इंदौर, रविकांत वर्मा। शहर में वित्तीय संस्थाओं को चूना लगाने वाले अपराधियों के खिलाफ क्राइम ब्रांच ने एक बड़ा शिकंजा कसा है। पुलिस ने फर्जी और कूटरचित दस्तावेजों के आधार पर एक गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनी (NBFC) से 60 लाख रुपए का ऋण हड़पने वाले शातिर दंपत्ति के खिलाफ धोखाधड़ी का गंभीर मामला दर्ज किया है। आरोपी न केवल कर्ज चुकाने से बच रहे थे, बल्कि संस्था के अधिकारियों को झूठे मुकदमों में फंसाने की धमकी भी दे रहे थे।

जमीन बेचने के बाद भी गिरवी रखकर उठाया लोन

मामले की शुरुआत सोलफुल निधि लिमिटेड (प्रेस्टीज टॉवर, इंदिरा कॉम्प्लेक्स, नौलखा) के संचालक शरद कुमार पोरवाल द्वारा दी गई लिखित शिकायत से हुई। शिकायत के मुताबिक, आरोपी हकीमुद्दीन सैफी और उसकी पत्नी फातिमा सैफी (निवासी क्रिस्टल अपार्टमेंट, बिजलपुर, इंदौर) ने 21 दिसंबर 2022 को उनकी संस्था से 60 लाख रुपए का लोन लिया था। इसके एवज में बिजलपुर स्थित प्लॉट क्रमांक 461 (मस्किन-ए-सैफिया) के दस्तावेज गिरवी रखे गए थे।

जब तय समय सीमा में ऋण की राशि नहीं लौटाई गई, तो संस्था ने जांच शुरू की, जिसमें चौंकाने वाला खुलासा हुआ। मुख्य आरोपी हकीमुद्दीन ने उक्त प्लॉट को पहले ही 05 दिसंबर 2023 को अन्य पक्षकारों (हुसैना रस्सीवाला एवं जहरा रस्सीवाला) को कानूनी रूप से बेच दिया था। इसके बावजूद, उसी भूमि के फर्जी और कूटरचित दस्तावेज तैयार कर एनबीएफसी में गिरवी रखे गए और 60 लाख रुपए की धोखाधड़ी को अंजाम दिया गया। इस आपराधिक कृत्य में उसकी पत्नी फातिमा भी पूरी तरह से शामिल रही है।

कई अन्य बैंकों और लोगों को भी बना चुके हैं शिकार

प्रारंभिक जांच में यह भी सामने आया है कि इस शातिर दंपत्ति ने इसी तरह अन्य 4 से 5 बैंकों और निजी व्यक्तियों से भी फर्जी रजिस्ट्रियों के आधार पर ऋण ले रखा है। वर्तमान में जिस प्लॉट को गिरवी रखा गया था, उस पर किसी अन्य तृतीय पक्षकार द्वारा निर्माण कार्य कर कब्जा किया जा रहा है।

पैसे मांगने पर देते थे झूठे मामलों में फंसाने की धमकी

जब संस्था के लोगों ने अपने पैसे वापस मांगे, तो आरोपी हकीमुद्दीन अपना मोबाइल फोन स्विच ऑफ कर केवल व्हाट्सएप के जरिए बात करता था और चुनौती देता था कि "तुम मेरा कुछ नहीं बिगाड़ सकते।" वहीं, उसकी पत्नी फातिमा भी पैसे देने से साफ इंकार करते हुए कहती थी कि वह उल्टे झूठे प्रकरणों में फंसा देगी।

भारतीय न्याय संहिता (BNS) की गंभीर धाराओं के तहत केस दर्ज

क्राइम ब्रांच ने प्रार्थी की शिकायत और शुरुआती साक्ष्यों के आधार पर आरोपी दंपत्ति के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 318(4), 338, 340 और 61(2) के तहत गंभीर धाराओं में प्रकरण पंजीबद्ध कर लिया है। पुलिस अब इस बात की भी जांच कर रही है कि इस फर्जीवाड़े में उनके साथ और कौन-कौन लोग शामिल हैं।