छतरपुर/पन्ना। केन-बेतवा लिंक परियोजना, मझगांय, रूंझ, नेगुवा तथा अन्य परियोजनाओं से प्रभावित विस्थापित परिवारों का 'चिता आंदोलन' सातवें दिन भी जारी रहा। आंदोलनकारियों ने इसे अपनी आंशिक जीत बताते हुए कहा कि सरकार द्वारा कुछ क्षेत्रों में मुआवजा राशि बढ़ाए जाने के बावजूद आंदोलन तब तक समाप्त नहीं होगा, जब तक सभी प्रभावित परिवारों को न्याय नहीं मिलता और परियोजनाओं में कथित भ्रष्टाचार के आरोपों की निष्पक्ष जांच कर दोषियों पर कार्रवाई नहीं होती।
आंदोलन के दौरान सामाजिक कार्यकर्ता अमित भटनागर का आमरण अनशन चौथे दिन, मिट्टी सत्याग्रह तीसरे दिन तथा जल सत्याग्रह दूसरे दिन भी जारी रहा। भारी बारिश के बावजूद बड़ी संख्या में आदिवासी महिलाएं, किसान और ग्रामीण आंदोलन स्थल पर डटे रहे। आंदोलनकारियों का दावा है कि उनके लगातार संघर्ष के परिणामस्वरूप रूंझ और मझगांय क्षेत्र में मुआवजा राशि 5 लाख रुपये से बढ़ाकर 12.50 लाख रुपये किए जाने की घोषणा हुई है। साथ ही, पन्ना जिले के केन-बेतवा परियोजना क्षेत्र के लिए 39 करोड़ रुपये स्वीकृत होने की जानकारी भी सामने आई है। प्रदर्शनकारियों ने इसे संघर्ष की आंशिक सफलता बताया, लेकिन कहा कि अभी भी कई प्रभावित परिवार न्याय से वंचित हैं। आंदोलनकारियों ने मांग की है कि सभी वास्तविक विस्थापितों को उचित मुआवजा और पुनर्वास दिया जाए, परियोजना में हुए कथित भ्रष्टाचार की स्वतंत्र जांच कराई जाए, दोषियों के विरुद्ध कानूनी कार्रवाई की जाए तथा प्रभावित परिवारों का उत्पीड़न बंद किया जाए। सामाजिक कार्यकर्ता अमित भटनागर ने कहा कि, यह केवल मुआवजे की नहीं, बल्कि न्याय और सम्मान की लड़ाई है। आंशिक सफलता मिली है, लेकिन जब तक हर प्रभावित परिवार को न्याय नहीं मिलता और कथित दोषियों पर कार्रवाई नहीं होती, तब तक आंदोलन जारी रहेगा। फिलहाल आंदोलन स्थल पर धरना, आमरण अनशन, मिट्टी सत्याग्रह और जल सत्याग्रह लगातार जारी है। आंदोलनकारियों का कहना है कि यदि उनकी मांगों पर शीघ्र निर्णय नहीं लिया गया, तो आंदोलन को और व्यापक रूप दिया जाएगा।
चार प्रमुख मांगें
- सभी विस्थापित परिवारों को भूमि और आवास का न्यायपूर्ण एवं सम्मानजनक मुआवजा दिया जाए।
- परियोजनाओं में हुए कथित भ्रष्टाचार की स्वतंत्र और निष्पक्ष उच्चस्तरीय जांच कराई जाए।
- कथित दोषी अधिकारियों की पहचान कर उनके विरुद्ध कानूनी कार्रवाई की जाए।
- विस्थापित परिवारों के उत्पीड़न और डराने-धमकाने की कार्रवाई तत्काल रोकी जाए।




