नई दिल्ली। हेमा मालिनी उन चुनिंदा अदाकाराओं में शामिल हैं, जिनकी खूबसूरती, शानदार डांस और दिलकश अदाओं ने दशकों तक दर्शकों के दिलों पर राज किया। 70 और 80 के दशक में हेमा मालिनी का जादू ऐसा था कि हर कोई उन्हें अपनी फिल्म में कास्ट करना चाहता था। उनकी मुस्कान और चुलबुला अंदाज लोगों को दीवाना बना देता था। क्या आप जानते हैं कि जिस हेमा मालिनी पर बाद में पूरा बॉलीवुड फिदा हो गया, उन्हें करियर की शुरुआत में एक निर्देशक ने फिल्म से बाहर कर दिया था? इतना ही नहीं, उनसे यह तक कह दिया गया था कि वह कभी अभिनेत्री नहीं बन सकतीं।

हेमा मालिनी का जन्म 16 अक्टूबर 1948 को तमिलनाडु में हुआ था। उनकी मां जया चक्रवर्ती फिल्म निर्माण से जुड़ी थीं। घर में फिल्मी माहौल होने के कारण हेमा का रुझान भी फिल्मों और कला की ओर था। हालांकि, उनकी मां चाहती थीं कि वह एक बेहतरीन डांसर बनें। हेमा ने कम उम्र में ही नृत्य सीखना शुरू कर दिया था और धीरे-धीरे अपनी कला से पहचान बनाने लगीं।

फिल्मों में जगह बनाना उनके लिए आसान नहीं रहा। महज 13-14 साल की उम्र में उन्हें तमिल फिल्म 'वेन्निरा अदाई' में काम करने का मौका मिला। इस फिल्म का निर्देशन सीवी श्रीधर कर रहे थे। शुरुआत में हेमा को फिल्म के लिए चुन लिया गया और उनके कुछ शॉट्स भी शूट किए गए। उन्हें लगा कि अब उनके अभिनय करियर की शुरुआत हो जाएगी लेकिन कहानी ने अचानक दूसरा मोड़ ले लिया।

कुछ दिनों की शूटिंग के बाद निर्देशक ने उन्हें फिल्म से बाहर कर दिया। हेमा मालिनी ने बाद में अपनी किताब 'बियॉन्ड द ड्रीमगर्ल' के विमोचन के दौरान इस घटना का जिक्र किया था। उनके मुताबिक, निर्देशक ने उन्हें यह कहते हुए रिजेक्ट कर दिया था कि वह बहुत दुबली-पतली हैं और अभिनेत्री बनने के लिए लायक नहीं हैं। यह बात इतनी कम उम्र में सुनना हेमा के लिए किसी बड़े झटके से कम नहीं था। उन्हें समझ नहीं आ रहा था कि आखिर कुछ दिन शूटिंग करने के बाद उन्हें अचानक क्यों हटा दिया गया।

हेमा मालिनी ने एक इंटरव्यू में बताया था कि उस समय उन्हें एहसास भी नहीं हुआ कि वह मानसिक रूप से कितनी परेशान हो गई थीं। फिल्म से निकाले जाने के बाद वह काफी असहज महसूस करने लगी थीं। उन्हें डर था कि कहीं लोग उनका मजाक न उड़ाने लगें और उनके डांस कार्यक्रमों में आना बंद न कर दें।

एक तरफ वह अपने डांस के जरिए पहचान बना रही थीं, तो दूसरी तरफ फिल्मों में मिली इस नाकामी ने उनके आत्मविश्वास को झटका दिया था। हालांकि, उन्होंने हार मानने के बजाय अपने सपने को पूरा करने की कोशिश जारी रखी। कई कोशिशों और संघर्ष के बाद साल 1968 में हेमा मालिनी को राज कपूर के साथ फिल्म 'सपनों का सौदागर' में काम करने का मौका मिला। यह फिल्म उनके हिंदी सिनेमा करियर की अहम शुरुआत साबित हुई। फिल्म के प्रचार के दौरान उन्हें 'ड्रीम गर्ल' के नाम से पेश किया गया।

इसके बाद साल 1970 में आई फिल्म 'जॉनी मेरा नाम' ने उनकी लोकप्रियता को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने में अहम भूमिका निभाई। देव आनंद के साथ उनकी जोड़ी दर्शकों को पसंद आई और हेमा के लिए बॉलीवुड में सफलता के दरवाजे खुलने लगे।

साल 1972 में रिलीज हुई फिल्म 'सीता और गीता' हेमा मालिनी के करियर का बड़ा मोड़ साबित हुई। इस फिल्म में उन्होंने दो जुड़वां बहनों की भूमिकाएं निभाईं, जिनका स्वभाव एक-दूसरे से बिल्कुल अलग था। अपने शानदार अभिनय और कॉमिक टाइमिंग से उन्होंने दर्शकों का दिल जीत लिया। इस फिल्म के लिए उन्हें सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री का फिल्मफेयर पुरस्कार भी मिला।

इसके बाद 'शोले', 'ड्रीम गर्ल', 'खुशबू', 'मीरा' और 'किनारा' जैसी फिल्मों में उन्होंने अपनी प्रतिभा के अलग-अलग रंग दिखाए। जहां 'शोले' की बसंती ने दर्शकों को खूब हंसाया, वहीं 'मीरा' जैसी फिल्म में उनके गंभीर अभिनय ने साबित किया कि वह सिर्फ खूबसूरती के लिए नहीं बल्कि अपने हुनर के लिए भी जानी जाती हैं।

हेमा मालिनी ने अपने लंबे करियर में करीब 150 फिल्मों में काम किया और हिंदी सिनेमा की सबसे लोकप्रिय अभिनेत्रियों में अपनी जगह बनाई। अभिनय के साथ-साथ उन्होंने शास्त्रीय नृत्य, निर्देशन और राजनीति में भी अपनी पहचान बनाई। वह मथुरा से लोकसभा सांसद भी हैं।