पन्ना, अमित सिंह राठौर। मध्य प्रदेश के पन्ना जिले से जल संसाधन विभाग में भ्रष्टाचार का एक बड़ा मामला सामने आया है। सागर लोकायुक्त पुलिस की टीम ने जाल बिछाकर विभाग के दो कर्मचारियों को 45 हजार रुपये की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों गिरफ्तार कर लिया। शिकायतकर्ता ठेकेदार के अनुसार, मझगांय बांध की नहर निर्माण और रखरखाव से जुड़े बकाया बिलों का भुगतान कराने के एवज में रिश्वत की मांग की गई थी।
“मैं परसेंटेज नहीं लेता, जो खुशी से दे दे वो लेता हूं” — ईई के कथित बयान ने खड़े किए गंभीर सवाल
रिश्वतकांड के बाद जल संसाधन विभाग के कार्यपालन यंत्री (ईई) सी.बी. अहिरवार का एक कथित बयान इंटरनेट पर तेजी से वायरल हो रहा है। इस बयान में कथित तौर पर कहा जा रहा है, “मैं परसेंटेज नहीं लेता, जो खुशी से दे दे वो लेता हूं।” हालांकि, इस बयान की सत्यता और प्रामाणिकता की आधिकारिक पुष्टि होना अभी बाकी है, लेकिन इस तरह की बात सामने आने से विभाग की छवि पर गहरे दाग लगे हैं।
सिर्फ कर्मचारियों पर गाज या तय होगी अफसरों की जवाबदेही? निष्पक्ष जांच की मांग तेज
लोकायुक्त की इस कार्रवाई ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि निचले स्तर पर भ्रष्टाचार किस कदर हावी है। लेकिन अब बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि क्या शिकायतों पर सिर्फ लिपिकीय या मैदानी कर्मचारियों पर ही कार्रवाई होगी या विभागीय प्रमुखों की जवाबदेही भी तय की जाएगी? आम जनता और ठेकेदार संघ ने मांग की है कि वायरल बयान की निष्पक्ष जांच कराई जाए और मामले में शामिल सभी दोषियों पर सख्त से सख्त कार्रवाई हो।















