जयपुर। राजस्थान में अजमेर के चिकित्सा क्षेत्र में आधुनिक तकनीक की मदद से एक और महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल हुई है। जवाहरलाल नेहरू मेडिकल कॉलेज एवं चिकित्सालय, अजमेर में लेप्रोस्कोपिक एवं रोबोटिक सर्जन डॉ. शिव कुमार बुनकर ने रोबोटिक तकनीक की सहायता से जटिल हायटस हर्निया का सफल ऑपरेशन किया।इस प्रक्रिया में आधुनिक रोबोटिक प्रणाली के माध्यम से सर्जरी को अंजाम दिया गया, जिससे अजमेर में उन्नत चिकित्सा सुविधाओं को नई दिशा मिली है। हायटस हर्निया से पीड़ित 21 वर्षीय मरीज पिछले दो महीनों से अपच, प्रतिवाह और छाती में जलन जैसी समस्याओं से परेशान था।
मरीज की जांच और चिकित्सकीय परामर्श के बाद ऑपरेशन का निर्णय लिया गया। डॉ. श्याम भट्ट के मार्गदर्शन में उपचार की योजना तैयार की गई और रोबोटिक तकनीक की मदद से रोबोटिक निसेन फंडोप्लीकेशन प्रक्रिया सफलतापूर्वक पूरी की गई।
इस प्रक्रिया में पेट के ऊपरी हिस्से को भोजन नली के निचले भाग के चारों ओर लपेटकर एक वाल्व जैसी संरचना बनाई जाती है। इससे पेट का अम्ल भोजन नली में वापस आने की समस्या को नियंत्रित करने में मदद मिलती है। आवश्यकता के अनुसार हायटस की खराबी को भी ठीक किया जाता है।
ऑपरेशन के दौरान प्रिंसिपल डॉ. अनिल सामरिया की देखरेख में मरीज की प्री-ऑपरेटिव और पोस्ट-ऑपरेटिव देखभाल की गई। इस दौरान डॉ. अरविंद खरे सहित चिकित्सकों, नर्सिंग स्टाफ और एनेस्थीसिया टीम ने भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
डॉ. बुनकर के अनुसार, रोबोटिक तकनीक से जटिल सर्जरी के दौरान बेहतर दृश्यता, अधिक सटीकता और सूक्ष्म गतिविधियों पर बेहतर नियंत्रण मिलता है। इससे चयनित मरीजों में उपचार के परिणाम बेहतर करने में सहायता मिल सकती है।
रोबोटिक तकनीक से जटिल शल्य प्रक्रियाओं को सफलतापूर्वक अंजाम देना शहर में उन्नत चिकित्सा सुविधाओं के विस्तार की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। यह उपलब्धि स्थानीय स्तर पर आधुनिक उपचार उपलब्ध कराने के प्रयासों को भी मजबूती देती है।
हायटस हर्निया एक ऐसी स्थिति है जिसमें पेट का ऊपरी हिस्सा डायफ्राम में मौजूद एक छेद से ऊपर खिसककर छाती की ओर आ जाता है। है। सीने में जलन, खट्टी डकारें आना, भोजन निगलने में परेशानी, सीने या पेट के ऊपरी हिस्से में दर्द, बार-बार गैस या पेट फूलना इसके सामान्य लक्षण हैं।














