सीहोर। मध्य प्रदेश के सीहोर जिले के कोसमी गांव में वन विभाग द्वारा 12 आदिवासी परिवारों के घरों पर की गई बुलडोजर कार्रवाई को लेकर सियासत गरमाती जा रही है। केंद्रीय कृषि मंत्री और पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के बाद अब उनके बेटे कार्तिकेय सिंह चौहान ने इस मामले में कड़ा रुख अपनाया है। उन्होंने प्रभावित आदिवासियों से मुलाकात कर इस कार्रवाई को पूरी तरह अमानवीय करार दिया है और मानवाधिकार आयोग का दरवाजा खटखटाने का ऐलान किया है।
"अधिकारियों का व्यवहार अमानवीय, साजिश को कामयाब नहीं होने देंगे" — कार्तिकेय सिंह चौहान
कोसमी गांव पहुंचकर पीड़ित आदिवासी परिवारों की समस्याएं सुनने वाले कार्तिकेय सिंह चौहान ने प्रशासन की कार्रवाई पर गंभीर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि घरों को तोड़ने के दौरान जिस तरह का क्रूर और अमानवीय बर्ताव किया गया, वह कतई स्वीकार्य नहीं है: कार्तिकेय ने बताया कि कार्रवाई के दौरान कथित तौर पर एक 3 साल के मासूम बच्चे के सिर में जेसीबी का पंजा लगा, एक महिला के बाल खींचे गए और एक आदिवासी व्यक्ति को उठाकर कुएं में फेंक दिया गया तथा उसे जान से मारने की धमकी दी गई।
उन्होंने दोटूक शब्दों में कहा कि आदिवासियों के साथ अमानवीय व्यवहार करने वाले अधिकारियों को किसी भी हाल में बख्शा नहीं जाएगा और उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की जाएगी। इसे एक बड़ी साजिश बताते हुए उन्होंने कहा कि हम इस साजिश को कभी कामयाब नहीं होने देंगे। सरकार बनाने में इन आदिवासियों का भी महत्वपूर्ण योगदान है, इसलिए इनका विश्वास किसी भी कीमत पर टूटने नहीं दिया जाएगा। हालांकि, उन्होंने स्पष्ट किया कि उनका उद्देश्य सरकार के खिलाफ मोर्चा खोलना नहीं, बल्कि पीड़ित परिवारों को न्याय दिलाना है।
वन विभाग की कार्रवाई और प्रशासनिक हलचल
वन विभाग का दावा है कि संबंधित भूमि पर अवैध अतिक्रमण किया गया था और नियमानुसार नोटिस देने के बाद ही बेदखली की कार्रवाई को अंजाम दिया गया, जिसमें फसलें नष्ट होने और कुएं को भरे जाने की बात भी सामने आई है। इस पूरे घटनाक्रम पर पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने भी गहरी नाराजगी जताई थी और अधिकारियों से बात कर पूरी जानकारी ली थी। मामले के तूल पकड़ने के बाद मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने मुख्य सेक्रेटरी से इस पूरी कार्रवाई की विस्तृत रिपोर्ट मांगी है और जांच के बाद उचित कदम उठाने की बात कही है।
कार्तिकेय सिंह चौहान के मानवाधिकार आयोग जाने के ऐलान के बाद यह मामला अब और गंभीर हो गया है, और प्रशासनिक स्तर पर भी जवाबदेही तय करने की मांग तेज हो गई है।











