नई दिल्ली। दिल्ली हाईकोर्ट ने राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (एनसीआर) में रहने वाले वकीलों और अदालती कर्मचारियों को राहत दी है। इसके तहत, वे उन दिनों शहर में ऐसे वाहनों से प्रवेश कर सकते हैं जो बीएस-6 उत्सर्जन मानकों को पूरा नहीं करते, बशर्ते उन दिनों अदालतें काम कर रही हों।न्यायमूर्ति अमित महाजन की एकल पीठ ने दिल्ली उच्च न्यायालय बार एसोसिएशन की एक याचिका पर विचार करते हुए यह आदेश पारित किया। इस याचिका में गुरुग्राम, फरीदाबाद, नोएडा और गाजियाबाद जैसे पड़ोसी इलाकों में रहने वाले वकीलों को, राष्ट्रीय राजधानी में गैर-बीएस-6 वाहनों के प्रवेश पर लगी पाबंदियों से छूट देने की मांग की गई थी।
एसोसिएशन की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता एन हरिहरन ने दलील दी कि वकील और अदालती कर्मचारी न्यायिक प्रणाली का एक अहम हिस्सा हैं। इसलिए, उन्हें अदालती कार्यवाही में शामिल होने और अपनी पेशेवर जिम्मेदारियों को निभाने के लिए अपने वाहनों से दिल्ली आने की अनुमति दी जानी चाहिए।
उन्होंने तर्क दिया कि उनके प्रवेश पर रोक लगाने से अदालतों के कामकाज और न्याय व्यवस्था पर बुरा असर पड़ेगा, क्योंकि अदालती कार्यवाही के दौरान वकीलों का मौजूद रहना जरूरी होता है। ऐसे में जब उनके मामलों की सुनवाई हो रही हो और वे अदालत न पहुंच पाएं, तो इससे उन मुवक्किलों को नुकसान हो सकता है जिनका वे प्रतिनिधित्व कर रहे हैं।
हरिहरन ने कहा कि इस अधिसूचना में ही पर्यावरण विभाग को यह अधिकार दिया गया है कि वह अन्य श्रेणियों के वाहनों को विशेष छूट दे सके। इसके तहत, अधिकारी उन वकीलों को राहत देने पर विचार कर सकते हैं जो पेशेवर कामों के लिए दिल्ली आते हैं।
यह घटनाक्रम दिल्ली सरकार द्वारा लगाए गए उन प्रतिबंधों के बीच सामने आया है, जिनका उद्देश्य सर्दियों के मौसम में बढ़ते प्रदूषण से निपटना है। इन प्रतिबंधों के तहत, राष्ट्रीय राजधानी के बाहर पंजीकृत ऐसे वाहनों के प्रवेश पर रोक है जो बीएस-6 उत्सर्जन मानकों को पूरा नहीं करते हैं।
1 नवंबर से लागू हुए ये प्रतिबंध 31 जनवरी 2027 तक प्रभावी रहेंगे। इन नियमों के अनुसार, दिल्ली के बाहर पंजीकृत ऐसे पेट्रोल और डीजल वाहन, जो बीएस-6 या उससे पुराने उत्सर्जन मानकों के अंतर्गत आते हैं, उनके राष्ट्रीय राजधानी में प्रवेश पर रोक है। हालांकि, बीएस-6 मानकों का पालन करने वाले वाहनों, सीएनजी और बिजली से चलने वाले वाहनों, तथा एम्बुलेंस, दमकल गाड़ियों, पुलिस वाहनों और अन्य अधिसूचित श्रेणियों के वाहनों को इन प्रतिबंधों से छूट दी गई है।
इससे पहले, दिल्ली हाईकोर्ट ने इन प्रतिबंधों को चुनौती देने वाली एक अलग याचिका पर नोटिस जारी किया था, लेकिन इनके लागू होने पर अंतरिम रोक लगाने से इनकार कर दिया।
याचिका में दिल्ली में पंजीकृत वाहनों और पड़ोसी राज्यों में पंजीकृत वाहनों के साथ किए जा रहे अलग-अलग बर्ताव पर सवाल उठाया गया था। इसमें तर्क दिया गया कि एक जैसी स्थिति वाले वाहनों के साथ केवल उनके पंजीकरण की जगह के आधार पर अलग-अलग व्यवहार किया जा रहा है। परिवहन विभाग के अनुमान के अनुसार, दिल्ली-एनसीआर में 10 लाख से अधिक वाहन ऐसे हैं, जो बीएस-6 उत्सर्जन मानकों को पूरा नहीं करते हैं।














