भोपाल। मध्य प्रदेश की डॉ. मोहन यादव सरकार ने प्रदेश के 50 लाख परिवारों के हित में ऐतिहासिक निर्णय लिया है। राज्य सरकार 'स्वामित्व योजना' के तहत पूर्व में वितरित किए गए 50 लाख आवासीय पट्टों की पूरी तरह नि:शुल्क रजिस्ट्री कराने जा रही है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जनसेवा के 25 वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में यह कार्य 17 सितंबर से शुरू होने वाले विशेष 'सेवा संकल्प अभियान' के तहत किया जाएगा। 17 अक्टूबर तक चलने वाले इस एक माह के अभियान को तीन चरणों में पूरा किया जाएगा और सभी पात्र हितग्राहियों के हाथों में उनकी पंजीकृत रजिस्ट्री की मूल प्रति सौंपी जाएगी।


पट्टा अब बनेगा कानूनी संपत्ति, बैंकों से आसानी से मिल सकेगा कर्ज

स्वामित्व योजना के तहत ग्रामीण व शहरी क्षेत्रों में गरीबों को आवासीय पट्टे तो वितरित किए गए थे, लेकिन औपचारिक रजिस्ट्री (पंजीयन) न होने के कारण वे वैधानिक दृष्टि से सीमित थे। पंजीकृत दस्तावेज के अभाव में इन पट्टों को वैध अचल संपत्ति नहीं माना जाता था, जिससे बैंकों से ऋण लेने में भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ता था। अब सरकार द्वारा नि:शुल्क रजिस्ट्री कराए जाने के बाद ये पट्टे पूर्णतः विधिक संपत्ति में दर्ज होंगे, जिससे धारक जमीन के वास्तविक स्वामी बनेंगे और उन्हें मकान निर्माण व व्यवसाय के लिए बैंकों से आसानी से कर्ज मिल सकेगा।


राजस्व अमले को मिले पंजीयक के अधिकार: फील्ड में उतरेगा भारी-भरकम अमला

रजिस्ट्री कार्यालयों (सब-रजिस्ट्रार ऑफिस) में सामान्य व्यवस्था के तहत एक माह के भीतर 50 लाख दस्तावेजों का पंजीयन कराना असंभव था। इसलिए शासन ने विशेष अधिकार प्रदान करते हुए राजस्व अधिकारियों को ही उप-पंजीयक के दायित्व सौंपे हैं: तहसीलदार, नायब तहसीलदार और राजस्व निरीक्षकों (RI) को सीधे रजिस्ट्री करने के वैधानिक अधिकार दिए गए हैं। घर-घर सर्वे, दस्तावेज सत्यापन और नाम-पते मिलान के कार्य के लिए प्रदेशभर के 16,444 पटवारियों को अभियान का मुख्य आधार बनाया गया है।


समीक्षा बैठक में मुरैना कलेक्टर को सीएम ने टोका: 'अभियान की तारीख ही भूल रहे हो, कैसे चलेगा काम?'

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने 'सेवा संकल्प अभियान' की तैयारियों को लेकर वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग (वीसी) के माध्यम से सभी जिला कलेक्टरों की समीक्षा बैठक ली। मुख्यमंत्री ने नि:शुल्क रजिस्ट्री की व्यवस्थाओं का बिंदुवार फीडबैक लिया। इसी दौरान मुरैना कलेक्टर लोकेश कुमार जांगिड़ ने विवरण देते समय फ्लो में अभियान की शुरुआत 17 सितंबर की जगह '17 नवंबर' कह दी।


इस पर मुख्यमंत्री ने तत्काल सख्त लहजे में टोकते हुए कहा, "इस अहम अभियान की तारीख ही भूल रहे हो, तब काम कैसे चलेगा? कम से कम सही तारीख तो याद रखो।" मुख्यमंत्री ने दो-टूक निर्देश दिए कि अभियान को पूरी गंभीरता, पारदर्शिता और तय समय-सीमा के भीतर धरातल पर उतारा जाए, इसमें किसी भी स्तर पर ढिलाई बर्दाश्त नहीं की जाएगी।