छतरपुर। छतरपुर जिले के बकस्वाहा कस्बे में एक युवक पर दिनदहाड़े जानलेवा हमला कर गंभीर रूप से घायल करने की सनसनीखेज वारदात सामने आई है। लहूलुहान हालत में पीड़ित युवक मनीष जैन को प्राथमिक उपचार के बाद तत्काल बुंदेलखंड मेडिकल कॉलेज (बीएमसी) सागर रेफर किया गया, जहां उनकी स्थिति बेहद नाजुक बनी हुई है। इस हिंसक घटना के बाद से बकस्वाहा नगर में दहशत और तनाव का माहौल व्याप्त है। प्राप्त जानकारी के अनुसार, घटना उस समय हुई जब मनीष जैन मंदिर में दर्शन-पूजन के उपरांत अपने घर लौट रहे थे। आरोप है कि नगर पंचायत अध्यक्ष के घर के सामने पहले से घात लगाकर बैठे हमलावरों ने उन्हें घेर लिया और लाठी-डंडों व फरसा से अंधाधुंध हमला कर दिया। प्रत्यक्षदर्शियों व परिजनों के मुताबिक, हमलावर करीब आधे घंटे तक युवक को बेरहमी से पीटते रहे। जैन पर्व पर्युषण के चलते युवक कई दिनों से उपवास पर थे और धार्मिक परिधान में ही थे। घटना के दौरान पीड़ित के परिजनों और राहगीरों ने हाथ जोड़कर छोड़ने की मिन्नतें कीं, लेकिन हमलावरों ने मारपीट जारी रखी। परिजनों का सीधा आरोप है कि नगर पंचायत में हो रहे निर्माण कार्यों व कथित वित्तीय गड़बड़ियों की लगातार शिकायतें करने के चलते नगर पंचायत अध्यक्ष किरण सोनी व नीलू सोनी के परिजनों द्वारा रंजिश रखकर इस प्राणघातक हमले को अंजाम दिया गया है। बीएमसी सागर में भर्ती युवक को सिर व शरीर में आई गंभीर अंदरूनी चोटों के कारण अभी तक होश नहीं आया है और चिकित्सकों के अनुसार उनकी हालत चिंताजनक बनी हुई है। स्थानीय नागरिकों एवं परिजनों ने पुलिस-प्रशासन से मामले में निष्पक्ष जांच कर नामजद आरोपियों के खिलाफ तत्काल कठोर वैधानिक कार्रवाई करने की मांग की है।
भोपाल। मध्यप्रदेश के नागरिकों को सुलभ, सुरक्षित, आधुनिक एवं पर्यावरण अनुकूल सार्वजनिक परिवहन सुविधा उपलब्ध कराने की दिशा प्रदेश सरकार बड़ा कदम उठाने जा रही है। परिवहन विभाग की महत्वाकांक्षी ‘मुख्यमंत्री सुगम परिवहन सेवा’ का 25 सितंबर 2026 को शुभारंभ होगा। भोपाल के दशहरा मैदान में आयोजित राज्यस्तरीय कार्यक्रम में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव शुरुआती चरण में 351 बसों को हरी झंडी दिखाकर रवाना करेंगे। प्रदेश सरकार की इस महत्वाकांक्षी योजना का मुख्य उद्देश्य प्रदेश के विभिन्न शहरों के बीच कनेक्टिविटी को मजबूत करना, दैनिक यात्रियों को राहत पहुंचाना और पर्यावरण-अनुकूल सार्वजनिक परिवहन को बढ़ावा देना है। मुख्यमंत्री सुगम परिवहन सेवा अंतर्गत प्रदेश में लगभग 1500 बसें चलना शुरू हो जाएंगी। कार्यक्रम के दौरान 351 बसों को एक साथ हरी झंडी दिखाकर रवाना किया जाएगा। इसे दो श्रेणियों में विभाजित किया गया है। इसमें 120 इंटरसिटी बसें हैं। ये बसें दो या दो से अधिक शहरों के बीच आवागमन को सुगम और तीव्र बनाएंगी। 