भोपाल। मध्य प्रदेश और देश भर के लाखों ईपीएस-95 (EPS-95) पेंशनर्स न्यूनतम पेंशन में बढ़ोतरी की मांग को लेकर एक बार फिर मुखर हो गए हैं। जीवन यापन के लिए बेहद कम राशि मिलने और जनप्रतिनिधियों से हो रही तुलना के चलते बुजुर्ग पेंशनर्स में गहरा असंतोष व्याप्त है। इसी कड़ी में राजधानी भोपाल में ईपीएस-95 राष्ट्रीय संघर्ष समिति के बैनर तले पेंशनर्स ने अपनी आवाज बुलंद करते हुए कड़े संघर्ष का ऐलान किया है।


60% पेंशनर्स को 'लाड़ली बहना' से भी कम राशि, 37 लाख को 1,000 से कम पेंशन

पेंशनर्स संगठनों का कहना है कि उन्होंने अपनी जिंदगी के 3 से 4 दशक (30 से 40 साल) पूरी ईमानदारी और समर्पण के साथ शासन-प्रशासन को दिए हैं, लेकिन इसके बदले बुढ़ापे में उन्हें दो वक्त की रोटी के लाले पड़ रहे हैं: ईपीएस-95 राष्ट्रीय संघर्ष समिति मध्यप्रदेश के प्रदेश अध्यक्ष शशिभान सिंह भदौरिया के अनुसार, राज्य के करीब 60 प्रतिशत पेंशनर्स की स्थिति यह है कि उन्हें मध्य प्रदेश सरकार की 'लाड़ली बहना योजना' के तहत मिलने वाली 1,500 रुपये मासिक सहायता से भी कम पेंशन मिल रही है। देश भर में लगभग 36.82 लाख पेंशनर्स ऐसे हैं, जिन्हें हर महीने 1,000 रुपये से भी कम राशि पेंशन के रूप में नसीब होती है। इतनी कम राशि में आज के दौर में दवाइयों और भोजन का खर्च चलाना भी असंभव हो गया है।


जनप्रतिनिधियों की पेंशन से तुलना और बढ़ा रोष

बुजुर्ग पेंशनर्स के बीच इस बात को लेकर भी भारी गुस्सा है कि आजीवन ईमानदारी से सरकारी सेवा करने वालों को तो नाममात्र की पेंशन दी जा रही है, जबकि जनप्रतिनिधियों (सांसदों-विधायकों) को कई गुना अधिक पेंशन और अन्य सुविधाएं आसानी से मिल जाती हैं। इसी विसंगति के कारण बुजुर्गों का रोष अब खुलकर सामने आने लगा है।


आश्वासनों के बाद भी नतीजा सिफर, अब आर-पार की लड़ाई का मूड

पेंशनर्स संगठनों का आरोप है कि वे पिछले कई वर्षों से न्यूनतम पेंशन बढ़ाने की मांग को लेकर संघर्ष कर रहे हैं। केंद्रीय श्रम मंत्री और प्रधानमंत्री स्तर पर कई बार आश्वासन मिल चुके हैं, और पूर्व में केंद्रीय श्रम मंत्री द्वारा स्पष्ट भरोसा भी दिलाया गया था, लेकिन धरातल पर अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया। सरकार और प्रशासन की इस बेरुखी से आहत होकर अब संगठन ने मध्य प्रदेश समेत देश भर में अपनी मांगों को लेकर बड़े आंदोलन और संघर्ष की चेतावनी दी है।