लखनऊ। उत्तर प्रदेश के प्रशासनिक गलियारों में उस समय खलबली मच गई जब आर्थिक अपराध शाखा (EOW) ने 12 साल पुराने पशुधन विभाग भर्ती घोटाले के मामले में रिटायर्ड आईएएस अधिकारी योगेश कुमार को लखनऊ के गोमती नगर से गिरफ्तार कर लिया। यह बहुचर्चित मामला वर्ष 2014 का है, जब प्रदेश में समाजवादी पार्टी की सरकार थी और योगेश कुमार पशुधन विभाग में प्रमुख सचिव के रूप में अपनी सेवाएं दे रहे थे।
क्या था पूरा पशुधन विभाग भर्ती घोटाला?
सपा सरकार के कार्यकाल के दौरान वर्ष 2013-14 में प्रदेशभर में पशुधन प्रसार अधिकारी के 1198 पदों पर भर्तियां निकाली गई थीं। 2 फरवरी 2014 को परीक्षा संपन्न हुई, जिसमें कुल 1005 अभ्यर्थियों का चयन कर उन्हें ट्रेनिंग और जॉइनिंग दी गई। हालांकि, प्रक्रिया पूरी होने के बाद 34 अभ्यर्थियों ने इलाहाबाद हाईकोर्ट में याचिका दायर कर लिखित परीक्षा और इंटरव्यू में बड़े स्तर पर गड़बड़ी के आरोप लगाए। आरोप था कि इंटरव्यू के लिए निर्धारित अंकों के जरिए चुनिंदा अभ्यर्थियों को अनुचित लाभ पहुंचाया गया और चयन के स्थापित नियमों का खुला उल्लंघन किया गया।
नियमों को ताक पर रखकर की गई थी ओएमआर शीट की जांच
जांच एजेंसियों के मुताबिक, भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता को दरकिनार किया गया था। जिलों और मंडलों की चयन समितियों के अधिकारों को समाप्त कर ओएमआर शीट की जांच एक ही जगह पर कराई गई, ताकि अंकों में आसानी से हेरफेर किया जा सके। हाईकोर्ट के निर्देश पर 17 दिसंबर 2017 को मामले की जांच एसआईटी को सौंपी गई। एसआईटी की रिपोर्ट के आधार पर 29 जुलाई 2021 को कुल 28 लोगों के खिलाफ औपचारिक एफआईआर दर्ज की गई थी, जिसमें तत्कालीन अधिकारियों और परीक्षा आयोजित कराने वाली संस्था की भूमिका की जांच की गई।
तत्कालीन पशुमंत्री की भूमिका भी रही है जांच के दायरे में
इस पूरे प्रकरण में तत्कालीन पशुधन विकास मंत्री राजकिशोर सिंह की भूमिका भी जांच के दायरे में रही है। राजकिशोर सिंह बस्ती से कई बार विधायक व सांसद रह चुके हैं और वर्तमान राजनीतिक घटनाक्रम के तहत वर्ष 2024 में भाजपा में शामिल हो चुके हैं। बहरहाल, EOW के डीजी जेएन सिंह ने पुष्टि की है कि ठोस सबूत मिलने के बाद रिटायर्ड आईएएस योगेश कुमार को गिरफ्तार कर लिया गया है और मामले में आगे की वैधानिक कार्रवाई तेजी से जारी है।














