छतरपुर, विनोद मिश्रा। मध्य प्रदेश के छतरपुर जिले से स्वास्थ्य सेवाओं की पोल खोलने वाली एक बेहद चिंताजनक तस्वीर सामने आई है। विश्व प्रसिद्ध पर्यटन नगरी खजुराहो के मुख्य बस स्टैंड पर एक साथ दर्जनों जीवनरक्षक एंबुलेंस खड़ी नजर आ रही हैं, जो सीधे तौर पर आपातकालीन स्वास्थ्य व्यवस्था की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करती हैं। जिन गाड़ियों का मुख्य उद्देश्य सड़कों पर दौड़कर मरीजों की जान बचाना है, वे आज मरम्मत के इंतजार में जंग खाती दिखाई दे रही हैं।

कागजों में 51 एंबुलेंस, धरातल पर दावों की पोल

जिलेभर में एडवांस्ड लाइफ सपोर्ट (ALS) और बेसिक लाइफ सपोर्ट (BLS) श्रेणी की कुल 51 एंबुलेंस होने का दावा किया जाता है। लेकिन बड़ा सवाल यह है कि क्या ये सभी 51 गाड़ियां वास्तव में मरीजों की सेवा के लिए सड़कों पर उतर रही हैं? खजुराहो बस स्टैंड पर लगी एंबुलेंस की कतार इस बात की गवाही दे रही है कि इनमें से कई वाहन लंबे समय से खराब पड़े हैं। सवाल यह भी उठता है कि जब जिले के दूरदराज इलाकों से मरीजों को समय पर एंबुलेंस न मिलने की शिकायतें लगातार सामने आती हैं, तो ऐसे में इन जीवनरक्षक वाहनों का एक जगह यूं खड़ा रहना किसकी लापरवाही का नतीजा है?

जिंदगी और मौत के बीच जूझते मरीज, भगवान भरोसे व्यवस्था

किसी भी सड़क दुर्घटना के घायल, प्रसव पीड़ा से कराहती गर्भवती महिला या किसी गंभीर मरीज के लिए एंबुलेंस का एक-एक मिनट बेहद कीमती होता है। ऐसे नाजुक वक्त में यदि एंबुलेंस खराब मिलें, तो मरीजों की जान पर हमेशा खतरा मंडराता रहता है। स्थानीय नागरिकों का कहना है कि यदि समय पर वाहन उपलब्ध न हो, तो आम जनता किस भरोसे जिए? सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या खराब गाड़ियों के एवज में कोई वैकल्पिक वाहन तैनात किए गए हैं या नहीं?

मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी का बयान, पर ठोस कार्रवाई का इंतजार

इस पूरे गंभीर मामले पर जब छतरपुर के मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (CMHO) डॉ. आरपी गुप्ता से बात की गई, तो उन्होंने संबंधित एजेंसी के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने की बात कही है। हालांकि, अब जनता के मन में यह सवाल उठ रहा है कि सिर्फ जुबानी जमा खर्च से क्या व्यवस्था सुधरेगी? कार्रवाई कब धरातल पर उतरेगी और ये खराब एंबुलेंस दुरुस्त होकर कब तक दोबारा सड़कों पर मरीजों की सेवा के लिए दौड़ती नजर आएंगी?