महोबा। उत्तर प्रदेश के महोबा जिले की सदर तहसील क्षेत्र से जमीन के सौदे में बड़ी धोखाधड़ी का मामला सामने आया है। नारूपुरा निवासी एक पीड़ित परिवार ने शहर के दो लोगों पर करीब तीन बीघा पुश्तैनी जमीन का ₹3.5 करोड़ (साढ़े तीन करोड़ रुपये) में सौदा करने और बकाया ₹2.5 करोड़ (ढाई करोड़ रुपये) का भुगतान न करने का गंभीर आरोप लगाया है। बकाया रकम के बदले दिए गए चेक बैंक में लगाने पर बाउंस हो गए। न्याय की आस में पीड़ित परिवार ने गुरुवार शाम करीब पांच बजे एसडीएम कार्यालय पहुंचकर गुहार लगाई, जिसके बाद प्रशासन ने मामले की जांच के लिए एक संयुक्त टीम का गठन कर दिया है।


इलाज के लिए बेचनी पड़ी थी पुश्तैनी जमीन

पीड़ित बुजुर्ग महिला राजकुंवर और उनके बेटे दीपक के अनुसार, परिवार में गंभीर बीमारी के इलाज के लिए पैसों की सख्त जरूरत थी। इसी मजबूरी के चलते उन्होंने बीजानगर स्थित अपनी करीब तीन बीघा पुश्तैनी जमीन को बेचने का फैसला किया था। आरोप है कि शहर के दो व्यक्तियों ने यह जमीन साढ़े तीन करोड़ रुपये में खरीदने का सौदा तय किया था। परिवार के मुताबिक, 18 जुलाई 2024 को सदर तहसील में जमीन का आधिकारिक एग्रीमेंट कराया गया था। दीपक का आरोप है कि खरीदारों ने शुरुआत में केवल एक करोड़ रुपये दिए, लेकिन शेष ढाई करोड़ रुपये देने के नाम पर लगातार टालमटोल करते रहे।


चेक बाउंस होने और प्लॉटिंग शुरू करने का आरोप

पीड़ित परिवार का आरोप है कि जब उन्होंने अपनी बकाया रकम का दबाव बनाया, तो उन्हें भुगतान के लिए कुछ चेक दिए गए: परिवार ने जब वे चेक बैंक ऑफ बड़ौदा और आईसीआईसीआई बैंक में जमा किए, तो खाते में राशि न होने या अन्य कारणों से वे सभी चेक बाउंस हो गए। परिवार का यह भी आरोप है कि आरोपियों ने पूरी रकम चुकाए बिना ही उस जमीन पर अवैध रूप से प्लॉटिंग कर उसे अन्य लोगों को बेचना शुरू कर दिया है। जब इसका विरोध किया गया, तो उन्हें जान से मारने की धमकियां दी गईं। (इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।)


प्रशासन की सख्त कार्रवाई: संयुक्त टीम गठित

ठगी और धोखाधड़ी से परेशान पीड़ित परिवार अपने शिकायती पत्र और बाउंस हुए चेक लेकर सीधे एसडीएम कार्यालय पहुंचा और दोषियों पर कड़ी कार्रवाई की मांग की। महोबा सदर के एसडीएम शिव ध्यान पांडे ने मामले को गंभीरता से लेते हुए बताया कि इस पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच के लिए तहसीलदार और थाना प्रभारी निरीक्षक की एक संयुक्त टीम का गठन कर दिया गया है। प्रशासन का कहना है कि जांच रिपोर्ट में जो भी तथ्य सामने आएंगे, उनके आधार पर आगे की सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।