231 इंट्रासिटी बसें शहरों के भीतर नागरिकों को सुरक्षित, सुलभ और सस्ती यात्रा सुविधा प्रदान करेंगी। मुख्यमंत्री सुगम परिवहन सेवा अंतर्गत प्रथम चरण में प्रदेश के 7 प्रमुख शहरों की बसों को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया जाएगा। इसमें इदौर, भोपाल, जबलपुर, रीवा, देवास, कटनी और भिंड शामिल है। इंदौर में 145 बस, जिसमें 50 इंटरसिटी, 95 इंट्रासिटी, भोपाल के लिए 106 बसें, जिसमें 23 इंटरसिटी, 83 इंट्रासिटी, जबलपुर के लिए 67 बसें, जिसमें 14 इंटरसिटी, 53 इंट्रासिटी। रीवा की 18 इंटरसिटी बस, देवास की 10 इंटरसिटी बस, कटनी की 3 और भिंड की 2 इंटरसिटी बस को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया जाएगा। मुख्यमंत्री सुगम परिवहन सेवा के अंतर्गत वर्ष 2031 तक 75 प्रतिशत ग्राम पंचायतों को बस सेवा से जोड़कर ग्रामीण कनेक्टिविटी को नई मजबूती दी जाएगी। प्रदेशभर में लगभग 15,000 से अधिक आधुनिक सार्वजनिक बसें संचालित की जाएंगी। इससे प्रतिदिन 30 लाख से ज्यादा यात्रियों को सुरक्षित आवागमन की सुविधा प्रदान होगी। साथ ही 180 से अधिक आधुनिक बस स्टैंड्स, टर्मिनल्स और डिपो का कायाकल्प किया जाएगा। प्रदेश सरकार द्वारा पर्यावरण संरक्षण और कार्बन उत्सर्जन में कमी लाने के उद्देश्य से स्वच्छ ईंधन और इलेक्ट्रिक बसों के विस्तार पर विशेष जोर दिया जाएगा। मुख्यमंत्री सुगम परिवहन सेवा के अंतर्गत संचालित बसों की निगरानी इंटेलिजेंट ट्रांसपोर्ट मैनेजमेंट सिस्टम (ITMS) के माध्यम से की जाएगी। इसके लिए मध्यप्रदेश यात्री परिवहन एण्ड इंफ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड (MPYPIL) एवं उसकी 7 सहायक कंपनियों में अत्याधुनिक कमांड-कंट्रोल सेंटर स्थापित किए गए हैं। इन सेंटरों के माध्यम से बसों के संचालन, लोकेशन, समयबद्धता एवं अन्य महत्वपूर्ण गतिविधियों की रियल टाइम निगरानी सुनिश्चित की जाएगी। इसके साथ ही सार्वजनिक बसों में महिला और बाल सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी गई है। इससे यात्री परिवहन व्यवस्था अधिक सुरक्षित, सुगम, पारदर्शी और प्रभावी बनाने में भी मदद मिलेगी। सभी बसों को 07 सीसीटीवी कैमरों, पैनिक बटन और रियल-टाइम व्हीकल लोकेशन ट्रैकिंग (VLTD) सिस्टम से लैस किया जा रहा है। इसके अलावा, पैसेंजर इंफॉर्मेशन सिस्टम (PIS), ड्राइवरों की तकनीकी ट्रेनिंग और त्वरित शिकायत निवारण तंत्र के जरिए सुरक्षित एवं समयबद्ध यात्रा सुनिश्चित की जाएगी। जन-निजी भागीदारी (PPP) को गति देने के लिए पारदर्शी अनुबंध प्रणाली और प्रोत्साहन योजनाएं लागू की जाएगी। इस मॉडल से निजी बस ऑपरेटरों को राजस्व रिसाव रोकने, नॉन-फेयर रेवेन्यू (जैसे विज्ञापन व कार्गो सेवाएं) बढ़ाने और आधुनिक डिपो व टर्मिनलों के उपयोग की सुविधाएं मिलेंगी साथ ही प्रशासन का पूर्ण सहयोग भी मिलेगा। प्रदेश में सुगम यात्री परिवहन सेवा शुरू होने से परिवहन क्षेत्र में रोजगार और निवेश को बढ़ावा मिलेगा। यात्री परिवहन के विस्तार से प्रदेश में बस संचालन, वाहन निर्माण, इलेक्ट्रिक मोबिलिटी, चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर, तकनीकी सेवाओं और अन्य संबद्ध क्षेत्रों में निवेश की संभावनाएं बढ़ेंगी। इससे परिवहन क्षेत्र से जुड़े उद्योगों को प्रोत्साहन मिलने के साथ युवाओं के लिए रोजगार और स्वरोजगार के नए अवसर भी सृजित होंगे।
