नई दिल्ली। समाजवादी पार्टी के सांसद मोहिबुल्लाह नदवी ने उत्तर प्रदेश में सरकारी नौकरी के लिए लागू सख्त वेरिफिकेशन नियमों, बैलेट पेपर से हुए एमएलसी चुनावों पर भाजपा नेताओं की टिप्पणियों और एक नवंबर को दिल्ली में प्रस्तावित रैली पर प्रतिक्रिया दी। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार युवाओं को रोजगार देने के बजाय समस्याएं पैदा कर रही है और प्रदर्शन में शामिल होने वाले लोगों के अधिकारों को सीमित करने की कोशिश की जा रही है। वहीं, चुनाव प्रक्रिया पर उन्होंने कहा कि पूरे देश में बैलेट पेपर से निष्पक्ष चुनाव होने चाहिए और किसी भी तरह के दबाव या बूथ कैप्चरिंग की गुंजाइश नहीं होनी चाहिए।उत्तर प्रदेश में सरकारी नौकरी के लिए सख्त वेरिफिकेशन नियमों पर मोहिबुल्लाह नदवी ने कहा कि सरकार अलग-अलग चीजों की अलग-अलग परिभाषाएं तय कर रही है। सरकार का ध्यान देशवासियों की तरक्की, विद्यार्थियों के भविष्य, किसानों को राहत देने, बच्चों की शिक्षा और युवाओं को रोजगार उपलब्ध कराने के बजाय नई समस्याएं पैदा करने पर केंद्रित है। सरकार ने युवाओं को रोजगार और बेरोजगारी भत्ता देने के वादे किए थे, लेकिन उन वादों को पूरा नहीं किया गया। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकारी नौकरियों के लिए होने वाली परीक्षाओं में पेपर लीक की घटनाओं से विद्यार्थियों को परेशानी का सामना करना पड़ा। इससे कई परिवार प्रभावित हुए और युवाओं के भविष्य पर गंभीर असर पड़ा।

नोटबंदी का जिक्र करते हुए सपा सांसद ने कहा कि उस समय काले धन की वापसी की बात कही गई थी, लेकिन यह उद्देश्य पूरा नहीं हुआ। उन्होंने बैंकों से हजारों करोड़ रुपए लेकर विदेश भागने वाले लोगों का भी उल्लेख किया और आरोप लगाया कि सरकार विभिन्न मोर्चों पर नाकाम रही है। उन्होंने कहा कि सरकार की नीतियों और नीयत पर सवाल उठते हैं। प्रदर्शनकारियों के सत्यापन नियमों पर सवाल उठाते हुए उन्होंने कहा कि यदि युवा अपने अधिकारों के लिए प्रदर्शन करते हैं, तो क्या उन्हें अपराधी मान लिया जाएगा? उन्होंने सवाल किया कि जो सरकार परीक्षाएं सही तरीके से आयोजित नहीं कर पाई, क्या वह अब युवाओं को रोजगार नहीं देने के लिए नए बहाने तलाश रही है?

एमएलसी चुनाव के परिणामों पर भाजपा नेताओं की टिप्पणियों के संदर्भ में मोहिबुल्लाह नदवी ने कहा कि पूरे देश में बैलेट पेपर से चुनाव होने चाहिए। उन्होंने कहा कि चुनाव स्वतंत्र और निष्पक्ष तरीके से कराए जाने चाहिए और बूथ कैप्चरिंग, दबाव डालकर वोट डलवाने या प्रशासन के जरिए किसी को प्रभावित करने जैसी स्थितियां नहीं होनी चाहिए। चुनावी प्रक्रिया में निष्पक्षता सबसे महत्वपूर्ण है। यदि मतदाताओं को बिना किसी दबाव के अपने मताधिकार का इस्तेमाल करने दिया जाए, तो चुनाव परिणामों से वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो जाएगी। लोकतांत्रिक व्यवस्था में चुनाव की स्वतंत्रता और पारदर्शिता पर विशेष ध्यान दिया जाना चाहिए।

एमएलसी चुनाव में कांग्रेस के प्रदर्शन को लेकर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की टिप्पणी पर नदवी ने कहा कि आगामी चुनावों में बैलेट पेपर से मतदान कराने की घोषणा की जानी चाहिए। उन्होंने एसआईआर यानी मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण के दौरान सामने आई कथित गड़बड़ियों पर भी सवाल उठाए। यदि लोगों को मतदाता सूची को लेकर आपत्तियां हैं, तो उनका समाधान किया जाना चाहिए और चुनाव निष्पक्ष तरीके से होने चाहिए।

सपा सांसद ने चुनावों के दौरान महिलाओं के खातों में पैसे भेजे जाने की परंपरा पर भी सवाल उठाया। उन्होंने महाराष्ट्र और बिहार का उल्लेख करते हुए आरोप लगाया कि भाजपा सरकार किसी भी तरह सत्ता हासिल करने पर ध्यान देती है। सत्ता में आने के बाद सरकार की जिम्मेदारी नागरिकों की जरूरतों को समझना, उनकी परेशानियां दूर करना और समाज को साथ लेकर चलना है। नदवी ने कहा कि सच्चा देशभक्त लोगों को आपस में बांटने के बजाय उन्हें जोड़ने का प्रयास करेगा। उन्होंने जोर दिया कि देश की तरक्की आपसी सहयोग और एकता से होगी, न कि लोगों के बीच टकराव बढ़ाने से।

कांग्रेस नेता केसी वेणुगोपाल के इस आरोप पर कि एक नवंबर की रैली में शामिल होने के लिए दिल्ली आ रहे कार्यकर्ताओं को रोकने की कोशिश की जा रही है, मोहिबुल्लाह नदवी ने कहा कि लोकतंत्र में लोगों को अपनी आवाज उठाने का अधिकार संविधान ने दिया है। उन्होंने कहा कि यदि नागरिक सरकार की नीतियों से असंतुष्ट हैं, तो उन्हें अपनी बात रखने और विरोध दर्ज कराने का अधिकार मिलना चाहिए। सत्तारूढ़ दल को ताकत या किसी अन्य माध्यम से इस अधिकार को रोकने का प्रयास नहीं करना चाहिए।

नदवी ने आगे कहा कि विरोध की आवाज को दबाना लोगों के अधिकारों को कुचलने जैसा है। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में असहमति के लिए जगह होनी चाहिए और सरकार को नागरिकों की शिकायतें सुननी चाहिए। शांतिपूर्ण तरीके से अपनी बात रखने का अधिकार लोकतांत्रिक व्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा है।