पलेरा (टीकमगढ़)। टीकमगढ़ जिले के पलेरा के शिव-पार्वती मैरिज गार्डन में इन दिनों आस्था, उम्मीद और चमत्कारी दावों का अनूठा संगम देखने को मिल रहा है। गुजरात के सुरेंद्रनगर निवासी गणेश यादव, जो 'दो कंबल वाले बाबा' के नाम से जाने जाते हैं, के दो दिवसीय निशुल्क आरोग्य शिविर में भारी जनसैलाब उमड़ पड़ा है। पलेरा नगर सहित आसपास के ग्रामीण अंचलों से सैकड़ों की संख्या में महिलाएं, बुजुर्ग और असाध्य रोगों से पीड़ित मरीज अपनी तकलीफों से निजात पाने की आस लेकर शिविर में पहुंच रहे हैं।
दो कंबलों से गंभीर बीमारियों के इलाज का दावा
शिविर में उपचार का तरीका बेहद चौंकाने वाला है। बताया जा रहा है कि गणेश यादव अपने पास दो विशेष कंबल रखते हैं और इन्हीं कंबलों को मरीजों के शरीर पर डालकर उनकी शारीरिक परेशानियां दूर करने का दावा करते हैं। आयोजकों और बाबा के अनुसार, शिविर में हड्डियों के पुराने दर्द, बीपी, डायबिटीज (शुगर), लकवा (पैरालिसिस), नसों का ब्लॉकेज, नसों का सुन्न पड़ना, साइटिका, गठिया और पोलियो जैसी गंभीर और जटिल व्याधियों तक से राहत मिलने का दावा किया जा रहा है।
सुबह से ही मैरिज गार्डन के बाहर लंबी कतारें देखी जा रही हैं, जिनमें सबसे ज्यादा तादाद लाठी के सहारे पहुंचे बुजुर्गों और महिलाओं की है। शिविर पूरी तरह निशुल्क संचालित किया जा रहा है और इसके लिए किसी प्रकार का शुल्क नहीं लिया जा रहा है।
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'4 वर्ष की उम्र से लगा रहे शिविर, माता का है आशीर्वाद': गणेश यादव
अपने दावों के संबंध में गणेश यादव का कहना है कि उन्हें कुलदेवी/माता का विशेष आशीर्वाद प्राप्त है और कंबल के स्पर्श मात्र से शरीर की नकारात्मक ऊर्जा व रोग दूर हो जाते हैं। उन्होंने दावा किया कि वे महज चार वर्ष की अल्पायु से ही इस प्रकार के जनसेवा शिविरों का आयोजन करते आ रहे हैं। वे देश के विभिन्न राज्यों और शहरों में घूम-घूमकर अब तक हजारों लोगों को राहत पहुंचाने का दावा करते हैं।
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चमत्कारी दावों के बीच चिकित्सकीय प्रमाणिकता पर सवाल
भले ही अपनी बीमारियों से परेशान आम लोग आस्था और अंतिम उम्मीद के तहत इस दरबार में खिंचे चले आ रहे हैं, लेकिन कंबल ओढ़ाकर लकवा, पोलियो और नसों के ब्लॉकेज जैसी बीमारियों को ठीक करने के दावों की कोई वैज्ञानिक या चिकित्सीय पुष्टि नहीं है। आधुनिक चिकित्सा विज्ञान ऐसे दावों को सिरे से खारिज करता है। उपचार से वास्तव में किसी मरीज को स्थायी लाभ मिला है या यह केवल मनोवैज्ञानिक प्रभाव (प्लेसबो इफेक्ट) है, यह स्वतंत्र मेडिकल जांच का विषय है। बहरहाल, विज्ञान और विश्वास की इस रस्साकशी के बीच पलेरा में लगा यह अनोखा आरोग्य शिविर पूरे क्षेत्र में खासी चर्चा का केंद्र बना हुआ है।













