सागर, स्वाति सोलंकी। बंडा जहरीली शराब कांड की जांच में सागर पुलिस ने कथित अंतरराज्यीय नकली शराब निर्माण नेटवर्क का खुलासा किया है। पुलिस के अनुसार इस नेटवर्क के तार सागर के अलावा दिल्ली, ग्वालियर और मुरैना से जुड़े मिले हैं। जांच में सामने आया है कि शराब बनाने के लिए इस्तेमाल होने वाला लिक्विड दिल्ली से, जबकि बोतल, रेपर और प्लास्टिक पैकिंग सामग्री ग्वालियर से मंगाई जाती थी और बंडा के ततरवारा में कथित तौर पर नकली शराब तैयार की जाती थी।


पुलिस के मुताबिक सितंबर के पहले सप्ताह में नकली शराब तैयार करने की योजना बनाई गई थी। मामले में चंदू राजा उर्फ चंद्रभान, मनीष लोधी उर्फ यशवंत ठाकुर, आशीष साहू, शिवांजय, सिद्धार्थ कुशवाहा, रोहित पटेल और मुरैना निवासी दिनेश शिवहरे समेत कई लोगों की भूमिका सामने आई है। पुलिस का दावा है कि दिनेश शिवहरे अपनी टीम के साथ ततरवारा पहुंचा था, जहां शराब तैयार करने की व्यवस्था की गई। तैयार शराब को कथित तौर पर लाइसेंसी दुकानों की आड़ में आसपास के क्षेत्रों में कमीशन पर खपाया जाता था।


जांच के दौरान पुलिस ग्वालियर और मुरैना तक पहुंची। आरोपियों की निशानदेही पर ग्वालियर से 11,050 खाली बोतलें, 80 एमएल बोतल बनाने वाली डाई मशीनें, 250 प्लास्टिक कैप्सूल, 900 तैयार खाली बोतलें और बोतल सील करने की मशीन बरामद किए जाने की जानकारी पुलिस ने दी है। वहीं शराब बनाने वाले लिक्विड का कनेक्शन दिल्ली स्थित आरएन केमिकल फर्म से सामने आने के बाद पुलिस ने फर्म के संचालक अनुपम गिरी को गिरफ्तार किया है।


पुलिस के अनुसार दिल्ली से पांच प्लास्टिक ड्रम में औद्योगिक स्पिरिट/थिनर सागर भेजा गया था। पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि कच्चे माल की सप्लाई और पूरे नेटवर्क में अन्य कौन-कौन लोग शामिल थे। पुलिस के मुताबिक मुरैना निवासी दिनेश शिवहरे और उसके साथी देवेंद्र उर्फ देवा जाटव की कथित नकली शराब के सेवन के बाद तबीयत बिगड़ी थी। दिनेश की हालत गंभीर होने पर उसे मुरैना ले जाया जा रहा था, लेकिन रास्ते में उसकी मौत हो गई।


सागर पुलिस ने मामले में अब तक 52 आरोपियों को नामजद किया है, जिनमें से 37 की गिरफ्तारी हो चुकी है। मनीष उर्फ यशवंत लोधी, सिद्धार्थ समेत अन्य फरार आरोपियों की तलाश जारी है। बंडा शराब कांड के बाद पुलिस और जिला प्रशासन की कार्रवाई लगातार जारी है। अवैध शराब से जुड़े ठिकानों और कथित अतिक्रमण के खिलाफ भी कार्रवाई की जा रही है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के सागर दौरे के बाद पुलिस-प्रशासन को कार्रवाई के निर्देश दिए गए थे। नए खुलासे के बाद जांच का दायरा और बढ़ गया है तथा पुलिस नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों और सप्लाई चैन की पड़ताल कर रही है।