेकिन हर जगह उन्हें बस यह जवाब मिला कि वह उन किरदारों के लिए सही नहीं हैं। इसी दौरान उनकी मुलाकात फिल्म प्रोड्यूसर पहलाज निहलानी से हुई। यही मुलाकात उनके करियर का बड़ा मोड़ बन गई। चंकी ने एक इंटरव्यू में बताया कि एक बार वह फाइव स्टार होटल में वेडिंग पार्टी में गए थे। उन्होंने चुड़ीदार पायजामा पहना था, जिसका नाड़े में गांठ पड़ गई, और वह उसे खोल नहीं पा रहे थे।
एक इंटरव्यू में चंकी ने कहा, ''मेरी एक दिक्कत है, मैं नाड़ा बांध सकता हूं लेकिन खोल नहीं पाता। मैंने थोड़ी ज्यादा बीयर पी ली थी। मैं अपना नाड़ा खोल नहीं पा रहा था। मैं मदद के लिए चिल्ला रहा था कि तभी पहलाज निहलानी आए और मदद की।"
उन्होंने बताया कि हमारी बातचीत हुई और इस दौरान निहलानी ने मुझसे पूछा कि मैं क्या काम करता हूं। मैंने कहा कि मैं मॉडल हूं और फिल्मों में काम पाने की कोशिश कर रहा हूं। पहलाज निहलानी ने मुझे अगले दिन अपने ऑफिस बुलाया और फिल्म 'आग ही आग' ऑफर की।
चंकी ने 1987 में 'आग ही आग' से अपना फिल्मी सफर शुरू किया। इसके बाद वह 'पाप की दुनिया' में नजर आए। फिर 1988 में आई 'तेजाब' ने उनके करियर को आगे बढ़ाया। फिल्म में अनिल कपूर और माधुरी दीक्षित मुख्य भूमिका में थे और चंकी ने अनिल के दोस्त बब्बन का किरदार निभाया था। इस रोल के लिए उन्हें फिल्मफेयर में बेस्ट सपोर्टिंग एक्टर के लिए नॉमिनेशन भी मिला था।
इसके बाद चंकी ने 'विश्वात्मा', 'लुटेरे', 'आंखें', 'डॉन' और कई दूसरी फिल्मों में काम किया। 90 के दशक के बीच में जब बॉलीवुड में फिल्मों का तरीका बदलने लगा और उन्हें मनपसंद रोल्स कम मिलने लगे, तो उन्होंने बांग्लादेश की फिल्मों में काम करना शुरू किया। उन्होंने वहां करीब सात-आठ साल काम किया। बाद में पत्नी भावना के कहने पर वह बॉलीवुड लौटे।
बॉलीवुड में वापसी के बाद चंकी ने अपने किरदारों को लेकर अलग रास्ता चुना। 'हाउसफुल' सीरीज में उनका आखिरी पास्ता वाला किरदार काफी लोकप्रिय हुआ। इसके बाद 'बेगम जान', 'साहो' और 'अभय 2' जैसे प्रोजेक्ट्स में उन्होंने अलग-अलग तरह की भूमिकाएं निभाईं। चंकी ने एक इंटरव्यू में कहा था कि अब वह सिर्फ हीरो बनने के पीछे नहीं भागते बल्कि ऐसा रोल करना चाहते हैं जिसके कुछ सीन्स दर्शकों को याद रहें।












