नई दिल्ली। समाजवादी पार्टी के सांसद सनातन पांडे ने भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन के विपक्ष पर विदेशी ताकतों के साथ मिलकर भारत को कमजोर करने के आरोपों पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि यदि भाजपा नेतृत्व के पास विपक्ष के विदेशी फंडिंग के आधार पर काम करने की जानकारी है, तो केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को इस मामले में कार्रवाई करनी चाहिए। इसके अलावा, उन्होंने अभिनेता नसीरुद्दीन शाह की असहमति की आवाज दबाए जाने संबंधी चिंताओं, हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी के एसआईआर के बचाव और 1 नवंबर को प्रस्तावित इंडी ब्लॉक की रैली टालने की व्यापारियों की अपील पर भी प्रतिक्रिया दी।भाजपा अध्यक्ष नितिन नवीन के इस बयान पर कि विपक्ष विदेशी ताकतों के साथ मिलकर भारत को कमजोर करने में लगा है, सनातन पांडे ने कहा कि वह भाजपा अध्यक्ष को बधाई देना चाहते हैं कि उन्होंने कम से कम भारत के प्रति चिंता तो जताई है। हालांकि, उन्होंने सवाल किया कि यदि भाजपा अध्यक्ष को विपक्ष की विदेशी फंडिंग के बारे में जानकारी है, तो गृह मंत्री अमित शाह को इसकी जानकारी क्यों नहीं है।
सपा सांसद ने कहा कि यदि आरोप सही हैं और विपक्ष विदेशी फंडिंग के आधार पर काम कर रहा है, तो सरकार को इस मामले में कार्रवाई करनी चाहिए। देश की छवि धूमिल करने, भारत के खिलाफ काम करने, या देश की एकता और अखंडता को नुकसान पहुंचाने की कोशिश करने वाले किसी भी व्यक्ति के खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए, चाहे वह सत्ता पक्ष से हो या विपक्ष से।
उन्होंने चुनौती देते हुए कहा कि यदि भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष के आरोप सही हैं, तो पूरे विपक्ष के खिलाफ देशद्रोह का मुकदमा चलाया जाए। यदि ऐसा करने की हिम्मत नहीं है, तो भाजपा अध्यक्ष को अपने आरोपों के आधार पर कार्रवाई करने की मांग करनी चाहिए। इस तरह के बयानों से संविधान, लोकतंत्र और देश की एकता में विश्वास रखने वाले लोगों को ठेस पहुंच सकती है।
अभिनेता नसीरुद्दीन शाह की असहमति की आवाज दबाए जाने संबंधी चिंताओं पर सनातन पांडे ने कहा कि मौजूदा समय में विरोध और असहमति की आवाजों को दबाने की कोशिश हो रही है। उन्होंने इसके उदाहरण के रूप में जेनजी का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि युवा जाति, धर्म और राजनीतिक दलों की सीमाओं से ऊपर उठकर अपनी आवाज उठा रहे हैं। यदि बल का दुरुपयोग नहीं किया गया होता, तो युवा संसद के ऊपर झंडा फहराने तक पहुंच सकते थे। भाजपा युवाओं की आवाज दबाने का प्रयास कर रही है और इसके लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का नेतृत्व जिम्मेदार है।
सपा सांसद ने कहा कि विरोध को दबाने की कोशिश करने से कई बार विरोध और अधिक मुखर हो जाता है। उन्होंने शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के मुद्दे का उल्लेख करते हुए कहा कि यदि विपक्ष की मांग के बावजूद कार्रवाई नहीं होती और बाद में इस्तीफा देना पड़ता है, तो इससे विपक्ष के दबाव के असर का संकेत मिलता है।
हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी द्वारा एसआईआर का बचाव किए जाने पर सनातन पांडे ने कहा कि वह मुख्यमंत्री के बयान को पूरी तरह खारिज नहीं कर सकते, क्योंकि वह एक बड़े नेता और राज्य के मुख्यमंत्री हैं। हालांकि, उन्होंने सवाल उठाया कि यदि जनता की मांग है कि चुनाव बैलेट पेपर से कराए जाएं, तो सरकार इस दिशा में पहल क्यों नहीं करती। हरियाणा के मुख्यमंत्री को जनता की भावनाओं को सर्वोपरि मानते हुए बैलेट पेपर से चुनाव कराने के समर्थन की घोषणा करनी चाहिए और मुख्य चुनाव आयोग से इसका अनुरोध करना चाहिए। केवल बयान देने के बजाय मुख्यमंत्री को इस दिशा में कदम उठाकर दिखाना चाहिए।
1 नवंबर को प्रस्तावित इंडी ब्लॉक की रैली टालने की व्यापारियों की अपील पर सनातन पांडे ने कहा कि वह व्यापारियों की भावनाओं का सम्मान करते हैं। उन्होंने कहा कि रैली से व्यापार पर कुछ असर पड़ सकता है, लेकिन विपक्ष के युवाओं और किसानों की भावनाओं को भी ध्यान में रखना जरूरी है। पांडे ने स्पष्ट किया कि रैली को लेकर अंतिम निर्णय गठबंधन के दलों और नेताओं को लेना है। यदि गठबंधन के नेता इस मुद्दे पर विचार करते हैं, तो वह उनके फैसले का सम्मान करेंगे। हालांकि, उन्होंने व्यापारियों से सवाल किया कि जीएसटी लागू होने और नोटबंदी के दौरान उन्हें हुए नुकसान को लेकर ऐसी मांगें क्यों नहीं उठाई गईं। उन्होंने दावा किया कि जीएसटी के कारण कई दुकानदारों को आर्थिक परेशानी का सामना करना पड़ा और कुछ लोगों की आर्थिक स्थिति इतनी खराब हुई कि उनकी मौत तक हो गई।
सपा सांसद ने कहा कि व्यापारियों के हितों की बात करते समय उनके आर्थिक नुकसान और कठिनाइयों पर भी चर्चा होनी चाहिए। उन्होंने सवाल उठाया कि आर्थिक संकट से प्रभावित व्यापारियों को मुआवजा देने की मांग क्यों नहीं उठाई जाती।













