मैहर। धार्मिक नगरी मैहर में बागेश्वर धाम के पीठाधीश्वर पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री के हालिया प्रवास के दौरान एक वीडियो को लेकर सोशल मीडिया पर बड़ा विवाद खड़ा हो गया। केजेएस सीमेंट फैक्टरी के डायरेक्टर्स पवन अहलुवालिया और नलिन के आमंत्रण पर मैहर पहुंचे धीरेंद्र शास्त्री को कथित तौर पर गार्ड ऑफ ऑनर दिए जाने का वीडियो इंटरनेट पर तेजी से वायरल हुआ। वीडियो सामने आते ही सोशल मीडिया यूजर्स ने सवाल खड़े कर दिए कि एक कथावाचक को किस अधिकार और संवैधानिक हैसियत से यह राजकीय सम्मान दिया गया। कुछ यूजर्स ने आरोप लगाया कि भारतीय सेना या सुरक्षा बलों के जवानों से यह सम्मान दिलाया गया। हालांकि, विवाद बढ़ता देख मैहर पुलिस अधीक्षक ने स्थिति स्पष्ट करते हुए इसे पूरी तरह भ्रामक बताया है।
वायरल वीडियो में धीरेंद्र शास्त्री के आगमन पर काली वर्दी पहने सुरक्षाकर्मी कतारबद्ध होकर सलामी देते दिखाई दिए। वीडियो वायरल होते ही कई यूजर्स ने कड़ा एतराज जताया। लोगों ने पूछा कि क्या किसी कथावाचक को ऐसा औपचारिक सैन्य सम्मान दिया जा सकता है? कई लोगों ने यह भी सवाल उठाया कि धीरेंद्र शास्त्री किस संवैधानिक पद पर आसीन हैं जो उन्हें इस तरह की सलामी दी गई। देखते ही देखते इस मुद्दे पर राजनीतिक बयानबाजी और बहस भी शुरू हो गई।
मामले के तूल पकड़ने के बाद मैहर एसपी अवधेश प्रताप सिंह ने इस पूरे घटनाक्रम की वास्तविक स्थिति स्पष्ट की। एसपी ने बताया कि सोशल मीडिया पर किया जा रहा दावा पूरी तरह गलत और भ्रामक है। उन्होंने स्पष्ट किया कि धीरेंद्र शास्त्री को न तो भारतीय सेना और न ही मध्य प्रदेश पुलिस के जवानों द्वारा कोई गार्ड ऑफ ऑनर दिया गया था। असल में, केजेएस सीमेंट फैक्टरी के निजी सुरक्षाकर्मियों ने उनके स्वागत के दौरान यह सलामी दी थी। निजी सुरक्षा एजेंसियों के जवानों की वर्दी सेना या विशेष बलों से मिलती-जुलती होने के कारण लोगों में यह भ्रम फैल गया।














