भोपाल। मध्य प्रदेश के सरकारी खजाने (ट्रेजरी सिस्टम) से करीब 600 करोड़ रुपये की वित्तीय अनियमितताओं और संदिग्ध ट्रांसफर के मामले ने प्रदेश की सियासत में बड़ा भूचाल ला दिया है। इस महाघोटाले के विरोध में युवा कांग्रेस के कार्यकर्ताओं ने बुधवार को उपमुख्यमंत्री एवं वित्त मंत्री जगदीश देवड़ा के शासकीय बंगले का घेराव करते हुए जोरदार प्रदर्शन किया। बंगले के बाहर कार्यकर्ताओं ने हवा में नोटों की गड्डियां उड़ाकर विरोध जताया, जिसके बाद पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को हिरासत में ले लिया। वहीं, सरकार ने दावा किया है कि इस गड़बड़ी को वित्त विभाग के सॉफ्टवेयर ने एआई तकनीक से खुद पकड़ा है और रिकवरी के साथ-साथ अब तक 59 एफआईआर दर्ज कराई जा चुकी हैं।
वित्त मंत्री के बंगले पर नोटों की बारिश, कालिख पोतने की दी चेतावनी
बुधवार दोपहर युवा कांग्रेस के प्रदेश उपाध्यक्ष अभिषेक परमार के नेतृत्व में बड़ी संख्या में कार्यकर्ता प्रतीकात्मक रूप से नोटों की गड्डियां लेकर वित्त मंत्री जगदीश देवड़ा के 74 बंगले स्थित शासकीय आवास पर पहुंचे। कार्यकर्ताओं ने जब बंगले के भीतर घुसकर वित्त मंत्री को नोट सौंपने का प्रयास किया, तो पुलिस ने बैरिकेड्स लगाकर उन्हें रोक लिया। इस पर आक्रोशित प्रदर्शनकारियों ने हवा में नोट उड़ा दिए, जिससे सड़क पर काफी देर तक नोट बिखरे रहे। पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लेकर टीटी नगर थाने पहुंचाया। अभिषेक परमार ने तीखा हमला बोलते हुए आरोप लगाया कि 600 करोड़ के इस महाघोटाले में केवल 'छोटी मछलियों' पर कार्रवाई कर बड़े चेहरों और जिम्मेदार अधिकारियों को बचाया जा रहा है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि मुख्य जिम्मेदारों पर कार्रवाई नहीं हुई तो अगले चरण में वित्त मंत्री के मुंह पर कालिख पोती जाएगी।
डिप्टी सीएम का पलटवार: 'मुद्रा का अपमान कांग्रेस की सोच को दर्शाता है'
प्रदर्शन पर कड़ी प्रतिक्रिया देते हुए उपमुख्यमंत्री व वित्त मंत्री जगदीश देवड़ा ने कहा कि कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने भारतीय मुद्रा को पैरों के नीचे फेंककर उसका घोर अपमान किया है, जो उनकी ओछी मानसिकता को उजागर करता है। सरकारी भुगतान में गड़बड़ी पर स्थिति स्पष्ट करते हुए वित्त मंत्री ने कहा कि यह कोई छुपा हुआ मामला नहीं है, बल्कि वित्त विभाग के एकीकृत वित्तीय प्रबंधन सॉफ्टवेयर ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और तकनीकी मॉनिटरिंग के माध्यम से इन संदिग्ध ट्रांसफर्स को स्वयं पकड़ा है। सरकार ने मामले को दबाने के बजाय तुरंत कानूनी कार्रवाई शुरू की, जिसके तहत एफआईआर दर्ज की जा रही हैं और गबन की गई राशि की तेजी से रिकवरी की जा रही है। उन्होंने दो टूक कहा कि इस मामले में किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जाएगा।
59 एफआईआर और 400 कर्मचारी रडार पर: ईओडब्ल्यू व ईडी कर रही जांच
कोष एवं लेखा संचालनालय की 'स्टेट फाइनेंशियल इंटेलिजेंस सेल' (SFIC) द्वारा की गई गहन जांच में पिछले पांच वर्षों के दौरान सरकारी भुगतान प्रणाली में करीब 600 करोड़ रुपये की वित्तीय अनियमितताएं उजागर हुई हैं। अब तक 59 एफआईआर दर्ज हो चुकी हैं और 400 से अधिक अधिकारी व कर्मचारी जांच के घेरे में हैं। रिपोर्ट के अनुसार, 305 करोड़ रुपये के 199 संदिग्ध लेनदेन ऐसे पाए गए जिनमें सरकारी धन सीधे निजी खातों और कर्मचारियों के परिजनों व करीबियों के खातों में भेजा गया। वहीं, लगभग 293 करोड़ रुपये नियमों के विरुद्ध ट्रेजरी के पर्सनल डिपॉजिट (PD) खातों के बजाय अन्य बैंक खातों में डाइवर्ट किए गए। मामले की कड़ियां जुड़ने के बाद आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ (EOW) और प्रवर्तन निदेशालय (ED) भी अलग-अलग प्रकरणों की जांच में जुट गए हैं।
सिस्टम की खामियों से खेला गया खेल: डबल कोड से लेकर सट्टेबाजी तक कनेक्शन
जांच में सरकारी भुगतान प्रणाली की कई गंभीर तकनीकी व प्रशासनिक खामियां सामने आई हैं, जिनका दुरुपयोग कर यह फर्जीवाड़ा किया गया। शातिर कर्मचारियों ने डबल एम्प्लॉई कोड बनाकर, वरिष्ठ अधिकारियों के गोपनीय लॉगिन-पासवर्ड साझा कर और सिस्टम में दर्ज मोबाइल नंबर बदलकर दूसरे नंबरों पर ओटीपी मंगवाकर भुगतान स्वीकृत कराए। इसके अलावा सर्विस रिकॉर्ड और बैंक खातों के नामों का सत्यापन न होना भी बड़ी वजह बना। जांच में यह सनसनीखेज तथ्य भी सामने आया है कि सरकारी खजाने से चुराई गई राशि से बेनामी संपत्तियां खरीदी गईं और बड़ी रकम जुआ-सट्टे के अवैध धंधे में लगाई गई। फिलहाल सरकार और विपक्ष के बीच इस मुद्दे पर तीखा घमासान जारी है।




