छतरपुर, विनोद मिश्रा। छतरपुर के विद्युत विभाग में पदस्थ कार्यपालन यंत्री का खंभा घोटाला अब बिजली विभाग के आला अफसरों तक पहुंच गया है। इस मामले में शिकायतकर्ता ने विद्युत वितरण कंपनी के एमडी से मुलाकात कर शिकायती ज्ञापन उन्हें सौंपा है। बिजली विभाग के छतरपुर डिवीजन कार्यालय में पदस्थ कार्यपालन यंत्री अमर श्रीवास्तव और उनके मेंटेनेंस अमले पर अपने पद और अधिकारों का घोर दुरुपयोग कर संगठित भ्रष्टाचार करने का गंभीर आरोप लगाया है। शिकायतकर्ता ने बुधवार को जबलपुर से खजुराहो के झंकार होटल में तीन मंडलों की बैठक लेने आए पूर्व क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी के प्रबंध निदेशक अजय गुप्ता (आईएएस) से मुलाकात कर शिकायत पत्र सौंपा। एमडी अजय गुप्ता ने मामले को गंभीरता से लेते हुए आश्वासन दिया कि जांच उपरांत उचित कानूनी व प्रशासनिक कार्रवाई की जाएगी।
शिकायतकर्ता विवेक निगम ने बताया कि इससे पूर्व उन्होंने 1 अक्टूबर 2026 को भी जबलपुर कार्यालय को एक विस्तृत शिकायत पत्र भेजा था, जिसमें स्टोर से शासकीय विद्युत खंभों, लाइनों, कीमती उपकरणों और कबाड़ (स्क्रैप) की बड़े पैमाने पर चोरी का मुद्दा उठाया गया था, लेकिन उस पर अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई।
शिकायत पत्र के अनुसार, छतरपुर शहर के विद्युतीकरण सुदृढ़ीकरण और सड़क चौड़ीकरण के दौरान हटाए गए लगभग 300 पुराने एवं ग्रामीण क्षेत्रों के लगभग 500 विद्युत खंभों को विभागीय स्टोर में जमा करने के बजाय डेंटिंग-पेंटिंग कर नए खंभों के रूप में रोड डिवाइडर के बीच दोबारा खड़ा कर दिया गया। इसके बाद नए खंभों की पूरी सरकारी राशि का फर्जी वाउचर व बिलिंग के जरिए गबन कर लिया गया।
इसके अलावा, कार्यपालन यंत्री पर मास्टर प्लान और रेरा के नियमों को दरकिनार कर अवैध कॉलोनियों के बिल्डरों को फायदा पहुंचाने, सरकारी धन से बिजली लाइनें बिछाने और नियम विरुद्ध ट्रांसफार्मर लगाने के आरोप लगाए गए हैं। शिकायतकर्ता का आरोप है कि इस घोटाले को छुपाने के लिए उनके द्वारा लगाए गए आरटीआई आवेदनों की जानकारी भी विभाग द्वारा दबा दी गई है। शहर में मेंटेनेंस और केबल बॉक्स शिफ्टिंग में भी घटिया सामग्री का उपयोग कर वित्तीय हेराफेरी की गई है। शिकायतकर्ता ने एमडी से निष्पक्ष उच्चस्तरीय जांच समिति गठित करने, दोषी अधिकारियों को निलंबित करने और प्राथमिकी दर्ज कराने की मांग की है।
















