दतिया। दतिया विधानसभा उपचुनाव में भाजपा द्वारा प्रत्याशी बदलने के बाद उपजे अभूतपूर्व राजनैतिक घमासान, चक्काजाम और उग्र प्रदर्शनों पर आखिरकार पूर्व गृहमंत्री डॉ। नरोत्तम मिश्रा ने अपनी चुप्पी तोड़ दी है। टिकट कटने के बाद पहली बार सामने आए अपने बयान में उन्होंने समर्थकों और प्रदर्शनकारियों द्वारा झांसी हाईवे को जाम करने और शहर में उपद्रव मचाने की घटनाओं को पूरी तरह से गलत ठहराया है। डॉ। मिश्रा ने अपने सभी समर्थकों और कार्यकर्ताओं से शांति बनाए रखने की पुरजोर अपील की है। उन्होंने दो टूक शब्दों में कहा कि चुनाव में टिकट न देना पूरी तरह से संगठन का फैसला है और सभी को पार्टी के निर्णय का सम्मान करना चाहिए।




पुलिस पर पथराव की शिकायत दिल्ली पहुँचने के बाद शुरू हुई डैमेज कंट्रोल की कवायद!

राजनैतिक गलियारों में पूर्व गृहमंत्री डॉ। नरोत्तम मिश्रा के इस शांति संदेश और अचानक बदले रुख को लेकर कई तरह की चर्चाएं तेज हो गई हैं। राजनैतिक विश्लेषकों का मानना है कि दतिया में हुए इस उग्र बवाल, बाजार बंदी और प्रदर्शन के दौरान पुलिस बल पर हुए पथराव की गंभीर शिकायत भाजपा के दिल्ली स्थित केंद्रीय हाईकमान तक पहुँच चुकी है। सूत्रों के अनुसार, पार्टी के भीतर मचे इस घमासान के लिए महाराज (नरोत्तम मिश्रा) पर अनुशासनात्मक कार्रवाई की तलवार लटकने की बात उठने लगी थी। इसी संभावित कार्रवाई और केंद्रीय नेतृत्व की नाराजगी से बचने के लिए पूर्व गृहमंत्री द्वारा यह बड़ा 'डैमेज कंट्रोल' वाला बयान जारी किया गया है, ताकि वे खुद को इस उग्र आंदोलन से अलग दिखा सकें।


पूरा सांगठनिक ढांचा ठप, बाजार बंद कर भोपाल कूच की दी गई थी चेतावनी

उल्लेखनीय है कि शुक्रवार को भाजपा केंद्रीय संगठन द्वारा आशुतोष तिवारी को दतिया से उम्मीदवार घोषित किए जाने के बाद नरोत्तम मिश्रा के समर्थकों का गुस्सा फूट पड़ा था। इसके विरोध में भाजपा जिलाध्यक्ष रघुवीर सिंह तोमर सहित जिला पंचायत, जनपद व नगरपालिका अध्यक्षों और सभी पार्षदों ने सामूहिक इस्तीफा दे दिया था, जिससे दतिया में भाजपा का पूरा सांगठनिक ढांचा पूरी तरह ध्वस्त हो गया था। आक्रोशित कार्यकर्ताओं ने 'मुख्यमंत्री मुर्दाबाद' के नारे लगाते हुए झांसी हाईवे पर दो किलोमीटर लंबा चक्काजाम कर दिया था और मुख्य बाजारों को बंद कराकर मांग पूरी न होने पर राजधानी भोपाल में उग्र आंदोलन की चेतावनी दी थी। अब पूर्व गृहमंत्री के इस शांति वाले बयान के बाद देखना होगा कि दतिया की सड़कों पर उतरा कार्यकर्ताओं का यह आक्रोश थमता है या नहीं।