नई दिल्ली। भाजपा प्रवक्ता आरपी सिंह ने पंजाब की कानून-व्यवस्था, पाकिस्तान को लेकर फारूक अब्दुल्ला के बयानों, जामिया मिलिया इस्लामिया में कथित तौर पर लगे विवादित नारे और उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनावों के लिए समाजवादी पार्टी के साथ कांग्रेस की गठबंधन वार्ता को लेकर विपक्ष पर निशाना साधा। इसके अलावा, उन्होंने 1 नवंबर को दिल्ली के रामलीला मैदान में प्रस्तावित राहुल गांधी की रैली पर भी सवाल उठाते हुए इसे 1984 के सिख-विरोधी दंगों की यादों और पीड़ितों की संवेदनाओं से जोड़कर देखा।आरपी सिंह ने पंजाब की कानून-व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया कि राज्य में गैंगस्टरों और नशीले पदार्थों के कारोबार से जुड़े लोगों का प्रभाव बढ़ रहा है। उन्होंने कहा कि इन लोगों को आम आदमी पार्टी के विधायकों और मंत्रियों का संरक्षण प्राप्त है। पंजाब के मुख्यमंत्री के पास गृह विभाग की जिम्मेदारी भी है, इसलिए कानून-व्यवस्था बनाए रखने की जवाबदेही उन्हीं की है। भाजपा प्रवक्ता ने मुख्यमंत्री पर इस मोर्चे पर पूरी तरह विफल रहने का आरोप लगाया। उन्होंने यह भी कहा कि मुख्यमंत्री को राज्य की समस्याओं पर ध्यान देने के बजाय फ्रांस में अपना जन्मदिन मनाने से फुर्सत नहीं है।
पाकिस्तान को लेकर फारूक अब्दुल्ला के बयानों पर आरपी सिंह ने उनसे सीमा पार के कश्मीर की स्थिति पर भी ध्यान देने को कहा। उन्होंने कहा कि जम्मू-कश्मीर में आर्टिकल 370 हटाए जाने और भारत के साथ उसके पूर्ण एकीकरण के बाद हालात बेहतर हुए हैं। जम्मू-कश्मीर में हर साल दो करोड़ पर्यटकों का आना और आर्थिक तरक्की इस बदलाव के परिणाम हैं। उन्होंने फारूक अब्दुल्ला से पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर की परिस्थितियों पर भी नजर डालने की अपील की।
जामिया मिलिया इस्लामिया में कथित तौर पर लगे विवादित नारे और कांग्रेस नेता इमरान मसूद के वहां जाने को लेकर भी आरपी सिंह ने सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि इमरान मसूद को स्पष्ट करना चाहिए कि वे किस पक्ष का समर्थन करते हैं और क्या वे उन लोगों के साथ खड़े हैं जो कश्मीर को भारत से अलग करना चाहते हैं। उन्होंने कांग्रेस पर दोहरे चरित्र का आरोप लगाते हुए कहा कि पार्टी ऐसे लोगों के साथ खड़ी दिखाई देती है, जो देश को तोड़ने और विभाजन की बात करते हैं। उन्होंने पूर्वोत्तर भारत को चिकन नेक गलियारे के माध्यम से अलग करने की कथित मंशा का भी उल्लेख किया।
उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनावों के लिए समाजवादी पार्टी के साथ गठबंधन की बातचीत में कांग्रेस द्वारा 175 से 200 सीटों की कथित मांग पर भाजपा प्रवक्ता ने कटाक्ष किया। उन्होंने पिछले उपचुनावों का हवाला देते हुए दावा किया कि कांग्रेस ने पहले 10 सीटें, फिर पांच और उसके बाद दो सीटें मांगी थीं। इस बार भी कांग्रेस की स्थिति ऐसी ही हो सकती है और उसे गठबंधन में जितनी सीटें मिलेंगी, उसे उतने पर ही चुनाव लड़ना पड़ेगा।
रामलीला मैदान में 1 नवंबर को प्रस्तावित राहुल गांधी की रैली पर सवाल उठाते हुए आरपी सिंह ने तारीख के चयन को लेकर कांग्रेस की मंशा पर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि 1984 में इसी अवधि के दौरान दिल्ली में सिख-विरोधी हिंसा हुई थी और बड़ी संख्या में सिखों की हत्या की गई थी।
भाजपा प्रवक्ता ने 1984 की हिंसा पर सैम पित्रोदा के कथित बयान 'हुआ तो हुआ' का जिक्र करते हुए कांग्रेस पर पीड़ितों की संवेदनाओं की अनदेखी करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि 31 अक्टूबर की शाम से 1, 2, 3 और 4 नवंबर तक हुई हिंसा को सिख समुदाय कभी नहीं भूल सकता। 1 नवंबर को रैली आयोजित करने से पीड़ितों के पुराने जख्म ताजा हो सकते हैं। कांग्रेस ने जानबूझकर यह तारीख चुनी है और उसका कार्यक्रम सिख समुदाय की भावनाओं को आहत कर सकता है।














