नई दिल्ली। भारत को वित्त वर्ष 35 तक करीब 1.5 अरब स्क्वायर फीट अतिरिक्त प्राइवेट एजुकेशन इन्फ्रास्ट्रक्चर की आवश्यकता होगी। इससे देश में रियल एस्टेट डेवलपर्स और संस्थागत निवेशकों के लिए नए अवसर पैदा होंगे। यह जानकारी शुक्रवार को जारी रिपोर्ट में दी गई। सीबीआरई साउथ एशिया की रिपोर्ट के अनुसार, यह मांग भारत की बड़ी युवा आबादी, स्कूलों/कॉलेजों में दाखिले की बढ़ती संख्या, निजी क्षेत्र की बढ़ती भागीदारी और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा की बढ़ती मांग के कारण पैदा हो रही है।

इसमें से लगभग 0.9 बिलियन वर्ग फुट की अतिरिक्त मांग निजी के-12 स्कूलों से आएगी, जबकि निजी (बिना सरकारी सहायता वाले) उच्च शिक्षण संस्थानों की हिस्सेदारी लगभग 0.4 बिलियन वर्ग फुट होगी।

रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि संस्थागत निवेशक, विशेष रूप से समृद्ध शहरी बाजारों में, बड़े स्तर पर विस्तार करने वाले प्रीमियम के-12 प्लेटफॉर्म्स में रुचि दिखा रहे हैं।

बयान में कहा गया, "निवेशक 'स्ट्रक्चर्ड ऑपरेटिंग कंपनी-प्रॉपर्टी कंपनी' मॉडल पर भी विचार कर रहे हैं, जो रियल एस्टेट के स्वामित्व को शैक्षणिक कार्यों से अलग करता है। इस तरह की व्यवस्था डेवलपर्स और प्रॉपर्टी मालिकों को लीज या रेवेन्यू-शेयरिंग के जरिए कमाई के अवसर दे सकती है, और साथ ही शिक्षा के बुनियादी ढांचे के विस्तार में भी मदद कर सकती है।"

सीबीआरई में भारत, दक्षिण-पूर्व एशिया, मध्य पूर्व और अफ्रीका के चेयरमैन और सीईओ अंशुमन मैगजीन ने कहा, “जैसे-जैसे निजी शिक्षा प्रदाता अलग-अलग बाजारों में अपनी मौजूदगी बढ़ा रहे हैं, वैसे-वैसे स्केलेबल बुनियादी ढांचा और ऑपरेटिंग मॉडल लंबी अवधि की वृद्धि में मददगार साबित हो सकते हैं। इस मांग को पूरा करने में डेवलपर्स और स्थापित शिक्षा संचालकों के बीच की साझेदारी एक अहम भूमिका निभा सकती है।”

भारत में शिक्षा के बुनियादी ढांचे का दायरा भौगोलिक रूप से भी फैल रहा है। बड़े महानगरों में पहले से ही संगठित निजी स्कूल और उच्च शिक्षा संस्थान मौजूद हैं, जबकि अब कुछ टियर-II शहर भी निवेशकों का ध्यान खींच रहे हैं, क्योंकि शैक्षणिक संस्थान क्षेत्रीय बाजारों में अपने विस्तार की संभावनाएं तलाश रहे हैं।

सीबीआरई में भारत, मध्य पूर्व और अफ्रीका के कंसल्टिंग एंड वैल्युएशन सर्विसेज के मैनेजिंग डायरेक्टर, रामी कौशल ने कहा, “स्थापित शिक्षा केंद्र और बड़ी छात्र आबादी वाले उभरते शहर विस्तार के अच्छे अवसर देते हैं। लेकिन किसी प्रोजेक्ट की सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि उसकी लोकेशन कैसी है, बुनियादी ढांचा कितना उपयुक्त है, और क्या वे भरोसेमंद शिक्षा संचालकों के साथ साझेदारी कर रहे हैं।”