मुंबई। सिंटा विवाद के बीच अभिनेत्री वर्षा उसगांवकर ने आरोप लगाया कि सिने एंड टीवी आर्टिस्ट्स एसोसिएशन (सिंटा) के कर्मचारी पूनम ढिल्लों और पद्मिनी कोल्हापुरे के साथ मिलीभगत कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि संगठन के फंड के विवरण के बारे में पूछे जाने पर कर्मचारी सही जवाब देने से इनकार कर देते हैं।वर्षा ने अपने कार्यालय के दौरे के दौरान समाचार एजेंसी आईएएनएस से बात करते हुए कहा कि किसी भी संगठन के कर्मचारी को संगठन के प्रति वफादार होना चाहिए, न कि समिति के किसी सदस्य के प्रति, जो कि सिंटा के कर्मचारियों के मामले में प्रतीत होता है।
वर्षा ने बताया, "किसी भी संगठन के कर्मचारियों की वफादारी संगठन के प्रति होनी चाहिए, न कि कार्यकारी समिति के किसी सदस्य के प्रति, क्योंकि वे उनके निजी कर्मचारी नहीं हैं, वे संगठन के कर्मचारी हैं। हमें पता चला कि कर्मचारियों की संगठन के प्रति वफादारी बहुत कम थी, विशेषकर लेखाकार की।"
वर्षा ने यह भी बताया कि सिंटा की सावधि जमा और निधियों के बारे में पूछे जाने पर लेखाकार टालमटोल भरे जवाब देते रहे, जैसे 'मुझे नहीं पता' या 'मैं उस दिन छुट्टी पर था'।
सावधि जमा (फिक्स्ड डिपॉजिट) से जुड़े विवाद के बारे में बात करते हुए उन्होंने कहा, "फिक्स्ड डिपॉजिट का मामला मुझे लूट जैसा लगा। यह एक ट्रस्ट है। यह सदस्यों का पैसा है। उनकी अनुमति के बिना कोई इसे कैसे छू सकता है?"
जानकारी के लिए बता दें कि सिंटा विवाद कुछ महीने पहले शुरू हुआ था जब 21 सदस्यीय कार्यकारी समिति के 11 सदस्यों ने तानाशाही कामकाज का आरोप लगाते हुए इस्तीफा दे दिया था। इसके बाद दो गुट पद्मिनी कोल्हापुरी और पूनम ढिल्लों के गुट और उपासना सिंह और साहिला चड्ढा के गुट ने कई आरोप-प्रत्यारोप लगाए।
उपासना सिंह ने पूनम ढिल्लों और पद्मिनी कोल्हापुरे पर आरोप लगाया कि उन्होंने एसोसिएशन की फिक्स्ड डिपॉजिट को तोड़कर उस बैंक खाते से धनराशि निकाल ली, जिसे एसोसिएशन के प्रबंधन को लेकर चल रहे विवाद के दौरान फ्रीज रखा जाना चाहिए था।
हालांकि, आरोपों का जवाब देते हुए पूनम ढिल्लों ने दावा किया कि सिंटा के वित्तीय रिकॉर्ड उसकी कार्यकारी समिति के सदस्यों के लिए उपलब्ध हैं।
सिंटा विवाद में एक नए घटनाक्रम में आईएएनएस को अदालत का एक आदेश प्राप्त हुआ है, जिसमें अदालत ने सिंटा को अदालत की अवमानना के लिए कारण बताओ नोटिस जारी किया है। अदालत ने सिंटा को निर्देश दिया है कि वह 20 अक्टूबर के चुनाव परिणामों पर कोई कार्रवाई न करे और उन्हें लागू न करे, जिसमें पद्मिनी कोल्हापुरी और पूनम ढिल्लों ने अधिकतम वोट प्राप्त करके जीत हासिल की थी।
















