नई दिल्ली। उद्योगपति हर्ष गोयनका ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) के भविष्य को लेकर एक गंभीर चेतावनी साझा की है। उन्होंने सोशल मीडिया पर एक वीडियो पोस्ट किया, जिसमें चर्चित लेखक युवाल नोआ हरारी ने कहा है कि भविष्य में इंसान उन प्रणालियों पर से नियंत्रण खो सकता है, जो उसके जीवन को संचालित करती हैं।'सेपियंस: ए ब्रीफ हिस्ट्री ऑफ ह्यूमनकाइंड' के लेखक हरारी ने इंसानों और लगातार अधिक बुद्धिमान होती मशीनों के संभावित संबंध की तुलना इंसानों और गायों के रिश्ते से की है।
हरारी ने चेतावनी देते हुए कहा, "हम भविष्य की गायें हैं।" उनका कहना है कि एआई इतना उन्नत हो सकता है कि लोग उन प्रणालियों को न पूरी तरह समझ पाएंगे और न ही उन पर प्रभाव डाल सकेंगे, जिन पर उनका जीवन निर्भर होगा।
हर्ष गोयनका ने इस वीडियो को साझा करते हुए एआई की बढ़ती क्षमताओं और ऐसी तकनीक के संभावित खतरों पर ध्यान आकर्षित किया, जो मानव समझ से भी अधिक शक्तिशाली हो सकती है।
इस चेतावनी का आशय यह है कि एआई से सबसे बड़ा खतरा जरूरी नहीं कि रोबोटों के इंसानों के खिलाफ हो जाने से हो, बल्कि यह भी हो सकता है कि लोग धीरे-धीरे उन प्रणालियों को समझने और नियंत्रित करने की अपनी क्षमता खो दें, जो उनके जीवन और निर्णयों को प्रभावित कर रही हैं।
अपनी तुलना को समझाते हुए हरारी ने इंसानों और जानवरों की समझ के बीच अंतर का उदाहरण दिया। उन्होंने कहा कि गायें ऐसे वातावरण में रहती हैं, जिसे इंसान नियंत्रित करते हैं, लेकिन उन्हें पैसे, वित्तीय बाजारों या आर्थिक नीतियों जैसी चीजों की कोई समझ नहीं होती।
वे यह नहीं समझ पातीं कि ब्याज दरों में बदलाव, बॉन्ड बाजार की गतिविधियां या कारोबारी फैसले उनके जीवन को कैसे प्रभावित कर सकते हैं।
हरारी का कहना है कि एआई सिस्टम के और अधिक जटिल एवं परिष्कृत होने के साथ इंसानों के साथ भी कुछ ऐसा ही हो सकता है। लोग अपनी रोजमर्रा की जिंदगी जीते रहेंगे, जबकि एल्गोरिद्म और स्वचालित प्रणालियां वित्त, कारोबार, शासन और कानून जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों से जुड़े फैसलों में बड़ी भूमिका निभाने लगेंगी।
समय के साथ ये प्रणालियां इतनी जटिल हो सकती हैं कि उनका उपयोग करने वाले लोगों के लिए भी यह समझना मुश्किल हो जाएगा कि वे वास्तव में काम कैसे करती हैं।
चेक टेलीविजन को दिए एक साक्षात्कार में हरारी ने सवाल उठाया कि यदि लोगों के जीवन के महत्वपूर्ण पहलुओं को नियंत्रित करने वाली तकनीक इतनी जटिल हो जाए कि वे उसे समझ ही न सकें, तो इंसानों की स्थिति क्या होगी।
उनका तर्क है कि लोग धीरे-धीरे सूचित और स्वतंत्र निर्णय लेने की क्षमता छोड़ सकते हैं, क्योंकि वे ऐसी प्रणालियों पर अधिक निर्भर होते जाएंगे जिनका स्वतंत्र रूप से मूल्यांकन करना उनके लिए संभव नहीं होगा।
हरारी ने बताया कि वित्त और प्रशासन ऐसे क्षेत्र हैं जहां इस संभावित बदलाव पर विशेष ध्यान देने की आवश्यकता है।

















