सतना/चित्रकूट। मध्य प्रदेश के सतना जिले स्थित पावन तीर्थनगरी चित्रकूट में पिछले 20 घंटों से जारी मूसलाधार बारिश और गोरगी बांध के टूटने से प्रलयंकारी बाढ़ आ गई है। मंदाकिनी नदी खतरे के निशान से कई फीट ऊपर बह रही है। नदी के प्रचंड वेग में चित्रकूट को नयागांव से जोड़ने वाला 25 फीट ऊंचा मुख्य पुल तिनके की तरह बह गया। पूरे चित्रकूट में पहली मंजिल तक पानी भर चुका है और सड़कों पर गाड़ियों की जगह नावें चल रही हैं। सैकड़ों लोग घरों, धर्मशालाओं और होटलों की छतों पर फंसे हुए हैं।


चित्रकूट में राहत और बचाव कार्य, 650 लोगों का रेस्क्यू, 4 आश्रय स्थलों में 107 लोग ठहरे

चित्रकूट में जिला प्रशासन द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार चित्रकूट क्षेत्र में व्यापक स्तर पर राहत और बचाव कार्य चलाया गया है। इस दौरान चित्रकूट से कुल 650 लोगों को सुरक्षित रेस्क्यू किया गया है। प्रभावित लोगों के रहने के लिए चित्रकूट में 4 आश्रय स्थल बनाए गए हैं, जिनमें कुल 107 लोग ठहरे हुए हैं। इनमें प्रमोद वन में 52, विकास प्राधिकरण में 30, मदन गोपाल में 10 और गायत्री पीठ में 15 लोग शामिल हैं। इसके अलावा, चित्रकूट क्षेत्र में प्रभावितों की सहायता के लिए 2,300 फूड पैकेट्स का वितरण भी किया गया है।


रामघाट व भरतघाट पूरी तरह डूबे, 200 से ज्यादा दुकानें जलमग्न

मंदाकिनी के रौद्र रूप से प्रमुख धार्मिक स्थल रामघाट और भरतघाट पूरी तरह जलमग्न हो चुके हैं। घाट किनारे की 200 से अधिक दुकानें पानी में समा गई हैं, जिससे व्यापारियों को भारी आर्थिक नुकसान हुआ है। मुख्य मार्गों पर 5 से 6 फीट तक पानी का तेज बहाव है। चित्रकूट का चारों तरफ से सड़क संपर्क कट चुका है।


छतों पर फंसे सैकड़ों लोग, एसडीआरएफ तैनात; एयर सपोर्ट की तैयारी

रिहायशी इलाकों में पानी पहली मंजिल तक पहुंच जाने से लोग छतों पर शरण लेने को मजबूर हैं। एसडीआरएफ (SDRF) और स्थानीय प्रशासन की टीमें बोट के जरिए रेस्क्यू ऑपरेशन चलाकर लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचा रही हैं। हालात की गंभीरता को देखते हुए सतना कलेक्टर डॉ. सतीश कुमार एस. ने प्रभावितों को सुरक्षित निकालने के लिए एयर सपोर्ट (हेलीकॉप्टर) उपलब्ध कराने के संबंध में वरिष्ठ अधिकारियों से समन्वय स्थापित किया है।


सांसद ने सीएम व मुख्य सचिव से की बात, एनडीआरएफ व हेलीकॉप्टर की मांग

चित्रकूट के बिगड़े हालात को लेकर सांसद गणेश सिंह ने मुख्यमंत्री और मुख्य सचिव से फोन पर चर्चा की। सांसद ने स्थिति को अत्यंत गंभीर बताते हुए एनडीआरएफ (NDRF) की अतिरिक्त टुकड़ियों और हेलीकॉप्टर तैनात करने का आग्रह किया। उन्होंने जनता से धैर्य रखने, सुरक्षित स्थानों पर बने रहने और प्रशासन के दिशा-निर्देशों का पालन करने की अपील की है।


जिले के प्रमुख संपर्क मार्ग पूरी तरह बंद

लोक निर्माण विभाग (PWD) ने सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए कई प्रमुख मार्गों पर बैरिकेड्स और ड्रॉप गेट लगाकर आवागमन रोक दिया है।

  • सतना-अटरा मार्ग
  • सभापुर से नयागांव मार्ग
  • पिंडरा-नकैला-बरौंदा-जवारिन मार्ग
  • जैतवारा-दगड़िया-सुहास मार्ग
  • मझगवां-पटना-पहाड़ी खैरा मार्ग
  • शाहपुर-राजापुर मार्ग
  • सतना-कोटर-अबेर-सेमरिया मार्ग
  • धौरहरा रोड खमरिया मार्ग, नागौद-कचलोहा मार्ग एवं अन्य ग्रामीण मार्ग।

प्रशासन ने आम नागरिकों और वाहन चालकों को सख्त हिदायत दी है कि वे उफनते नदी-नालों, रपटों और बंद किए गए मार्गों की ओर बिल्कुल न जाएं।


रामघाट पर दुकानों में घुसा पानी, सड़कों पर चलती दिखीं नावें

मंदाकिनी नदी में आई बाढ़ का सबसे ज्यादा असर रामघाट क्षेत्र में देखा गया। घाट किनारे संचालित होने वाली दर्जनों दुकानों, पूजा सामग्री के काउंटरों और प्रसाधन केंद्रों में पानी भर गया, जिसके चलते व्यापारियों को अपना सामान सुरक्षित स्थानों पर ले जाने के लिए भारी मशक्कत करनी पड़ी। रामघाट से जुड़ी गलियां और मुख्य सड़कें पूरी तरह जलमग्न हो गईं। स्थिति इतनी विकट हो गई कि कई जगहों पर सड़कों पर नावें चलती दिखाई दीं।


प्रमुख धार्मिक स्थलों और परिक्रमा मार्ग पर जलभराव से आवागमन बाधित

भारी वर्षा के कारण धर्मनगरी के प्रमुख तीर्थ स्थलों—आरोग्यधाम, गुप्त गोदावरी और सती अनुसुइया आश्रम जाने वाले मार्गों पर पानी भर गया, जिससे स्थानीय लोगों के साथ-साथ बाहर से आए श्रद्धालुओं का आवागमन बुरी तरह प्रभावित हुआ। श्रद्धालुओं के आस्था के केंद्र 'कामदगिरि परिक्रमा मार्ग' पर पुरानी लंका तिराहे के समीप भारी जलभराव हो जाने से परिक्रमार्थियों को घुटनों तक भरे पानी से होकर गुजरना पड़ा।


जल निकासी और सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम की मांग

मानसून के दौरान मंदाकिनी का जलस्तर बढ़ने से हर वर्ष रामघाट और आसपास की निचली बस्तियों में जलभराव का संकट खड़ा होता है। स्थानीय निवासियों, पुजारियों और व्यापारियों ने प्रशासन से अपील की है कि बाढ़ नियंत्रण, जल निकासी और घाटों पर सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए जाएं, ताकि श्रद्धालुओं और आम नागरिकों को असुविधा व जनहानि से बचाया जा सके।