नई दिल्ली। भारत में दालों के उत्पादन में बढ़ोतरी और आत्मनिर्भरता की दिशा में उठाए गए कदमों का असर अब आयात पर भी दिखाई देने लगा है। सरकार की ओर से रविवार को जारी एक फैक्टशीट के अनुसार, 2025-26 में देश का कुल दाल उत्पादन बढ़कर 274.09 लाख टन हो गया, जो 2024-25 में 256.83 लाख टन था। 'दालों में आत्मनिर्भरता मिशन' के कारण इस अवधि में दालों का आयात भी काफी घटा है।सरकारी आंकड़ों के अनुसार, भारत का दाल आयात 31.52 प्रतिशत घटकर 46,427.60 करोड़ रुपए से 31,793.59 करोड़ रुपए रह गया। वहीं दूसरी ओर दालों का निर्यात 13.4 प्रतिशत बढ़कर 855 मिलियन डॉलर से 969.53 मिलियन डॉलर हो गया। वर्ष 2025-26 में कुल 10.01 लाख टन दालों का निर्यात किया गया। प्रमुख निर्यात गंतव्यों में चीन, यूएई, बांग्लादेश, अमेरिका और श्रीलंका शामिल रहे।

सरकार द्वारा 11 अक्टूबर 2025 को शुरू की गई नई योजना के तहत दालों का रकबा भी बढ़ा है। 2024-25 में 277.20 लाख हेक्टेयर में दालों की खेती होती थी, जो 2025-26 में बढ़कर 286.46 लाख हेक्टेयर हो गई।

योजना के एक वर्ष पूरे होने के साथ देश में दालों की उत्पादकता में भी सुधार देखा गया है। 2024-25 में प्रति हेक्टेयर उत्पादन 926 किलोग्राम था, जो 2025-26 में बढ़कर 957 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर हो गया।

फैक्टशीट में आगे कहा गया है कि 11,440 करोड़ रुपए के परिव्यय के साथ शुरू किए गए 'मिशन फॉर आत्मनिर्भरता इन पल्सेज' के तहत वर्ष 2030-31 तक दाल उत्पादन लगभग 350 लाख टन तक पहुंचाने और उत्पादकता को 1,130 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर तक बढ़ाने का लक्ष्य रखा गया है।

इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए तूर, उड़द और मसूर के उत्पादन पर विशेष जोर दिया जा रहा है। साथ ही जलवायु-अनुकूल बीजों और बेहतर गुणवत्ता वाले बीजों को बढ़ावा दिया जा रहा है। छह वर्षों में 87.5 लाख मुफ्त बीज किट और 126 लाख क्विंटल प्रमाणित बीज वितरित किए जाएंगे।

यह योजना 489 जिलों में क्लस्टर-आधारित मॉडल के जरिए लागू की जा रही है। इसके तहत पंजीकृत और इच्छुक किसानों से एनसीसीएफ और नेफेड (एनएएफईडी) के माध्यम से तूर, उड़द और मसूर की न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) पर खरीद भी की जा रही है।

देश में प्रमुख दाल उत्पादक राज्यों में मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, राजस्थान, उत्तर प्रदेश, गुजरात, आंध्र प्रदेश, कर्नाटक, झारखंड, ओडिशा और पश्चिम बंगाल शामिल हैं।

भारत दुनिया का सबसे बड़ा दाल उत्पादक देश है। दालों में 20 से 25 प्रतिशत तक प्रोटीन होता है, जो गेहूं की तुलना में दोगुना और चावल की तुलना में लगभग तीन गुना अधिक है। दालें न केवल भारत के कृषि निर्यात में महत्वपूर्ण योगदान देती हैं, बल्कि देश की पोषण सुरक्षा में भी अहम भूमिका निभाती हैं।