पन्ना। मध्य प्रदेश के पन्ना जिले के अजयगढ़ क्षेत्र में मझगांय मध्यम सिंचाई बांध परियोजना से प्रभावित किसानों और आदिवासी परिवारों का अनूठा विरोध प्रदर्शन गुरुवार को 13वें दिन भी लगातार जारी रहा। अपनी जलमग्न होती जमीन, घर और आजीविका को बचाने तथा उचित मुआवजे व सम्मानजनक पुनर्वास की मांग को लेकर आंदोलनरत ग्रामीणों ने अब 'बेड़ी सत्याग्रह' का रास्ता अपनाया है। चिता आंदोलन के 13वें दिन प्रदर्शनकारियों ने अपने हाथ-पैरों में लोहे की प्रतीकात्मक बेड़ियां और जंजीरें बांधकर जलभराव क्षेत्र में बैठकर शासन-प्रशासन के खिलाफ जोरदार हुंकार भरी। चिता, जल और मिट्टी के बाद अब बेड़ियों से जताया रोष जय किसान संगठन के बैनर तले सामाजिक कार्यकर्ता अमित भटनागर के नेतृत्व में चल रहे इस आंदोलन में विस्थापित अब तक विरोध के कई दर्दनाक और प्रतीकात्मक रूप अपना चुके हैं। चिता पर लेटने, जल सत्याग्रह, मिट्टी में खुद को दबाने और गले में प्रतीकात्मक फांसी का फंदा डालने के बाद गुरुवार को आंदोलनकारियों ने बेड़ियां पहनकर विरोध दर्ज कराया। आंदोलनकारियों का कहना है कि यह 'बेड़ी सत्याग्रह' इस बात का प्रतीक है कि किस तरह विकास की आड़ में गरीबों, किसानों और आदिवासियों की आवाज को जंजीरों में जकड़कर दबाने का प्रयास किया जा रहा है। एक तरफ बांध का जलस्तर तेजी से बढ़ रहा है और गांव जलमग्न हो रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ सैकड़ों परिवार अब भी न्याय और सुरक्षित छत की बाट जोह रहे हैं। मुआवजा अधूरा, मकान और पेड़ों के मूल्यांकन पर उठ रहे सवाल आंदोलनकारियों ने जिला प्रशासन और जल संसाधन विभाग पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि अधिकांश प्रभावित परिवारों को पुनर्वास पैकेज की पूरी राशि का भुगतान नहीं किया गया है। कई विस्थापितों के मकानों, कुओं और फलदार पेड़ों का सही मूल्यांकन नहीं हुआ, जिसके चलते उनका भुगतान अटका पड़ा है। इसके अलावा जमीन के अधिग्रहण में भूमि की वास्तविक श्रेणियों की अनदेखी कर कम मुआवजा तय करने को लेकर भी आपत्तियां दर्ज कराई गई हैं। विस्थापितों का सीधा आरोप है कि बिना वैधानिक प्रक्रिया पूरी किए और बिना पुनर्वास स्थल विकसित किए उनके घरों को जलसमाधि दी जा रही है। केन-बेतवा लिंक, रुंझ और रेल परियोजना के विस्थापितों का भी उठाया मुद्दा सामाजिक कार्यकर्ता अमित भटनागर ने साफ किया कि यह लड़ाई सिर्फ मझगांय बांध तक सीमित नहीं है, बल्कि बुंदेलखंड में विकास के नाम पर बेदखल हो रहे हर उस परिवार की है जिसे उसका हक नहीं मिला। आंदोलन में रुंझ बांध, महत्वाकांक्षी केन-बेतवा लिंक राष्ट्रीय परियोजना और ललितपुर-सिंगरौली रेल लाइन निर्माण से विस्थापित परिवारों के पुनर्वास का मुद्दा भी प्रमुखता से उठाया गया है। उन्होंने कहा कि यह संघर्ष केवल पैसों का नहीं, बल्कि जल, जंगल, जमीन, पर्यावरण और आने वाली पीढ़ियों के अस्तित्व की रक्षा का है। आंदोलनकारियों ने दो-टूक चेतावनी दी है कि जब तक प्रत्येक विस्थापित को पूरा मुआवजा, उचित पुनर्वास और पक्का आशियाना नहीं मिल जाता, तब तक यह सत्याग्रह बिना रुके जारी रहेगा।
