बैतूल/चिचोली, सुरेन्द्र बावने। चिचोली के गोधना स्थित प्रसिद्ध चंडी दरबार में हक और अधिकार को लेकर लंबे समय से चला आ रहा विवाद हाईकोर्ट के फैसले के बाद एक बार फिर गरमा गया है। हाईकोर्ट का फैसला हरिदास यादव के पक्ष में आने के बाद पुराने मंदिर को तोड़कर नए मंदिर के निर्माण की प्रक्रिया शुरू किए जाने का विरोध करते हुए रविवार को आदिवासी संगठनों ने चंडी दरबार में महापंचायत आयोजित की। महापंचायत में जिले सहित आसपास के क्षेत्रों से बड़ी संख्या में आदिवासी समाज के लोग और संगठन पदाधिकारी शामिल हुए।
हाईकोर्ट के फैसले के बाद बढ़ा विवाद
गोधना स्थित चंडी दरबार में अधिकार को लेकर भूमिस्वामी पक्ष और आदिवासी संगठनों के बीच लंबे समय से विवाद चल रहा है। हाईकोर्ट का निर्णय हरिदास यादव के पक्ष में आने के बाद मंदिर निर्माण की प्रक्रिया शुरू होने की बात सामने आई। इसके विरोध में आदिवासी संगठनों ने प्रशासन के समक्ष आपत्ति दर्ज कराई।
संगठन की ओर से पुलिस अधीक्षक को आवेदन देकर मांग की गई कि मामला सुप्रीम कोर्ट में लंबित है, इसलिए अंतिम निर्णय आने तक मंदिर निर्माण कार्य पर रोक लगाई जाए। साथ ही चंडी दरबार में महापंचायत आयोजित करने की अनुमति भी मांगी गई थी।
पूजा-अर्चना के बाद हुई महापंचायत
रविवार को प्रशासनिक अमले की मौजूदगी में जयस आदिवासी संगठन के नेतृत्व में चंडी दरबार में मां चंडी की पूजा-अर्चना और आरती की गई। इसके बाद महापंचायत आयोजित हुई। इसमें आदिवासी समाज की आस्था, चंडी दरबार के अधिकार और प्रस्तावित मंदिर निर्माण को लेकर चर्चा की गई।
महापंचायत में जयस जिला अध्यक्ष संदीप धुर्वे, कांग्रेस नेता रमेश काकोड़िया, सुनील करोचे, डोमा सिंह, जितेंद्र उईके और संतोष टेकाम सहित चिचोली क्षेत्र और आसपास से पहुंचे आदिवासी संगठन के पदाधिकारी व समाजजन मौजूद रहे।
पेसा एक्ट के तहत ग्रामसभा की सहमति की मांग
महापंचायत में विशेष ग्राम पंचायत सभा आयोजित कर पेसा एक्ट के प्रावधानों के तहत चंडी दरबार से जुड़े किसी भी निर्णय में ग्रामसभा और स्थानीय आदिवासी समाज की सहमति सुनिश्चित करने की मांग उठाई गई। संगठन का कहना है कि चंडी दरबार केवल किसी एक व्यक्ति या पक्ष का विषय नहीं है, बल्कि इससे क्षेत्र के लोगों की धार्मिक आस्था और परंपराएं जुड़ी हैं। ऐसे में मंदिर निर्माण सहित अन्य निर्णय सभी संबंधित पक्षों की सहमति से किए जाने चाहिए।
सुप्रीम कोर्ट के फैसले तक निर्माण रोकने की मांग
महापंचायत के बाद आदिवासी संगठनों ने चंडी दरबार को आदिवासी समाज की आस्था और परंपरा से जुड़ा बताते हुए इसे आदिवासी समाज को सौंपने की मांग की। इसके साथ ही सुप्रीम कोर्ट में चल रहे मामले का अंतिम फैसला आने तक मंदिर निर्माण कार्य पर रोक लगाने की मांग को लेकर एसडीएम अभिजीत सिंह को ज्ञापन सौंपा गया।
सुरक्षा व्यवस्था रही चाक-चौबंद
महापंचायत को देखते हुए प्रशासन ने चंडी दरबार में सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए थे। मौके पर एडिशनल एसपी, एसडीओपी, विभिन्न थानों के थाना प्रभारी, तहसीलदार, राजस्व निरीक्षक और पटवारी सहित प्रशासनिक अमला मौजूद रहा। अधिकारियों ने पूरे आयोजन के दौरान स्थिति पर नजर बनाए रखी। महापंचायत शांतिपूर्ण तरीके से संपन्न हुई।
प्रशासन की कार्रवाई पर टिकी नजर
चंडी दरबार के अधिकार को लेकर लंबे समय से चल रहे विवाद के बीच आदिवासी संगठनों की महापंचायत और ज्ञापन के बाद मामला फिर सुर्खियों में है। अब नजर प्रशासन द्वारा ज्ञापन पर की जाने वाली कार्रवाई के साथ ही सुप्रीम कोर्ट में लंबित न्यायालयीन प्रक्रिया के अंतिम निर्णय पर टिकी है।




