छतरपुर। विजयादशमी के पावन पर्व पर बुंदेलखंड के गौरव बुंदेल केसरी महाराजा छत्रसाल की ऐतिहासिक धरा मऊसहानियां स्थित शौर्य पीठ पर पारंपरिक और गरिमामय शस्त्र पूजन कार्यक्रम सफलतापूर्वक संपन्न हुआ। महाराजा छत्रसाल स्मृति शोध संस्थान, छतरपुर के तत्वावधान में आयोजित इस विशेष समारोह में सुबह 11:30 बजे वैदिक मंत्रोच्चार और सनातन मर्यादाओं के अनुरूप अस्त्र-शस्त्रों की विधि-विधान से पूजा-अर्चना की गई। कार्यक्रम में जिले भर के गणमान्य नागरिकों, प्रबुद्ध समाजसेवियों और विभिन्न संगठनों के प्रतिनिधियों ने बढ़-चढ़कर भाग लिया और राष्ट्र रक्षा व धर्म संरक्षण का संकल्प दोहराया।
निर्धारित समय पर शौर्य पीठ परिसर में वैदिक आचार्यों द्वारा विधि-विधान से पूजन अनुष्ठान प्रारंभ कराया गया। सनातन क्षात्र परंपरा का निर्वहन करते हुए उपस्थित जनों ने पारंपरिक अस्त्र-शस्त्रों पर रोली-चंदन का तिलक लगाकर, पुष्प अर्पित कर और धूप-दीप प्रज्वलित कर पूजन किया। इस दौरान वातावरण महाराजा छत्रसाल अमर रहें और जय भवानी के गगनभेदी जयकारों से गुंजायमान हो उठा। वक्ताओं ने रेखांकित किया कि विजयादशमी का दिन शस्त्र और शास्त्र के संतुलन का प्रतीक है, जो हमें आत्मरक्षा और समाज हित में तत्पर रहने की प्रेरणा देता है। उपस्थित जनसमूह ने बुंदेल केसरी महाराजा छत्रसाल के अदम्य साहस, स्वाभिमान और मुगलों के विरुद्ध उनके संघर्ष गाथा को स्मरण करते हुए उनके बताए मार्ग पर चलने का संकल्प लिया।
गरिमामय शस्त्र पूजन समारोह में पूर्व विधायक जुझार सिंह बुंदेला, वरिष्ठ व्यवसायी अजयपाल सिंह राव साहब, संस्थान के संरक्षक गोविंद सिंह बुंदेला, अध्यक्ष डॉ. भरत पाठक, पूर्व अध्यक्ष राकेश शुक्ला राधे, सचिव कमलेश अहिरवार, सुशील वैध, धीरेन्द्र शिवहरे, हर्ष अग्रवाल, अनिल अग्रवाल, भारतीय सेना की पंजाब रेजीमेंट के वरिष्ठ अधिकारी, भाजपा नेता सूरजदेव मिश्रा, गजेन्द्र सोनकिया, विश्व हिंदू परिषद के प्रखर भट्ट, रक्तवीर सेवा दल के अमित जैन, कपिल सेठ सहित जिले भर से आए सामाजिक एवं सांस्कृतिक संगठनों के पदाधिकारी, प्रतिष्ठित समाजसेवी, प्रशासनिक व पुलिस विभागों के अधिकारी तथा प्रबुद्ध नागरिक बड़ी संख्या में सम्मिलित हुए। कार्यक्रम के सुव्यवस्थित और अनुशासित संचालन में संस्थान द्वारा गठित समिति की महत्वपूर्ण भूमिका रही।
मुख्य संयोजक जयदेव सिंह बुंदेला के कुशल नेतृत्व में संपूर्ण व्यवस्थाएं चाक-चौबंद रहीं। वहीं सह-संयोजक द्रगेंद्र देव सिंह एवं महेश तिवारी मातोल ने व्यवस्थाओं और समन्वय का दायित्व निष्ठापूर्वक निभाया। आयोजन समिति के पदाधिकारियों ने समयबद्ध ढंग से सभी अतिथियों का स्वागत-सत्कार किया, जिससे पूरा कार्यक्रम अनुशासित और ऐतिहासिक स्वरूप में संपन्न हुआ।
















