वॉशिंगटन। अमेरिकी कांग्रेस के भारतीय-अमेरिकी सांसद रो खन्ना ने अमेरिकी आव्रजन एवं सीमा शुल्क प्रवर्तन एजेंसी (आईसीई) को खत्म करने की मांग की, जबकि उनके रिपब्लिकन प्रतिद्वंद्वी रितेश टंडन ने ग्रीन कार्ड पर देशवार सीमा समाप्त करने की वकालत की। कैलिफोर्निया के 17वें कांग्रेसनल डिस्ट्रिक्ट से चुनाव लड़ रहे दोनों भारतीय-अमेरिकी उम्मीदवारों के बीच बुधवार शाम ऑनलाइन बहस हुई।
करीब 50 मिनट तक चली इस बहस का अमेरिकी समय के अनुसार बुधवार शाम टंडन के चुनाव अभियान के यूट्यूब चैनल पर सीधा प्रसारण किया गया। खन्ना ने पूरी बहस में हिस्सा लिया, सवालों के जवाब दिए और समापन वक्तव्य भी दिया। बहस की शुरुआत में खन्ना ने टंडन का आभार जताया। उन्होंने कहा, “मैं पिछले कुछ वर्षों में उनके सभ्य तरीके से पेश आने की सराहना करता हूं। लोकतंत्र के लिए यह बेहद महत्वपूर्ण है कि हम ऐसे लोगों के साथ विचारों पर बहस कर सकें, जिनसे हर मामले में हमारी सहमति नहीं होती।”
आव्रजन का मुद्दा बहस में सबसे अधिक मतभेद वाला विषय रहा। खन्ना ने कहा, “मैं आईसीई को खत्म कर दूंगा।” उन्होंने इस एजेंसी को ‘बेलगाम एजेंसी’ बताते हुए कहा कि इसकी जगह इमिग्रेशन एंड नेचुरलाइजेशन सर्विस (आईएनएस) जैसी एजेंसी होनी चाहिए, जो न्याय विभाग के अधीन हो, मानवीय दृष्टिकोण अपनाए और यौन तस्करी करने वालों तथा अपराधियों के खिलाफ कार्रवाई पर ध्यान केंद्रित करे।
खन्ना ने यह भी कहा कि अमेरिका में पढ़ाई कर रहे, व्यवसाय शुरू करने वाले और कंपनियां स्थापित करने वाले लोगों के लिए ग्रीन कार्ड हासिल करने के रास्ते तैयार किए जाने चाहिए। वहीं, भारत से अमेरिका आए रितेश टंडन ने अपने अनुभव का हवाला देते हुए कहा, “मैं 28 साल की उम्र में यहां आया था। मैंने सभी नियमों का पालन किया और अपनी बारी का इंतजार किया।” उन्होंने कहा कि 12 लाख से अधिक लोग ग्रीन कार्ड के लंबित आवेदनों की समस्या से जूझ रहे हैं। टंडन ने खन्ना पर निशाना साधते हुए कहा, “मेरे प्रतिद्वंद्वी कांग्रेस में लगभग 10 वर्षों से हैं, लेकिन प्रतीक्षा सूची केवल लंबी हुई है।”
टंडन ने कहा कि उनकी योजना में सबसे पहले ग्रीन कार्ड जारी करने की व्यवस्था में प्रति देश निर्धारित सीमा को समाप्त करना और इस्तेमाल नहीं किए गए ग्रीन कार्ड को फिर से उपलब्ध कराना शामिल है। उन्होंने एच-1बी वीजा के दुरुपयोग को रोकने की भी मांग की। इसके अलावा, उन्होंने मतदाता पहचान पत्र अनिवार्य करने और अवैध रूप से सीमा पार करने को गंभीर अपराध घोषित करने का समर्थन किया।
प्रति देश निर्धारित सीमा लंबे समय से भारतीय पेशेवरों की शिकायत का विषय रही है। रोजगार आधारित ग्रीन कार्ड के लिए आवेदन करने वाले भारतीयों को इस व्यवस्था के कारण सबसे लंबे इंतजार का सामना करना पड़ता है।
कर नीति के मुद्दे पर खन्ना ने अरबपतियों की संपत्ति पर पांच प्रतिशत कर लगाने के प्रस्ताव का बचाव किया। उन्होंने सवाल उठाया, “सवाल यह है कि यह अर्थव्यवस्था केवल कुछ अरबपतियों के लिए ही क्यों काम कर रही है?” उन्होंने कहा कि अमेरिका में एक नए सामाजिक समझौते की जरूरत है, जिसमें कामकाजी और मध्यम वर्ग के हितों को प्राथमिकता दी जाए। टंडन ने इस प्रस्ताव का विरोध करते हुए कहा कि यह आय पर नहीं, बल्कि कागजों पर दर्ज संपत्ति के मूल्य पर कर लगाता है। उन्होंने यह भी दावा किया कि कंपनियां और लोग कैलिफोर्निया छोड़कर जा रहे हैं।
इसके जवाब में खन्ना ने कहा, “किसी को नहीं लगता कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) की क्रांति ऑस्टिन या मियामी में हो रही है। यह सिलिकॉन वैली में हो रही है।”
टंडन ने खन्ना पर डेमोक्रेटिक पार्टी को वामपंथ की ओर ले जाने का आरोप भी लगाया। उन्होंने कहा कि अमेरिका में लोकतांत्रिक समाजवादी राजनीति को बहुत अधिक वामपंथी दिशा में ले जा रहे हैं और उन्हें डर है कि इससे अमेरिका वेनेजुएला के रास्ते पर जा सकता है। उन्होंने न्यूयॉर्क के मेयर पद के लिए एक लोकतांत्रिक समाजवादी उम्मीदवार को खन्ना के समर्थन का भी उल्लेख किया।