भोपाल। मध्य प्रदेश में वर्ष 2027 में होने वाले नगरीय निकाय चुनावों को लेकर असमंजस की स्थिति बन गई है। वर्तमान संकेतों और प्रशासनिक स्थितियों के अनुसार, प्रदेश के 413 नगरीय निकायों के चुनाव अपने निर्धारित समय (जुलाई 2027) से करीब 6 महीने आगे खिसक सकते हैं। इस संभावित विलंब का मुख्य कारण प्रदेश में जारी जनगणना तथा उसके बाद होने वाला नया परिसीमन (Delimitation) व वार्डों का पुनर्गठन है। प्रदेश में जनगणना का कार्य मार्च 2027 तक पूरा होने की संभावना है। नियमानुसार जनगणना प्रक्रिया जारी रहने के दौरान निकायों की सीमाओं में बदलाव या वार्डों का आरक्षण संभव नहीं होता। जनगणना के आधिकारिक आंकड़े आने के बाद ही 413 निकायों में नए वार्डों का गठन, सीमाओं का निर्धारण और आरक्षण की वैधानिक प्रक्रिया पूरी की जाएगी। निकायों का मौजूदा कार्यकाल जुलाई 2027 में समाप्त हो रहा है। मार्च 2027 में जनगणना संपन्न होने के बाद महज 3-4 महीनों के भीतर परिसीमन और आरक्षण जैसी जटिल प्रक्रियाएं पूरी कर पाना प्रशासनिक रूप से कठिन होगा, इसलिए सरकार नए परिसीमन के बाद ही चुनाव कराने के पक्ष में दिख रही है। मध्य प्रदेश में अगले नगरीय निकाय चुनाव कुल 413 निकायों में प्रस्तावित हैं, जिनमें 16 नगर निगम, 99 नगर पालिका और 298 नगर परिषद शामिल हैं। इतने बड़े स्तर पर चुनाव कराने से पहले प्रशासनिक तैयारियां तेज कर दी गई हैं। इसके लिए नगरीय विकास एवं आवास विभाग ने महापौर और अध्यक्ष पदों के आरक्षण से संबंधित प्रक्रियाएं पूरी करने के लिए आयुक्त, नगरीय प्रशासन एवं विकास को विहित प्राधिकारी नियुक्त किया है। इससे पहले भी प्रदेश के कुछ निकायों में भारी बारिश और कानून-व्यवस्था का हवाला देकर प्रस्तावित उपचुनाव स्थगित किए जा चुके हैं, जिससे अब सीधे आम चुनावों की नई समयसीमा पर फोकस किया जा रहा है। यदि जनगणना और परिसीमन की प्रक्रिया में अपेक्षित समय लगता है, तो जुलाई 2027 में कार्यकाल समाप्त होने के बाद नगरीय निकायों में कुछ समय के लिए प्रशासक (Administrator) नियुक्त किए जा सकते हैं। चुनावों का नया और स्पष्ट कार्यक्रम परिसीमन और आरक्षण की प्रशासनिक कार्यवाही पूर्ण होने के बाद ही जारी होने की संभावना है।
भोपाल, जीतेन्द्र यादव। मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) और चुनावी प्रक्रिया को लेकर कांग्रेस ने मध्य प्रदेश में आंदोलन का ऐलान किया है। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने भोपाल में कहा कि कांग्रेस नेता राहुल गांधी पहले ही मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार की कार्यप्रणाली को लेकर सवाल उठा चुके हैं। पटवारी ने आरोप लगाया कि मतदाता सूची में गड़बड़ियों को लेकर गंभीर सवाल सामने आ रहे हैं और ज्ञानेश कुमार को पद से हटाने की मांग की। पटवारी ने कहा कि जब तक मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ कार्रवाई नहीं होती, कांग्रेस लोकतंत्र और मताधिकार के मुद्दे पर आंदोलन जारी रखेगी। उन्होंने बताया कि 27 सितंबर को मध्य प्रदेश निर्वाचन आयोग का घेराव किया जाएगा। इसके बाद 28 सितंबर को प्रदेश के सभी जिलों में कलेक्ट्रेट का घेराव करने का कार्यक्रम रखा गया है। कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष ने कहा कि पार्टी इस मुद्दे को लेकर लगातार जनता के बीच जाएगी और मतदाता सूची की पारदर्शिता तथा मतदाताओं के अधिकारों को लेकर आवाज उठाती रहेगी। वहीं, चुनाव आयोग ने SIR को लेकर सामने आए मतभेदों पर स्पष्टीकरण देते हुए कहा है कि अलग-अलग राय होना सामान्य प्रक्रिया का हिस्सा है।