पुणे। राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) की अध्यक्ष और महाराष्ट्र की उपमुख्यमंत्री सुनेत्रा पवार ने गुरुवार को स्वीकार किया कि महाराष्ट्र विधान परिषद (एमएलसी) चुनाव के नतीजों पर आत्ममंथन की जरूरत है।
वह छत्रपति संभाजीनगर स्नातक निर्वाचन क्षेत्र में एनसीपी उम्मीदवार सतीश चव्हाण की हार पर प्रतिक्रिया दे रही थीं। इस सीट पर एनसीपी (शरद पवार गुट) के उम्मीदवार प्रतापसिंह पाटिल ने जीत दर्ज की।
एमएलसी चुनाव में महायुति गठबंधन ने पुणे शिक्षक और अमरावती शिक्षक सीटों पर जीत हासिल की, जबकि महा विकास अघाड़ी (एमवीए) ने पुणे स्नातक, नागपुर स्नातक और छत्रपति संभाजीनगर स्नातक समेत तीन सीटें अपने नाम कीं।
सुनेत्रा पवार ने पत्रकारों से बातचीत में कहा, "हर चुनाव में जीत और हार होती है। परिणाम आने के बाद आत्ममंथन करना जरूरी होता है और हम ऐसा करेंगे। हम सुधार की कोशिश करेंगे। मुझे लगता है कि यह परिणाम निश्चित रूप से हमारे लिए आत्ममंथन का विषय है।"
सुनेत्रा पवार की यह प्रतिक्रिया एनसीपी के कार्यकारी अध्यक्ष प्रफुल्ल पटेल के सोशल मीडिया पोस्ट के बाद आई है। पटेल ने लिखा था कि विधान परिषद चुनाव के नतीजे पार्टी के लिए एक स्पष्ट चेतावनी हैं।
उन्होंने कहा था कि अब समय आ गया है कि पार्टी जनता का विश्वास दोबारा हासिल करे, अपनी प्राथमिकताओं को ठीक करे और संगठनात्मक ढांचे को मजबूत बनाए।
वहीं, महाराष्ट्र एनसीपी अध्यक्ष सुनील तटकरे ने कहा कि पार्टी बैठकर चुनाव परिणामों का विश्लेषण करेगी। उन्होंने कहा कि उम्मीदवारों के चयन और चुनाव नतीजों की जिम्मेदारी सामूहिक रूप से पार्टी नेतृत्व की होती है। इन नतीजों के बाद महायुति के सहयोगी दलों भाजपा और शिवसेना के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर भी शुरू हो गया है।
महायुति के कुछ नेताओं ने हार के लिए शिवसेना को जिम्मेदार ठहराया। भाजपा नेताओं का आरोप है कि पुणे और नागपुर में शिवसेना ने अपेक्षित सहयोग नहीं दिया।
भाजपा प्रवक्ता नवनाथ बान ने कहा कि पुणे में अंतिम समय में सचिन सनप को समर्थन देकर शिवसेना ने महायुति की एकजुटता को कमजोर किया। उन्होंने दावा किया कि सनप को मिले वोट भाजपा उम्मीदवार के खाते में नहीं गए।
बान ने यह भी आरोप लगाया कि छत्रपति संभाजीनगर में मंत्री अब्दुल सत्तार ने सीधे एनसीपी उम्मीदवार के खिलाफ प्रचार किया, जिससे गठबंधन को नुकसान हुआ।
उन्होंने कहा कि यदि शिवसेना ने 'महायुति धर्म' का पालन करते हुए भाजपा और एनसीपी उम्मीदवारों का समर्थन किया होता तो गठबंधन पांचों सीटें जीत सकता था।
भाजपा के आरोपों पर शिवसेना प्रवक्ता आनंद परांजपे ने पलटवार किया। उन्होंने कहा कि पुणे स्नातक सीट पर भाजपा ने ऐसा उम्मीदवार उतारा जो पार्टी का सदस्य तक नहीं था। यदि भाजपा ने किसी पुराने और समर्पित कार्यकर्ता को टिकट दिया होता तो कार्यकर्ताओं और मतदाताओं में उत्साह पैदा होता।
परांजपे ने कहा कि भाजपा के अपने कार्यकर्ताओं और मतदाताओं ने ही बाहरी उम्मीदवार को स्वीकार नहीं किया, इसलिए हार का ठीकरा शिवसेना पर फोड़ना गलत है।
उन्होंने कहा, "सभी सीटों पर हम ही लड़ेंगे और हम ही जीतेंगे" जैसी सोच महायुति के लिए ठीक नहीं है। भाजपा को अपने सहयोगी दलों का सम्मान करना चाहिए।
शिवसेना नेता ने यह भी कहा कि दुनिया की सबसे बड़ी पार्टी होने का दावा करने वाली भाजपा को सहयोगियों पर दोषारोपण करने के बजाय अपनी चुनावी रणनीति और संगठन के भीतर की नाराजगी पर आत्ममंथन करना चाहिए।














