श्रीनगर। जम्मू-कश्मीर की शिक्षा मंत्री सकीना इट्टू और डिप्टी सीएम सुरिंदर कुमार चौधरी ने टीईटी से छूट प्रस्ताव पास होने, किताबों पर बैन और जम्मू-कश्मीर विधानसभा में हंगामे पर बात की।शिक्षा मंत्री सकीना इट्टू ने गुरुवार को कहा कि ऐसा नहीं है कि शिक्षक टीईटी नहीं दे सकते, लेकिन हमारे जो टीचर हैं यह उनकी डिग्निटी का सवाल है। जहां तक शिक्षकों की गरिमा की बात हैं तो अगर उनको कहीं पर भी नुकसान पहुंचता है तो वहां हम उनके साथ खड़े हैं।
उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट की ओर से आदेश जारी किया गया है कि पूरे देश के शिक्षकों को टीईटी देना पड़ेगा, लेकिन उसी वक्त हमारे सीएम, जो लॉ मिनिस्टर भी हैं, ने निर्देश दिए। उन्होंने इस चीज को स्वीकृत किया है कि हमें सुप्रीम कोर्ट में जाना चाहिए।
इसके बाद, हमारे पास बस एक ही रास्ता बचा था कि पूरी विधानसभा एक प्रस्ताव पास करें और भारत सरकार को भेजे, ताकि उन्हें इस मुद्दे की गंभीरता का एहसास हो और वे टीईटी परीक्षा न कराने की दिशा में कदम उठाएं, जिससे हमारे शिक्षक मानसिक तनाव से बच सकें। शिक्षक हमारे बच्चों को पढ़ाते-सिखाते हैं। वह उनका भविष्य बनाते हैं।
इसलिए इस टीईटी रेजोल्यूशन के बारे में जो आज हाउस से प्रस्ताव पास किया है। मैं समझती हूं ये एक बहुत बड़ी बात है और ये रेजोल्यूशन जो यूनियन गवर्नमेंट के पास जाएगा, उससे मुझे उम्मीद है कि वो इसमें टीचर्स के हक में फैसला लेंगे और इससे पहले हम सुप्रीम कोर्ट में भी गए हैं। अगर कुछ और करने की जरूरत होगी, वो भी हम करेंगे ताकि टीचर्स की डिग्निटी को कहीं पर खतरा न पहुंचे।
जम्मू-कश्मीर सरकार ने हाल ही में उच्च शिक्षा संस्थानों और कॉलेजों के पुस्तकालयों से आपत्तिजनक और राष्ट्र-विरोधी सामग्री वाली 4,700 से अधिक किताबों को हटाया है। इसपर उन्होंने कहा कि अगर कोई किताब बैन हो जाती है तो इसके लिए कमेटी के सदस्य ही जवाबदेह होंगे।
डिप्टी सीएम सुरिंदर कुमार चौधरी ने कहा कि जम्मू-कश्मीर और यहां के लोगों के हक और हित में सरकार जो बिल पास करेगी, हम उसके साथ हैं। उन्होंने कहा कि हर बिल की अपनी-अपनी अहमियत है। ऐसा नहीं है कि कोई बिल पास हुआ तो उसकी अहमियत है और कोई नहीं हुआ तो उसकी नहीं है।
विपक्ष की ओर से ईसीआई ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग की गई है। इसको लेकर उन्होंने कहा कि यह आरोप एक ऐसे संस्थान पर लगा है, जिससे देश के लोगों का विश्वास जुड़ा है। जब भी ये लोग विधानसभा में बैठते हैं तो लोगों को इन पर भरोसा रहता है कि ये लोग आम जनता के हित में फैसला लेंगे। ऐसे में अगर हम आमजन के भरोसे को ही पूरा न करें तो कहीं न कहीं एक संस्थान के साथ धोखा होता है।
आज इलेक्शन कमीशन ऑफ इंडिया (ईसीआई) पर जो आरोप लगा है, वह किसी राजनीतिक पार्टी के द्वारा नहीं लगाया है। किसी एक इंसान ने नहीं लगाया है, बल्कि इलेक्शन कमीशन के दो सदस्यों ने लगाया है, इसलिए इन आरोपों पर गौर करने की जरूरत है और ईसीआई को इन बारे में खुलकर बताना चाहिए। उन्होंने कहा कि ईसीआई को बताना चाहिए कि हिंदुस्तान के लोकतंत्र में यह नौबत क्यों आई। खासकर उस दायरे पर आई, जिसपर लोकतंत्र टिका हुआ है। जहां हमारे वोटों का हक है।
उन्होंने कहा हम भाजपा से सवाल करेंगे कि 15 लाख कहां है। भाजपा ने कहा था कि चुनाव के बाद सरकार बनते ही वे राज्य का दर्जा बहाल कर देंगे। उन्होंने देश की संसद और देश की सबसे बड़ी अदालत, सुप्रीम कोर्ट के सामने भी जम्मू-कश्मीर के लोगों को राज्य का दर्जा वापस दिलाने का वादा किया था।














