पन्ना। पन्ना जिले में देश की महत्वाकांक्षी केन-बेतवा लिंक परियोजना के मुआवजा वितरण में भ्रष्टाचार का बड़ा मामला उजागर हुआ है। लोकायुक्त पुलिस सागर की विशेष टीम ने त्वरित कार्रवाई करते हुए पटवारी हल्का क्रमांक 3, ग्राम गहदरा के पटवारी संतोष कुमार चिकवा को ₹47,000 की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों गिरफ्तार किया है। आरोपी पटवारी ने विस्थापित आदिवासी किसान दयाराम आदिवासी से बढ़ी हुई मुआवजा राशि स्वीकृत कराने और प्रकरण से जुड़े आवश्यक दस्तावेज तैयार करने के बदले कुल ₹80,000 की रिश्वत की मांग की थी।


₹63 हजार के बढ़े मुआवजे के लिए मांग रहा था ₹80 हजार की घूस

जानकारी के अनुसार, केन-बेतवा लिंक परियोजना के डूब क्षेत्र से प्रभावित परिवारों को प्राथमिक चरण में ₹1 लाख 35 हजार की मुआवजा राशि वितरित की गई थी। इसके बाद फरियादी दयाराम आदिवासी ने शासन द्वारा निर्धारित बढ़ी हुई ₹63,000 की अतिरिक्त मुआवजा राशि प्राप्त करने के लिए विधिवत आवेदन किया था। आरोप है कि हल्का पटवारी संतोष कुमार चिकवा ने इस राशि की स्वीकृति और परिवार में हुई मौतों के मृत्यु प्रमाण पत्र सहित अन्य राजस्व अभिलेख तैयार करने के एवज में किसान पर ₹80,000 देने का दबाव बनाया।

पीड़ित किसान ने विवश होकर पहले ₹30,000 की राशि पटवारी को दे दी थी, लेकिन शेष ₹50,000 के लिए लगातार बनाए जा रहे दबाव से तंग आकर उसने पूरे मामले की लिखित शिकायत लोकायुक्त पुलिस अधीक्षक सागर से कर दी।


हॉस्पिटल चौक पर बिछाया जाल, बाइक की डिग्गी से बरामद हुई रिश्वत की रकम

लोकायुक्त सागर की टीम ने शिकायत का गोपनीय सत्यापन कराया, जिसमें रिश्वत मांगे जाने की पुष्टि हुई। इसके बाद योजनाबद्ध तरीके से ट्रैप दल गठित किया गया। पन्ना शहर के व्यस्त हॉस्पिटल चौक पर जैसे ही फरियादी किसान ने पटवारी संतोष कुमार चिकवा को शेष राशि के रूप में ₹47,000 सौंपे, पहले से मुस्तैद लोकायुक्त की टीम ने उसे मौके पर ही दबोच लिया। तलाशी के दौरान रिश्वत की पूरी रकम आरोपी पटवारी की मोटरसाइकिल की डिग्गी से बरामद कर ली गई।


भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत मामला दर्ज

रिश्वत की रकम की जब्ती और रासायनिक परीक्षण में हाथ रंगने की पुष्टि के बाद आरोपी पटवारी को पन्ना कोतवाली ले जाया गया, जहां भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम (संशोधित) की संबंधित धाराओं के अंतर्गत आपराधिक प्रकरण दर्ज कर वैधानिक कार्रवाई की गई। इस कार्रवाई के बाद परियोजना प्रभावित ग्रामीण अंचलों में हड़कंप मच गया है और विस्थापितों के मुआवजा वितरण कार्य में राजस्व अमले की पारदर्शिता पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।