तिरुवनंतपुरम। केरल भाजपा प्रदेश अध्यक्ष राजीव चंद्रशेखर ने शुक्रवार को कांग्रेस सांसद राहुल गांधी पर दोहरे मापदंड अपनाने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी दिल्ली में संविधान, लोकतंत्र और धर्मनिरपेक्षता की बात करते हैं, जबकि केरल में उनकी पार्टी की राजनीतिक लाइन बिल्कुल अलग है।उन्होंने कहा कि राहुल गांधी अक्सर राष्ट्रीय स्तर पर संवैधानिक मूल्यों, लोकतंत्र, धर्मनिरपेक्षता और महिलाओं तथा युवाओं के अधिकारों के बारे में बात करते हैं, हालांकि केरल में कांग्रेस की राजनीतिक व्यवस्था कुछ और ही कहानी बयां करती है।
चंद्रशेखर ने कांग्रेस पर आरोप लगाया कि वह एक तरफ तो धर्मनिरपेक्षता और संवैधानिक मूल्यों की वकालत करने का दावा करती है, लेकिन दूसरी तरफ केरल में जमात-ए-इस्लामी के साथ उसका खुला राजनीतिक समझौता है।
उन्होंने आरोप लगाया कि यह संगठन संविधान और धर्मनिरपेक्ष सिद्धांतों का विरोधी है। उन्होंने इसे बांग्लादेश में चल रही राजनीतिक अस्थिरता से भी जोड़ा।
भाजपा नेता ने कांग्रेस की इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग (आईयूएमएल) पर निर्भरता पर भी सवाल उठाए। आईयूएमएल, यूडीएफ का एक प्रमुख सहयोगी दल है। चंद्रशेखर ने आरोप लगाया कि इसके कुछ मंत्रियों ने खुलेआम कहा है कि उनका एकमात्र राजनीतिक उद्देश्य "धर्म, धर्म, धर्म" है।
राहुल गांधी द्वारा बार-बार भारत के युवाओं के भविष्य का जिक्र किए जाने पर निशाना साधते हुए चंद्रशेखर ने कहा कि केरल में कांग्रेस 'पीएम श्री' शिक्षा योजना को लागू करने में विफल रही है। इस योजना का उद्देश्य सरकारी स्कूलों में शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार करना है।
उन्होंने आरोप लगाया कि गरीब परिवारों के बच्चों को बेहतर शैक्षिक अवसर प्रदान करने वाले कार्यक्रम का समर्थन करने के बजाय कांग्रेस ने मुस्लिम लीग के दबाव के आगे घुटने टेक दिए।
भाजपा नेता ने विपक्ष के नेता राहुल गांधी पर यह आरोप भी लगाया कि केरल में उनके राजनीतिक सहयोगियों द्वारा महिलाओं के अधिकारों को सीमित करने और उनकी स्वतंत्रता पर रोक लगाने की कोशिशों पर वे पूरी तरह चुप हैं।
उन्होंने केरल में मुस्लिम आरक्षण के लिए कांग्रेस के समर्थन पर भी सवाल उठाए और इसे असंवैधानिक करार दिया, जबकि दूसरी तरफ राहुल गांधी संवैधानिक सिद्धांतों की बातें करते रहे।
उन्होंने पूछा, "राहुल गांधी दिल्ली में एक तरह की बात करते हैं, जबकि केरल में उनकी पार्टी बिल्कुल अलग तरीके से काम करती है। इसे धोखे की राजनीति के अलावा और क्या कहा जा सकता है?"













