गुवाहाटी। दुर्गा पूजा के अंतिम दिन नवमी की रस्में पूरी होने के बाद मां कामाख्या मंदिर में दशमी पूजा शुरू हुई। इस पावन अवसर पर बड़ी संख्या में श्रद्धालु मंदिर पहुंचे और पूजा-अर्चना कर देवी कामाख्या का आशीर्वाद लिया। मंदिर परिसर में सुबह से ही भक्तों की भारी भीड़ देखी गई।
नवरात्रि के दौरान कामाख्या धाम का महत्व और भी बढ़ जाता है, क्योंकि यह 51 शक्तिपीठों में सबसे महत्वपूर्ण माना जाता है। मान्यता है कि यहां देवी सती के शरीर का जननी अंग गिरा था, इसलिए इसे जगत जननी के नाम से भी जाना जाता है। पर्वत पर स्थित नवदुर्गा के इस मंदिर में नवरात्रि के नौ दिनों तक विशेष अनुष्ठान, जाप और पूजा का आयोजन होता है।
पश्चिम बंगाल के उत्तर दिनाजपुर से आई श्रद्धालु सुष्मिता सरकार ने मंदिर में दर्शन के बाद अपने अनुभव साझा किए। उन्होंने कहा, "यहां आने पर मन एकदम शांत और प्रसन्न हो जाता है, ऐसा अनुभव कहीं और नहीं मिलता। बहुत अच्छा लगता है। सभी को यहां आना चाहिए।"
एक अन्य श्रद्धालु ने कहा, "यहां आने और दर्शन करने की व्यवस्था बहुत अच्छी है। सभी को कम से कम एक बार यहां आकर दर्शन जरूर करना चाहिए। यहां आकर बहुत शांति मिलती है। मां कामाख्या के दर्शन करके मन पवित्र हो गया।"
गुवाहाटी से आए श्रद्धालु जगमोहन सोनी ने कामाख्या धाम के महत्व के बारे में बताया। उन्होंने कहा, "कामाख्या धाम 51 शक्तिपीठों में सबसे महत्वपूर्ण स्थान है, क्योंकि यहां मां का जननी स्थान गिरा था। इसे जगत जननी के नाम से जाना जाता है। यह पर्वत पर स्थित नवदुर्गा का मंदिर है, इसलिए नवरात्रि में इसका महत्व बहुत ज्यादा बढ़ जाता है।"
उन्होंने बताया कि नवरात्रि में यहां विशेष अनुष्ठान किए जाते हैं। बाहर से भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु यहां पहुंचते हैं, जिसके कारण मंदिर में काफी भीड़ रहती है।
उन्होंने कहा, "मैं यही कामना करता हूं कि हे मां, हमारे राज्य, हमारे देश और संपूर्ण भारतवर्ष में सुख, संपत्ति, शांति और समृद्धि बनाए रखें। किसी तरह की अराजकता न फैले और सभी लोग मिलजुल कर रहें।"

















