नई दिल्ली। भारतीय पारिवारिक कार्यालय (फैमिली ऑफिसेज) देश के निवेश परिदृश्य में तेजी से प्रभावशाली भूमिका निभा रहे हैं। एक रिपोर्ट के अनुसार, संपत्ति प्रबंधन की जिम्मेदारी नई पीढ़ी के हाथों में आने के साथ स्टार्टअप्स, इम्पैक्ट इन्वेस्टमेंट और अंतरराष्ट्रीय निवेशों में उनकी हिस्सेदारी लगातार बढ़ रही है।रिपोर्ट में उद्योग के अनुमानों का हवाला देते हुए कहा गया है कि भारत में वर्तमान में 300 से अधिक फैमिली ऑफिसेज हैं, जो सामूहिक रूप से 30 अरब डॉलर से अधिक की संपत्तियों का प्रबंधन कर रहे हैं।
रिपोर्ट के मुताबिक, 3 करोड़ डॉलर से अधिक संपत्ति वाले भारतीय परिवारों की संख्या 2025 के करीब 16,000 से बढ़कर 2030 तक 26,000 होने की संभावना है। वहीं अगले दशक में पीढ़ीगत स्तर पर संपत्ति का हस्तांतरण 1.3 ट्रिलियन डॉलर से 1.5 ट्रिलियन डॉलर तक पहुंच सकता है।
नई पीढ़ी को संपत्ति हस्तांतरित होने के साथ निवेश रणनीतियों में भी बदलाव देखने को मिल रहा है। अब भारत के आधे से अधिक फैमिली ऑफिसेज में मिलेनियल्स और जेन-जेड परिवार के सदस्य निवेश संबंधी फैसलों में भागीदारी कर रहे हैं। इसके चलते पारंपरिक निवेश विकल्पों की जगह वैकल्पिक परिसंपत्तियों और तकनीक आधारित व्यवसायों में रुचि बढ़ी है।
इसी वजह से फैमिली ऑफिसेज अब हेल्थटेक, फिनटेक और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) जैसे क्षेत्रों के स्टार्टअप्स में अधिक निवेश कर रहे हैं। रिपोर्ट के अनुसार, लगभग 30 प्रतिशत फैमिली ऑफिसेज अब पारंपरिक निवेश साधनों की तुलना में स्टार्टअप निवेश को प्राथमिकता दे रहे हैं।
यह बदलाव फंडिंग गतिविधियों में भी साफ दिखाई दे रहा है। फैमिली ऑफिसेज समर्थित स्टार्टअप निवेश 2023 के 876.7 मिलियन डॉलर से बढ़कर 2024 में 1.62 अरब डॉलर पर पहुंच गया, यानी यह लगभग दोगुना हो गया।
विशेषज्ञों का मानना है कि इसका प्रमुख कारण "पेशेंट कैपिटल" की उपलब्धता है। पारंपरिक वेंचर कैपिटल फंड्स की तरह निश्चित समय सीमा के दबाव में काम करने के बजाय फैमिली ऑफिसेज लंबी अवधि का नजरिया अपनाते हैं, जिससे स्टार्टअप्स को विस्तार और लाभप्रदता हासिल करने के लिए अधिक समय मिलता है।
कई प्रमुख भारतीय फैमिली ऑफिसेज अपने पारंपरिक कारोबार से आगे बढ़ चुके हैं। सत्त्वा ग्रुप के फैमिली ऑफिस ने तकनीकी निवेशों में विविधता लाई है, जबकि अर्था इंडिया वेंचर्स शुरुआती चरण के स्टार्टअप निवेशों के लिए पहचान बना चुका है। कंपनी ने ओयो जैसे स्टार्टअप्स में भी निवेश किया है।
रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि स्टार्टअप फंडिंग के अलावा इम्पैक्ट इन्वेस्टिंग भी भारत के धनाढ्य परिवारों के बीच तेजी से लोकप्रिय हो रही है। 2021 से 2024 के बीच 900 से अधिक उच्च संपत्ति वाले परिवारों ने इम्पैक्ट निवेश किए, जिनमें से कई ने अपने फैमिली ऑफिस ढांचे के माध्यम से पूंजी लगाई।












