जबलपुर, अनुराग शुक्ला। जिला न्यायालय जबलपुर सहित सिहोरा, पाटन, कुटुम्ब न्यायालय एवं श्रम न्यायालय में शनिवार को नेशनल लोक अदालत का आयोजन किया गया। राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण, नई दिल्ली एवं राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण के निर्देश पर आयोजित लोक अदालत प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश कृष्णमूर्ति मिश्र के मार्गदर्शन में संपन्न हुई।
जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के सचिव के अनुसार लोक अदालत में कुल 10,264 प्रकरणों का निराकरण किया गया। इनमें न्यायालयों में लंबित 3,480 और 6,784 प्रीलिटिगेशन प्रकरण शामिल हैं। इन प्रकरणों में कुल 65 करोड़ 67 लाख 64 हजार 222 रुपये की राशि के अवार्ड पारित किए गए। प्रकरणों के निराकरण के लिए कुल 77 खंडपीठों का गठन किया गया था।
निराकृत लंबित प्रकरणों में आपराधिक शमनीय प्रकृति के 494, धारा 138 एनआई एक्ट के 316, मोटर दुर्घटना क्षतिपूर्ति के 1,173, सिविल मामलों के 44, विवाह संबंधी 98, विद्युत अधिनियम के 160 तथा अन्य प्रकृति के 61 प्रकरण शामिल रहे।
धारा 138 एनआई एक्ट के प्रकरणों में 6 करोड़ 54 लाख 38 हजार 736 रुपये की समझौता राशि के निर्णय हुए। मोटर दुर्घटना क्षतिपूर्ति के मामलों में 43 करोड़ 69 लाख 39 हजार 519 रुपये की अवार्ड राशि पारित की गई। विद्युत अधिनियम के 160 प्रकरणों में 28 लाख 39 हजार 19 रुपये की राशि वसूल हुई। वहीं ट्रैफिक चालान के 767 प्रकरणों में 1 लाख 98 हजार 800 रुपये वसूल किए गए। बैंक संबंधी 296 प्रीलिटिगेशन प्रकरणों के निराकरण के बाद 20,807 रुपये की समझौता राशि प्राप्त हुई।
समझाइश से फिर जुड़े दाम्पत्य रिश्ते
लोक अदालत में वैवाहिक विवादों के सौहार्दपूर्ण समाधान की कई मिसालें भी सामने आईं। आपसी समझाइश, संवाद और पारिवारिक सहयोग से अलग रह रहे दो दंपत्तियों ने अपने मतभेद भुलाकर पुनः साथ रहने का निर्णय लिया।
एमजेसीआर प्रकरण में आवेदिका धंतीबाई, पत्नी जितेन्द्र, निवासी जबलपुर ने वैवाहिक विवाद को लेकर आवेदन प्रस्तुत किया था। सुनवाई के दौरान न्यायाधीश श्रीमती रेणू खेस ने दोनों पक्षों को समझाइश दी। संवाद और पारिवारिक सहयोग के बाद पति-पत्नी के बीच लंबे समय से चले आ रहे मतभेद दूर हुए। दोनों ने पुराने विवाद भुलाकर साथ रहने की इच्छा जताई। पति ने पत्नी धंतीबाई को सम्मानपूर्वक अपने साथ ले जाने की सहमति दी, जबकि पत्नी ने भी स्वेच्छा से दाम्पत्य जीवन पुनः प्रारंभ करने का निर्णय लिया।
इसी तरह करीब छह वर्ष से अलग रह रहे सोहन और प्रीति ने भी लोक अदालत में आपसी मनमुटाव भुलाकर साथ रहने का फैसला किया। न्यायालय की समझाइश, पारिवारिक सहयोग और आपसी संवाद से दोनों के बीच पुनः विश्वास और स्नेह का वातावरण बना।
इस दौरान न्यायालय कक्ष में पति-पत्नी ने एक-दूसरे को वरमाला पहनाकर साथ रहने, एक-दूसरे का सम्मान करने और सुख-दुःख में साथ निभाने का संकल्प लिया। इस भावुक क्षण के साक्षी न्यायाधीश श्रीमती दीपा पॉल, दोनों पक्षों के परिजन, अधिवक्तागण एवं न्यायालयीन स्टाफ रहे। दंपती के पुनर्मिलन से न्यायालय परिसर में खुशी का माहौल बन गया।
लोक अदालत का उद्देश्य आपसी समझौते के माध्यम से विवादों का त्वरित, सरल और सौहार्दपूर्ण समाधान कर आमजन को सुलभ, शीघ्र एवं निःशुल्क न्याय उपलब्ध कराना है। इस लोक अदालत में बड़ी संख्या में प्रकरणों के निराकरण के साथ परिवारों के बीच विवाद समाप्त कर उन्हें फिर से जोड़ने की पहल भी सामने आई।




