बेंगलुरु। राज्य मंत्रिमंडल ने 'कर्नाटक जनजातीय विकास निगम' की स्थापना को मंजूरी दे दी है। इसका उद्देश्य विशेष रूप से जनजातियों, और साथ ही सूक्ष्म और अति-सूक्ष्म अनुसूचित जनजातियों के सामाजिक, शैक्षिक और आर्थिक विकास को बढ़ावा देना है।इस नए निगम की स्थापना 33.36 करोड़ रुपए के अनुदान से की जाएगी। गुरुवार को विधान सौधा में मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में इस प्रस्ताव को मंजूरी दी गई।
कर्नाटक में पहले से ही 'कर्नाटक महर्षि वाल्मीकि अनुसूचित जनजाति विकास निगम', 'कर्नाटक मेदारा विकास निगम' और 'खानाबदोश समुदाय विकास निगम' काम कर रहे हैं। ये निगम अपने पारंपरिक व्यवसायों और निवास स्थानों के आधार पर विशिष्ट समुदायों के लिए काम करते हैं।
हालांकि, सरकार ने महसूस किया है कि विशेष रूप से कमजोर जनजातीय समूहों (पीवीटीजी) के सर्वांगीण विकास के लिए एक अलग निगम की बहुत आवश्यकता है। इन समूहों में इरुला, सोलिगा, जेनुकुरुबा, कडु कुरुबा, कुडिया और सिद्दी जैसे समुदाय शामिल हैं, जो मुख्य रूप से वन क्षेत्रों और उनके आसपास रहते हैं।
एसटी कल्याण मंत्रालय के आधिकारिक बयान के अनुसार, यह पहल पूर्व मुख्यमंत्री सिद्धारमैया द्वारा 2026-27 के राज्य बजट में की गई उस घोषणा को पूरा करती है, जिसमें इस नए निगम को स्थापित करने की बात कही गई थी।
कैबिनेट के सामने रखे गए प्रस्ताव के अनुसार, इस नए निगम के दायरे में 33 अनुसूचित जनजाति समुदाय आएंगे। इसका मुख्य उद्देश्य इन समुदायों के सामाजिक-शैक्षिक और आर्थिक उत्थान के लिए विशेष योजनाएं बनाना और उन्हें लागू करना है।
यह निगम आर्थिक सशक्तिकरण, उद्यमिता को बढ़ावा देने, कौशल विकास, बाजार में सहायता और आजीविका को बेहतर बनाने पर विशेष जोर देगा।













