इंदौर। मध्य प्रदेश के इंदौर से एक बेहद दुखद खबर सामने आई है। यहां भाजपा नेता नंदी मीणा (BJP Leader Nandi Meena) के 25 वर्षीय बेटे नमन का ब्रेन हेमरेज के चलते निधन हो गया है। नमन न सिर्फ एक राजनेता के बेटे थे, बल्कि सोशल मीडिया पर भी एक जाना-माना चेहरा थे। इंस्टाग्राम पर उनके 25 लाख से ज्यादा फॉलोअर्स थे। इस अचानक हुई मौत ने उनके परिवार, दोस्तों और लाखों प्रशंसकों को गहरे सदमे में डाल दिया है। जानकारी के अनुसार, नमन को मंगलवार के दिन अचानक तेज सिरदर्द हुआ था। उन्होंने इसे थकान या खाली पेट होने के कारण गैस और एसिडिटी की समस्या समझ लिया और इसी के अनुसार सामान्य दवा ले ली। इसके बावजूद जब उनके सिर का दर्द कम नहीं हुआ, तो उनके पिता उन्हें एक विशेषज्ञ डॉक्टर के पास लेकर पहुंचे। अस्पताल में जब नमन की जांच की गई तो हैरान करने वाली बात सामने आई। डॉक्टरों ने बताया कि उनके सिर की एक नस ब्लॉक हो गई है। डॉक्टरों ने तुरंत उनका ऑपरेशन किया, जिसके दौरान उन्हें 10 बोतल खून चढ़ाया गया। बताया जा रहा है कि ऑपरेशन के बाद नमन बेहतर महसूस कर रहे थे, लेकिन शनिवार को अचानक उन्हें ब्रेन हेमरेज हुआ और उनका निधन हो गया। नमन सोशल मीडिया का एक चर्चित चेहरा थे। उनके निधन की खबर पर शुरुआत में उनके फॉलोअर्स को विश्वास ही नहीं हुआ। लेकिन जब उनके पिता ने अंतिम यात्रा की पोस्ट साझा की, तो प्रशंसकों को गहरा झटका लगा। नमन के दाह संस्कार में उन्हें अंतिम विदाई देने के लिए सोशल मीडिया के दोस्तों और चाहने वालों की भारी भीड़ उमड़ पड़ी। श्रद्धांजलि देने आने वाले युवाओं की भारी संख्या को देखते हुए प्रशासन और परिवार ने अलग से तैयारियां की हैं। आज शाम 5 बजे से 6:30 बजे के बीच रॉबर्ट चौराहे के पास स्थित महक वाटिका में नमन की शोक बैठक आयोजित की गई है, जिसमें भारी भीड़ जुटने की संभावना है। कम उम्र के युवाओं में हार्ट अटैक और ब्रेन हेमरेज के मामले लगातार बढ़ रहे हैं। इंदौर की इस घटना ने सभी को सकते में डाल दिया है और एक बड़ी सीख भी दी है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का भी यही कहना है कि सिरदर्द, सीने में दर्द या असामान्य शारीरिक तकलीफ को कभी भी हल्के में नहीं लिया जाना चाहिए, चाहे व्यक्ति की उम्र कितनी भी कम क्यों न हो। समय पर सही इलाज ही बचाव का एकमात्र रास्ता है।
गुना। मध्य प्रदेश के गुना और चाचौड़ा अंचल में पूर्व आईपीएस अधिकारी रघुवीर सिंह मीणा के खिलाफ अनुसूचित जनजाति (ST) प्रमाण पत्र निरस्त होने के बाद एफआईआर दर्ज होने से राजनीतिक पारा चढ़ गया है। पूर्व आईपीएस पर एफआईआर दर्ज होते ही उनकी पत्नी और चाचौड़ा की पूर्व विधायक ममता मीणा खुलकर मैदान में उतर आई हैं। उन्होंने इस पूरी कार्रवाई को केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया के दबाव में की गई 'राजनीतिक दुर्भावना' करार दिया है। पूर्व विधायक ममता मीणा ने खुले तौर पर केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया पर आरोप लगाते हुए सीधी लड़ाई का ऐलान किया है: ममता मीणा ने कहा कि हाल ही में उन्होंने सिंधिया के 'महाराज' कहलवाने और उनकी 'सामंती सोच' का विरोध किया था, जिसके कारण पुलिस मुख्यालय (PHQ) और मुख्यमंत्री स्तर पर राजनीतिक दबाव बनवाकर यह कार्रवाई कराई गई है। उन्होंने चेतावनी दी कि अब वे ग्वालियर-चंबल संभाग और श्योपुर क्षेत्र में घर-घर जाकर सिंधिया की नीतियों और कार्यशैली को जनता के सामने बेनकाब करेंगी। मामले में आरोपी बनाए गए पूर्व IPS रघुवीर सिंह मीणा ने भी अपनी सफाई जारी की है: रघुवीर सिंह मीणा ने बताया कि वर्ष 1984 में जारी उनके एसटी प्रमाण पत्र को उच्च स्तरीय छानबीन समिति ने अमान्य घोषित किया था। वर्ष 2021 में हाई कोर्ट की डिवीजन बेंच ने उन्हें पक्ष रखने का अवसर देते हुए मामला वापस समिति को भेजा था। उन्होंने कहा कि यह मामला न्यायालय में विचाराधीन है और वे आगे की कानूनी लड़ाई पूरी मजबूती से अदालत में लड़ेंगे। ममता मीणा गुना जिले की चाचौड़ा विधानसभा सीट से भारतीय जनता पार्टी की विधायक रह चुकी हैं। वे जिला पंचायत गुना की अध्यक्ष भी रही हैं और क्षेत्र में उनका मजबूत जनाधार माना जाता है। ज्योतिरादित्य सिंधिया से उनकी पुरानी राजनीतिक अदावत रही है, जो अब खुलकर सरेआम आ गई है।
छतरपुर, विनोद मिश्रा/शिवम सोनी। जिला मुख्यालय में आज पुलिस महानिरीक्षक इरशाद वली का आगमन हुआ। जिले की कानून-व्यवस्था और विभिन्न गतिविधियों की गहन समीक्षा के उद्देश्य से पहुंचे आईजी ने पत्रकारों से खुलकर बातचीत की और जिले तथा शहर में चल रही प्रमुख घटनाओं के साथ पुलिस की कार्यप्रणाली पर विस्तृत जानकारी साझा की। उन्होंने स्पष्ट किया कि आज वे छतरपुर पुलिस अधिकारियों के साथ बैठक करने आए हैं ताकि मौजूदा स्थिति का जायजा लिया जा सके और आवश्यक दिशा-निर्देश दिए जा सकें। आईजी इरशाद वली ने जिले की वर्तमान कानून-व्यवस्था, पुलिसिंग व्यवस्था और शहर से जुड़े अहम मुद्दों पर चर्चा करते हुए कहा कि अवैध शराब, मादक पदार्थों और महिला अपराधों जैसे गंभीर मामलों में किसी भी प्रकार की कोताही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। इन मुद्दों पर जनता से सीधे संवाद स्थापित किया जाएगा और गैरकानूनी गतिविधियों पर प्रभावी लगाम लगाने के लिए ठोस प्रयास किए जाएंगे। इस अवसर पर डीआईजी विजय कुमार खत्री, एसपी रजत सकलेचा, एएसपी आदित्य पटले सहित पुलिस विभाग के वरिष्ठ अधिकारी भी मौजूद रहे जिन्होंने जिले की मौजूदा स्थिति और पुलिस की सक्रियता से जुड़े विषयों पर पत्रकारों को जानकारी दी। आईजी के इस दौरे को जिले की सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। पत्रकारों से हुई मुलाकात में शांति बनाए रखने, अपराध नियंत्रण और जन-सुरक्षा जैसे विषयों पर खुलकर बातचीत हुई, जिससे यह स्पष्ट हुआ कि प्रशासन इन मुद्दों को प्राथमिकता दे रहा है और आम नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए निरंतर प्रयासरत है।
