इंफाल। मणिपुर राज्य पुलिस द्वारा रविवार को आयोजित 'मणिपुर पुलिस हाफ मैराथन' में 3,000 से अधिक धावकों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। इस प्रतियोगिता में महिलाओं की भी बड़ी संख्या में भागीदारी रही, जो आयोजन का प्रमुख आकर्षण रही। यह मैराथन मणिपुर पुलिस के 135वें स्थापना दिवस (रेजिंग डे) के उपलक्ष्य में आयोजित किए जा रहे कार्यक्रमों के श्रृंखला का हिस्सा थी। इस दौड़ को मणिपुर के पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) मुकेश सिंह ने हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। यह आयोजन दौड़ने, शारीरिक फिटनेस और स्वस्थ जीवन शैली के प्रति लोगों के बढ़ते उत्साह को दर्शाता है। दौड़ के नतीजों में पारदर्शिता और सटीकता सुनिश्चित करने के लिए आयोजकों ने 'चिप-युक्त बिब' का इस्तेमाल किया, जिससे धावकों के समय को रिकॉर्ड करने और परिणामों को अधिक सटीक रूप से तय करने में मदद मिली।

मणिपुर के मुख्य सचिव राजीव सिंह ठाकुर ने पुरस्कार वितरण समारोह में हिस्सा लिया। उन्होंने विभिन्न श्रेणियों में बेहतरीन प्रदर्शन करने वाले धावकों को उनके समर्पण, लगन और खेल उपलब्धियों के लिए पुरस्कृत किया। पुलिस के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि इस हाफ मैराथन का उद्देश्य शारीरिक फिटनेस, खेल उत्कृष्टता और सामुदायिक भागीदारी को बढ़ावा देना था, साथ ही इसका मकसद पुलिस और जनता के बीच के संबंधों को और मजबूत करना भी था।

बड़ी संख्या में धावकों की भागीदारी और जनता के समर्थन ने इस आयोजन को सफल बनाया। मणिपुर पुलिस ने इसमें हिस्सा लेने वाले धावकों, आम जनता और उन सभी लोगों का आभार जताया, जिन्होंने इस कार्यक्रम को सुचारू रूप से संपन्न कराने में योगदान दिया। पुलिस ने प्रायोजकों और इवेंट पार्टनर्स के सहयोग के लिए भी उनका धन्यवाद किया। यह हाफ मैराथन, मणिपुर पुलिस के 135वें स्थापना दिवस से जुड़े कार्यक्रमों का एक हिस्सा है। यह आयोजन जनसेवा, फिटनेस और सामुदायिक जुड़ाव के प्रति पुलिस बल की प्रतिबद्धता को दर्शाता है।

मणिपुर पुलिस का इतिहास अप्रैल 1891 की घटनाओं से गहराई से जुड़ा है। उस समय एंग्लो-मणिपुर युद्ध के बाद, अंग्रेजों ने इस रियासत का प्रशासन अपने हाथों में ले लिया था। पुलिस बल के ऐतिहासिक रिकॉर्ड के अनुसार, अंग्रेजों ने 'स्टेट मिलिट्री पुलिस' का गठन किया था, जिसके पहले कमांडेंट पॉलिटिकल एजेंट क्रॉफर्ड बने थे। बाद में यही बल 'मणिपुर राइफल्स' के रूप में विकसित हुआ।

पिछले कुछ दशकों में, मणिपुर पुलिस ने अपनी ताकत और जिम्मेदारियों का विस्तार किया है। 1950 के दशक के आखिर से ही राज्य में कानून-व्यवस्था बनाए रखने और उग्रवाद से निपटने में मणिपुर पुलिस ने अहम भूमिका निभाई है। इस बल ने कर्तव्य पालन के दौरान कई बलिदान भी दिए हैं, जहां राज्य की सेवा करते हुए कई जवानों ने अपनी जान गंवाई है। इसके इतिहास में मणिपुर राइफल्स की पहली बटालियन भी शामिल है, जिसे उसकी लंबी संस्थागत विरासत के लिए पहचाना जाता है।