भोपाल। मध्य प्रदेश के बालाघाट जिले के आदिवासी अंचल में संक्रामक बीमारियों से 30 से अधिक मासूम बच्चों की मौत का मामला अब गंभीर राजनीतिक विवाद का रूप ले चुका है। कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के संस्थापक अभिजीत दिपके ने प्रभावित क्षेत्रों का दौरा करने के बाद अपने सोशल मीडिया हैंडल (एक्स) पर मध्य प्रदेश के राज्यपाल को संबोधित एक प्रतीकात्मक एवं व्यंग्यात्मक त्यागपत्र पोस्ट किया है। इस पत्र में उन्होंने खुद को प्रदेश का 'मुख्यमंत्री' दर्शाते हुए पद से तत्काल प्रभाव से इस्तीफा देने की बात लिखी है।

पोस्ट में दिपके ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रति कटाक्ष करते हुए लिखा कि उन्होंने मध्य प्रदेश की जनता की सेवा का अवसर दिया, "एक ऐसा अवसर जिसमें मैं स्पष्ट रूप से विफल रहा।" पत्र में लिखा गया कि बालाघाट में मासूम बच्चों की असमय मौतों के बाद विवेक इस पद पर बने रहने की अनुमति नहीं देता और समय पर चिकित्सा न मिलने की नाकामी की जिम्मेदारी सर्वोच्च स्तर पर तय होनी चाहिए।


पत्र में उठाए गए प्रमुख सवाल और आंकड़े

दिपके द्वारा साझा किए गए पत्र में सरकार की स्वास्थ्य, शिक्षा और जल योजनाओं की विफलताओं को आंकड़ों के साथ घेरा गया है:

  • मुआवजे पर तीखा तंज: पत्र में आरोप लगाया गया कि पहले प्रत्येक मृत बच्चे के लिए केवल ₹2 लाख की घोषणा की गई थी, जिसे जनाक्रोश के बाद बढ़ाकर ₹4 लाख किया गया। इसमें सवाल उठाया गया कि "यदि ये बच्चे किसी मंत्री या विधायक के होते, तो क्या ₹4 लाख का मुआवजा पर्याप्त माना जाता?"
  • 'हर घर जल' के दावों पर सवाल: पत्र के अनुसार, नल-जल योजना के बड़े दावों के बावजूद बालाघाट के कई आदिवासी गांवों में परिवार आज भी नदी-नालों का दूषित पानी पीने को विवश हैं, जिससे संक्रामक बीमारियां फैल रही हैं।
  • जर्जर स्कूल व शिक्षा व्यवस्था: एक गांव का उदाहरण देते हुए पत्र में दावा किया गया कि आंगनवाड़ी से कक्षा 5 तक के करीब 75 बच्चे एक ही कमरे में पढ़ने को मजबूर हैं और कई स्कूलों की हालत पशु आश्रयों से भी बदतर है।
  • कुपोषण व बिजली का संकट: पत्र में विधानसभा और सरकारी रिपोर्टों के हवाले से दावा किया गया कि प्रदेश में 55 हजार से अधिक आदिवासी परिवार बिजली विहीन हैं। साथ ही, प्रदेश में 5.41 लाख से अधिक कम वजन वाले और 1.36 लाख से अधिक कुपोषित बच्चों की स्थिति का उल्लेख किया गया।


जमीनी दौरे पर दिपके से तीखे सवाल, इन्फ्लुएंसर्स के विरोध के बीच मांगी माफी

सोशल मीडिया पर पत्र जारी करने से पहले अभिजीत दिपके ने शनिवार को बालाघाट के सुदूर आदिवासी गांवों अडोरी, कोरका और बोंडारी का दौरा किया था। इस दौरान उन्होंने पीड़ित परिजनों से मिलकर स्वास्थ्य सेवाओं की वस्तुस्थिति जानी।

दौरे के दौरान बाहर से आए सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर्स और यूट्यूबरों के एक दल ने उनकी गाड़ी को घेर लिया। एक महिला इन्फ्लुएंसर ने माइक लगाकर सीधे सवाल किया कि "क्या आप यहां लाशों पर राजनीति करने आए हैं और इतने दिन बाद क्यों पहुंचे?" तीखे विरोध और सवालों के बीच दिपके हाथ जोड़कर देरी से आने के लिए माफी मांगते नजर आए। जब ग्रामीण इलाकों में बनी पक्की सड़कों और सुविधाओं को लेकर बहस बढ़ी, तो स्थिति को देखते हुए सीजेपी कार्यकर्ता उन्हें सुरक्षित वाहन में बैठाकर वहां से ले गए।


हाई कोर्ट पहले ही तलब कर चुका है जवाब

उल्लेखनीय है कि बालाघाट के इन वनांचलों में 30 से अधिक बच्चों की मौत के मामले में मध्य प्रदेश हाई कोर्ट की जबलपुर बेंच पहले ही जनहित याचिका पर संज्ञान ले चुकी है। अदालत ने स्वास्थ्य विभाग, महिला एवं बाल विकास विभाग और बालाघाट कलेक्टर को नोटिस जारी कर 50 बिस्तरों वाले अस्पताल में 400 बच्चों के इलाज की कथित अव्यवस्था और दूषित पानी पर स्पष्टीकरण मांगा है। मामले में न्यायिक संज्ञान के बाद अब इस प्रतीकात्मक इस्तीफे और राजनीतिक बयानबाजी ने अंचल के सियासी पारे को और चढ़ा दिया है।