बैतूल, सुरेन्द्र बावने। मध्य प्रदेश के बैतूल जिले अंतर्गत चिचोली ब्लॉक में शासकीय स्कूलों की शैक्षणिक अधोसंरचना को सुदृढ़ करने और शिक्षण की गुणवत्ता में सुधार लाने के उद्देश्य से एक सराहनीय पहल सामने आई है। कलेक्टर के निर्देशन में चलाए जा रहे 'शिक्षा संजीवनी अभियान' के तहत चिचोली क्षेत्र के एक दर्जन से अधिक प्राथमिक और माध्यमिक विद्यालयों के लिए डेस्क-बेंच की व्यवस्था की गई है। चिचोली डिप्टी कलेक्टर एवं जनपद सीईओ रश्मि कोसारे तथा नगर परिषद अध्यक्ष डॉ. वर्षा मालवीय की मौजूदगी में डेस्क-बेंच से लदे पिकअप वाहनों को हरी झंडी दिखाकर संबंधित स्कूलों के लिए रवाना किया गया। जनसहयोग के माध्यम से शुरू की गई इस मुहिम से अब बच्चों को जमीन पर बैठकर पढ़ाई करने से मुक्ति मिलेगी और कक्षाओं का वातावरण बेहतर होगा।


जनसहयोग से संवर रही स्कूलों की तस्वीर: 'शिक्षा संजीवनी अभियान'

चिचोली की डिप्टी कलेक्टर एवं सीईओ रश्मि कोसारे ने अभियान की जानकारी देते हुए बताया कि जिला कलेक्टर के मार्गदर्शन में 'शिक्षा संजीवनी अभियान' का मुख्य उद्देश्य सरकारी स्कूलों में बुनियादी सुविधाओं का विस्तार करना और बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा का माहौल देना है। उन्होंने कहा कि शासकीय संसाधनों के साथ-साथ जब समाज और जनप्रतिनिधियों का जनसहयोग जुड़ता है, तो बड़े बदलाव संभव होते हैं। इसी सोच के तहत ब्लॉक के दूरदराज और जरूरतमंद स्कूलों को चिन्हित कर वहां अध्ययनरत छात्र-छात्राओं के लिए सुविधाजनक फर्नीचर उपलब्ध कराया जा रहा है, ताकि विद्यार्थियों का रुझान विद्यालय की ओर बढ़े।


जनप्रतिनिधियों और प्रशासनिक अमले ने हरी झंडी दिखाकर किया रवाना

आयोजित कार्यक्रम के दौरान नगर परिषद अध्यक्ष डॉ. वर्षा मालवीय, उपाध्यक्ष वर्षा संजय आवलेकर, वरिष्ठ नेता अनिल सिंह कुशवाहा, विकासखंड शिक्षा अधिकारी (बीईओ) ज्वाला प्रसाद प्रजापति, बीआरसी नीरज गलफट, प्राचार्य रमेश किंकरकर तथा आर.एस. माली सहित शिक्षा विभाग के अधिकारी प्रमुख रूप से उपस्थित रहे। अतिथियों ने शासन की मंशा के अनुरूप सरकारी विद्यालयों में शैक्षणिक गुणवत्ता को सुधारने और बच्चों को आधुनिक व सुगम वातावरण देने पर बल दिया। इसके पश्चात सभी जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों ने संयुक्त रूप से डेस्क-बेंच से भरे वाहनों को हरी झंडी दिखाकर स्कूलों के लिए रवाना किया।


छात्र-छात्राओं को मिलेगी सुविधा, पढ़ाई में बढ़ेगी रुचि

चिचोली ब्लॉक के एक दर्जन से अधिक चयनित स्कूलों में डेस्क और बेंच पहुंचने से विद्यार्थियों और शिक्षकों में भारी उत्साह है। अब तक कई ग्रामीण स्कूलों में पर्याप्त फर्नीचर न होने के कारण छात्र-छात्राओं को फर्श पर बैठकर पढ़ाई करनी पड़ती थी, जिससे खासकर ठंड और बारिश के दिनों में भारी असुविधा होती थी। कक्षाओं में व्यवस्थित सिटिंग अरेंजमेंट होने से न केवल विद्यार्थियों के स्वास्थ्य और बैठने की मुद्रा (पोस्चर) में सुधार होगा, बल्कि शालाओं में उपस्थिति और पठन-पाठन का स्तर भी बेहतर होगा।