कोलकाता। सत्यजीत रे फिल्म एंड टेलीविजन इंस्टीट्यूट (एसआरएफटीआई) कैंपस में 27 सितंबर को अखिल भारतीय ग्राहक पंचायत (एबीजीपी) के सदस्यों और अन्य छात्रों के बीच हुई हिंसक झड़प की जांच के लिए छह सदस्यों वाली एक स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (एसआईटी) बनाई गई है।एसआईटी के सदस्य एसआरएफटीआई कैंपस में हुई घटना और सीपीआईए (एम) के स्टूडेंट्स फेडरेशन ऑफ इंडिया (एसएफआई) और एबीजीपी से जुड़े छात्रों के बीच हुई झड़प की वजहों की बारीकी से जांच करेंगे।
राज्य के गृह विभाग की ओर से जारी अधिसूचना के मुताबिक, छह सदस्यों वाली इस टीम की अगुवाई कोलकाता पुलिस के एडिशनल कमिश्नर ऑफ पुलिस (क्राइम) कुणाल अग्रवाल करेंगे। टीम में कोलकाता पुलिस के डिटेक्टिव डिपार्टमेंट के डिप्टी कमिश्नर स्पर्श नीलांगी, पश्चिम बंगाल पुलिस के क्रिमिनल इन्वेस्टिगेशन डिपार्टमेंट के डिप्टी एसपी कौशिक घोष, इंस्पेक्टर सलिल रॉय, तुषारकांती घोष और हीराक दलपति शामिल हैं।
नोटिफिकेशन में यह भी कहा गया है कि एसआईटी का गठन कोलकाता पुलिस के ईस्ट डिवीन के तहत आने वाले पंचसयार पुलिस स्टेशन में दर्ज तीन अलग-अलग एफआआईआर के आधार पर किया गया है। सत्यजीत रे फिल्म एंड टेलीविजन इंस्टीट्यूट इसी इलाके में आता है।
इन तीन एफआईआर में से एक एबीजीपी सदस्यों ने और दूसरी एसआरएफटीआई के छात्रों के एक गुट ने दर्ज कराई है। तीसरी एफआईआर पुलिस ने खुद दर्ज की है। अब तक किसी को हिरासत में नहीं लिया गया है और न ही किसी की गिरफ्तारी हुई है। एसआईटी इस मामले पर अपनी शुरुआती रिपोर्ट 1 अक्टूबर को सौंपेगी।
नोटिफिकेशन में एसआईटी के हेड ऑफिसर को यह अधिकार दिया गया है कि अगर जरूरत हो, तो वे जांच के लिए पश्चिम बंगाल पुलिस या कोलकाता पुलिस से और स्टाफ मांग सकते हैं।
बता दें कि रविवार दोपहर करीब 1 बजे सत्यजीत रे फिल्म एंड टेलीविज़न इंस्टीट्यूट कैंपस में तब हिंसा हुई, जब वहां एबीजीपी का कार्यक्रम चल रहा था और एसएफआई के कार्यकर्ताओं का एक ग्रुप वहां पहुंचा।
खबरों के मुताबिक, एसएफआई कार्यकर्ताओं ने ऑर्गनाइजर्स से ऑडिटोरियम में प्रोग्राम करने के बारे में सवाल किए। ऑर्गनाइजर्स ने एसएफआई कार्यकर्ताओं पर भारत माता और स्वामी विवेकानंद की तस्वीरें और बैनर फाड़ने का आरोप लगाया।
हालांकि, एसएफआई कार्यकर्ताओं का दावा था कि इंस्ट्यूट मैनेजमेंट ने उन्हें बताए बिना एबीजीपी को प्रोग्राम करने की इजाजत दी थी। उन्होंने ऑर्गनाइजर्स पर उन्हें "उग्रवादी" और "बांग्लादेशी" कहने का भी आरोप लगाया। उन्होंने दावा किया कि इसका विरोध करने पर एसएफआई सदस्यों के साथ मारपीट की गई।
दूसरी ओर, एबीजीपी ने एसएफआई कार्यकर्ताओं पर बिना किसी उकसावे के उनके प्रोग्राम में बाधा डालने का आरोप लगाया। उन्होंने आरोप लगाया कि एसएफआई सदस्यों ने "आजादी" के नारे लगाए। एबीजीपी ने यह भी दावा किया कि उनके पास प्रोग्राम करने के लिए अधिकारियों से इजाजत थी।
झड़प की सूचना मिलने के बाद संबंधित डिविजनल डिप्टी कमिश्नर ऑफ पुलिस की अगुवाई में पुलिस की एक टीम मौके पर पहुंची। पुलिस की मौजूदगी में तनाव बढ़ गया और छात्रों तथा कार्यक्रम के आयोजकों के बीच हाथापाई की खबरें आईं।
कुछ छात्रों ने यह आरोप भी लगाया कि हिंसा के लिए जिम्मेदार लोगों के खिलाफ तुरंत कार्रवाई करने के बजाय, पुलिस शिकायत करने वालों के नाम और पते नोट कर रही थी। उन्होंने परेशान किए जाने के डर का जिक्र किया और आरोपियों के खिलाफ तुरंत केस दर्ज करने की मांग की। छात्रों के एक समूह ने अपनी मांगों के समर्थन में पुलिस की एक गाड़ी के पास विरोध-प्रदर्शन किया।














