भोपाल। मध्य प्रदेश में दक्षिण-पश्चिम मानसून अपने अंतिम चरण की ओर बढ़ रहा है। 30 सितंबर तक चलने वाले आधिकारिक मानसूनी सीजन में अब तक प्रदेश में कुल 33.7 इंच (855.7 मिमी) यानी कोटे की 90.3 प्रतिशत बारिश रिकॉर्ड की जा चुकी है। हालांकि, मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के मानकों (96% से 104%) के अनुसार यह आंकड़ा अब भी 'सामान्य से कम' की श्रेणी में बना हुआ है। पूरे प्रदेश की औसत सामान्य बारिश 37.3 इंच है, जिसकी तुलना में अभी ओवरऑल 6 प्रतिशत कम पानी गिरा है।


भोपाल, ग्वालियर व छतरपुर समेत 22 जिलों में 100% या उससे अधिक बारिश

मौसम केंद्र (IMD) के अनुसार, राज्य के 55 में से 22 जिलों में सामान्य या उससे अधिक वर्षा हो चुकी है: भोपाल, राजगढ़, बुरहानपुर, खरगोन, ग्वालियर, शिवपुरी, गुना, दतिया, छतरपुर, टीकमगढ़, निवाड़ी, मैहर, आगर-मालवा, भिंड, श्योपुर, सिंगरौली, सीधी, सतना, मऊगंज, शहडोल, उमरिया और अनूपपुर शामिल हैं। मंडला, पन्ना, मंदसौर और मुरैना जिले शामिल हैं, जहां दो-तीन अच्छी झड़ियों से कोटा पूरा होने की उम्मीद है। इंदौर संभाग समेत प्रदेश के 32 जिलों में औसत से 5% से लेकर 48% तक कम बारिश दर्ज की गई है। पश्चिमी मध्य प्रदेश में औसत से 10% और पूर्वी हिस्से में 2% कम वर्षा हुई है।


बांधों की स्थिति: भदभदा-कलियासोत के गेट खुले; कई बड़े जलाशय लबालब

सितंबर महीने में हुई बारिश के चलते प्रदेश के प्रमुख जल स्रोतों में जलस्तर बेहतर हुआ है: बड़ा तालाब का वाटर लेवल पूरा होने के बाद भदभदा डैम का एक और कलियासोत डैम के दो गेट शनिवार को खोलने पड़े। बरगी, बाणसागर, गोपीकृष्ण, इंदिरा सागर, गांधी सागर, बारना, कोलार, महान, राजघाट, ओंकारेश्वर, जौहिला और कुंडालिया डैम 90 प्रतिशत या उससे अधिक भर चुके हैं।


मानसून का अब तक का सफर और आगे का पूर्वानुमान

इस बार मानसून 9 दिन की देरी से 24 जून को मध्य प्रदेश पहुंचा था, जिससे जून महीने में 30% बारिश कम दर्ज की गई थी। जुलाई के मध्य और अगस्त के दूसरे पखवाड़े में हुई भारी बारिश से जलस्तर में बड़ा सुधार आया। मानसूनी सीजन समाप्त होने में अभी करीब 10 दिन बाकी हैं। मौसम विभाग का अनुमान है कि विदाई से पहले प्रदेश में तेज बारिश का एक और दौर आ सकता है, जिससे इंदौर व मालवा अंचल के पिछड़े जिलों की स्थिति में सुधार होने की उम्मीद है।