नई दिल्ली। कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के संस्थापक अभिजीत दीपके ने मंगलवार को अपने समर्थकों के लिए एक अहम वीडियो संदेश जारी करते हुए आगामी त्योहारों के मद्देनजर सभी प्रकार के प्रदर्शनों को दिवाली तक स्थगित करने की घोषणा की है। 16 मिनट से अधिक लंबे अपने वीडियो संबोधन में दीपके ने समर्थकों (जिन्हें वे 'कॉकरोच' कहकर संबोधित करते हैं) से अपील की कि वे हालिया घटनाक्रमों की भागदौड़ से कुछ समय का ब्रेक लें और आने वाले त्योहारों में अपने परिवारों के साथ वक्त बिताएं। उन्होंने जोर देकर कहा कि मौजूदा परिस्थितियों को देखते हुए कार्यकर्ताओं के परिवारों की चिंता स्वाभाविक है, इसलिए इस समय अपनों के बीच रहना आवश्यक है।


अभिजीत दीपके ने अपने संदेश में कहा कि पिछले कुछ दिनों में जो परिस्थितियां बनी हैं, उससे कार्यकर्ताओं के परिजन यकीनन काफी चिंतित होंगे। उन्होंने समर्थकों से भावनात्मक आग्रह करते हुए कहा कि आने वाले दिनों में दशहरा और दिवाली जैसे बड़े त्योहार हैं, ऐसे में सभी साथी कुछ दिनों के लिए अपने घरों को लौटें और अपने परिजनों को समय दें। उन्होंने स्पष्ट किया कि इस दौरान संगठन की तरफ से कोई भी सार्वजनिक विरोध प्रदर्शन या आंदोलन आयोजित नहीं किया जाएगा।


तिहाड़ जेल में बंद सौरव और आशुतोष के संघर्ष का उल्लेख

अपने वीडियो संबोधन में दीपके ने तिहाड़ जेल में न्यायिक हिरासत काट रहे पार्टी के दो प्रमुख सहयोगियों—सौरव दास और आशुतोष रांका की स्थिति पर विस्तार से बात की। उन्होंने बताया कि कोर्ट ने हाल ही में दोनों की हिरासत दो दिन के लिए और बढ़ा दी है, जिसके चलते उनका दशहरा भी जेल में ही बीतेगा। दीपके ने कहा कि सौरव पिछले छह दिनों से जेल में हैं, फिर भी जब वे अदालत में पेशी के लिए आते हैं तो उनके चेहरे पर मुस्कान होती है। उन्होंने पूर्व में सौरव के खान-पान को लेकर सोशल मीडिया पर बने मज़ाक का जिक्र करते हुए कहा कि जो लोग ऐसी बातें करते थे, उन्हें देखना चाहिए कि वही सौरव आज पूरी मजबूती के साथ जेल में रहकर अपनी लड़ाई लड़ रहे हैं।


परिजनों के हौसले और त्याग को किया नमन

दीपके ने दोनों नेताओं के परिवारों के अदम्य साहस को रेखांकित करते हुए बताया कि उन्होंने सौरव की मां से बात की है, जिन्होंने उन्हें ढांढस बंधाते हुए कहा कि सौरव एक फाइटर है और वह पूरी मजबूती से मुकाबला करेगा। इसी तरह आशुतोष रांका का जिक्र करते हुए उन्होंने भावुक होकर साझा किया कि जेल में रहने के दौरान आशुतोष के अंकल का देहांत हो गया और वे उनके अंतिम संस्कार तक में शामिल नहीं हो सके। इसके बावजूद आशुतोष के परिजनों का कहना है कि उनका बेटा सही हक की लड़ाई लड़ रहा है, इसलिए चिंता करने की कोई बात नहीं है।


'गांधी के सत्याग्रह का मार्ग, नफरत का जवाब नफरत से नहीं'

अपने रुख को स्पष्ट करते हुए दीपके ने कहा कि उनका आंदोलन नफरत के खिलाफ एक वैचारिक जंग है। उन्होंने कहा कि विरोधी चाहते हैं कि आंदोलनकारी अपने रास्ते से भटक जाएं और गुस्से या नफरत में प्रतिक्रिया दें, लेकिन वे महात्मा गांधी के सत्याग्रह के सिद्धांतों पर अडिग रहेंगे। उन्होंने कहा कि सौरव और आशुतोष बिना किसी नफरत या बदले की भावना के मुस्कुराते हुए जेल गए हैं। उन्होंने समर्थकों को याद दिलाया कि जब वे अपने घरों में परिजनों के साथ रोशनी का पर्व मना रहे हों, तब जेल में बंद अपने इन दोनों साथियों के त्याग को भी स्मरण रखें।