बालाघाट, रीतेश सोनी। जिले के बैहर विधानसभा क्षेत्र के दक्षिण बैहर के बैगा बाहुल्य वनांचल क्षेत्रों में संक्रामक बीमारियों के चलते बैगा बच्चों की मौतों का मामला लगातार गरमाता जा रहा है। स्थिति को नियंत्रित करने के लिए जिला प्रशासन ने स्वास्थ्य विभाग सहित पूरा सरकारी अमला प्रभावित क्षेत्रों में तैनात किया है। प्रशासनिक स्तर पर किए जा रहे प्रयासों के बाद हालात में सुधार के संकेत भी मिल रहे हैं।


इसी बीच प्रभावित गांवों में पीड़ित परिवारों से मुलाकात करने पहुंचे सीजेपी के संस्थापक अभिजीत दीपके को कुछ सोशल मीडिया इंफ्लुएंसर्स द्वारा घेरकर किए गए सवाल-जवाब का वीडियो सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बना हुआ है। वीडियो को लेकर सोशल मीडिया पर तरह-तरह के मीम और रील वायरल हो रहे हैं। लोग सवाल उठा रहे हैं कि जिन सवालों का जवाब सरकार और उसके जिम्मेदार मंत्रियों से मांगा जाना चाहिए, वे सवाल अभिजीत दीपके से क्यों पूछे जा रहे हैं?


‘दीपके कौन हैं—मुख्यमंत्री या स्वास्थ्य मंत्री?’

सोशल मीडिया पर वायरल हो रही प्रतिक्रियाओं में लोग सवाल कर रहे हैं कि बैगा बच्चों की मौतों के लिए जिम्मेदार प्रशासनिक और स्वास्थ्य व्यवस्था को लेकर सवाल सरकार और स्वास्थ्य विभाग से किए जाने चाहिए या किसी सामाजिक कार्यकर्ता से? कई यूजर्स ने तंज कसते हुए पूछा कि अभिजीत दीपके मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री हैं या स्वास्थ्य मंत्री?


बताया गया कि अभिजीत दीपके बालाघाट जिले के कुंडेकसा, बोंदारी, कोरका सहित अन्य प्रभावित गांवों में पहुंचे थे और उन्होंने पीड़ित परिवारों से मुलाकात कर स्थिति की जानकारी ली। इसी दौरान मौके पर मौजूद कुछ सोशल मीडिया इंफ्लुएंसर्स ने उनसे सवाल-जवाब शुरू कर दिए। देखते ही देखते बातचीत तीखी बहस में बदल गई।


बैगा समुदाय की परंपरा को मौतों का कारण बताने पर विवाद

सवाल-जवाब के दौरान कथित तौर पर 33 बैगा बच्चों की मौतों को लेकर आदिवासी बैगा समुदाय की परंपराओं को ही कारण बताए जाने पर भी विवाद खड़ा हो गया है। इस बयान को लेकर सोशल मीडिया पर इन इंफ्लुएंसर्स की आलोचना की जा रही है। आलोचकों का कहना है कि मौतों के वास्तविक कारणों की जांच और स्वास्थ्य व्यवस्था की कमियों पर सवाल उठाने के बजाय पूरे समुदाय की परंपराओं को जिम्मेदार ठहराना उचित नहीं है।


स्थानीय पत्रकारों की भूमिका पर भी उठे सवाल

इस पूरे विवाद के बीच स्थानीय पत्रकारों की भूमिका भी चर्चा में है। स्थानीय मीडिया कर्मियों का कहना है कि दक्षिण बैहर में फैली बीमारी और बैगा बच्चों की मौतों से जुड़े मुद्दे लगातार स्थानीय स्तर पर उठाए जाते रहे हैं। स्वास्थ्य सुविधाओं, टीकाकरण, पोषण आहार, टेक होम राशन वितरण, पेयजल और दूरस्थ वनांचल क्षेत्रों में स्वास्थ्य विभाग की पहुंच जैसे मुद्दों को लेकर स्थानीय पत्रकार लगातार रिपोर्टिंग कर रहे हैं।


वहीं, आरोप है कि बाहर से आए कुछ सोशल मीडिया इंफ्लुएंसर्स ने स्थानीय मीडिया कर्मियों के साथ भी कथित तौर पर अभद्र व्यवहार किया।


सिस्टम की जवाबदेही तय करने की मांग

बैगा बच्चों की मौतों को लेकर सवाल केवल किसी एक व्यक्ति से नहीं, बल्कि पूरे स्वास्थ्य और प्रशासनिक सिस्टम से जुड़े हैं। प्रभावित क्षेत्रों में समय पर टीकाकरण हुआ या नहीं, पोषण आहार और टेक होम राशन का वितरण नियमित हुआ या नहीं, दूरस्थ बैगा बस्तियों में स्वास्थ्य विभाग की निगरानी कितनी प्रभावी रही और पेयजल की स्थिति कैसी थी—इन तमाम सवालों के जवाब जिम्मेदार सरकारी विभागों से मांगे जाने की जरूरत है।


सोशल मीडिया पर चल रही बहस में भी यही सवाल प्रमुखता से उठ रहा है कि अगर सरकार और सिस्टम से सवाल पूछना पत्रकारिता की जिम्मेदारी है, तो फिर इन सवालों का केंद्र कोई सामाजिक कार्यकर्ता क्यों बनाया जा रहा है?


फिलहाल, दक्षिण बैहर में बैगा बच्चों की मौतों का मामला संवेदनशील बना हुआ है और प्रशासन द्वारा बीमारी की रोकथाम के लिए किए जा रहे प्रयासों के साथ-साथ मौतों के वास्तविक कारणों और स्वास्थ्य व्यवस्था की जिम्मेदारी तय करने की मांग भी जोर पकड़ रही है।