छतरपुर, विनोद मिश्रा। जिले के शासकीय विद्यालयों में अनुशासनहीनता और कर्तव्यों के प्रति लापरवाही बरतने वाले शिक्षकों के खिलाफ जिला प्रशासन ने कड़ा रुख अपनाया है। कलेक्टर मृणाल मीना के निर्देशन में जिला शिक्षा अधिकारी (डीईओ) पी.के. रैकवार ने शासकीय कार्य में घोर लापरवाही, उपेक्षा और अनुशासनहीनता के मामलों को गंभीरता से लेते हुए तीन प्राथमिक शिक्षकों को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। सोशल मीडिया और समाचार माध्यमों पर प्रसारित वीडियो व छायाचित्रों की प्राथमिक जांच के उपरांत यह अनुशासनात्मक कार्रवाई की गई है। पहले मामले में शाला समय के दौरान मासूम विद्यार्थियों के सामने सोने के दो अलग-अलग प्रकरण सामने आए थे। हरपालपुर अंतर्गत शासकीय एकीकृत माध्यमिक शाला बोदी में पदस्थ प्राथमिक शिक्षक राघवेंद्र सिंह का शाला समय में बच्चों के सामने सोते हुए वीडियो व फोटो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ था। वहीं शासकीय प्राथमिक शाला कदारी में पदस्थ प्राथमिक शिक्षक रेखा मानव का भी 15 सितंबर को स्कूल समय में विद्यार्थियों के सामने सोने का वीडियो सामने आया था। दोनों कृत्यों को बेहद आपत्तिजनक और शासकीय दायित्वों के प्रति घोर उपेक्षा मानते हुए मध्यप्रदेश सिविल सेवा (आचरण) नियम, 1965 के नियम 3 के उल्लंघन पर दोनों को निलंबित किया गया है। राघवेंद्र सिंह का निलंबन मुख्यालय विकासखंड शिक्षा अधिकारी कार्यालय राजनगर तथा रेखा मानव का मुख्यालय विकासखंड शिक्षा अधिकारी कार्यालय बिजावर नियत किया गया है। दूसरे गंभीर प्रकरण में राजनगर विकासखंड अंतर्गत शासकीय प्राथमिक शाला भवानीपुरा में पदस्थ प्राथमिक शिक्षक दशराज सिंह परमार का जुआ खेलने का वीडियो प्रसारित हुआ था। वीडियो में शिक्षक दशराज सिंह ग्राम कुरेला बस स्टैंड स्थित एक कोल्ड ड्रिंक्स की दुकान में अन्य व्यक्तियों के साथ ताश के पत्ते खेलते नजर आ रहे थे। इस कृत्य को पदीय दायित्वों के विपरीत और गंभीर कदाचरण मानते हुए डीईओ ने मध्यप्रदेश सिविल सेवा (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियम, 1966 के नियम 9 के तहत उन्हें तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। निलंबन अवधि में उनका मुख्यालय विकासखंड शिक्षा अधिकारी कार्यालय बड़ामलहरा निर्धारित किया गया है। जारी आदेश के अनुसार सभी निलंबित शिक्षकों के विरुद्ध विधिवत विभागीय जांच संस्थित की जाएगी और निलंबन काल के दौरान उन्हें मध्यप्रदेश मूलभूत नियम 54 के तहत नियमानुसार जीवन निर्वाह भत्ता देय होगा।
दतिया। मध्य प्रदेश के प्रसिद्ध दतिया जिले स्थित पंडोखर धाम के संत गुरुशरण शर्मा (पंडोखर सरकार) और पिछड़ा वर्ग महासभा के नेता दामोदर यादव के बीच जुबानी जंग तीखी हो गई है। दामोदर यादव द्वारा बागेश्वर धाम और पंडोखर सरकार जैसे दिव्य दरबार लगाने वाले संतों पर टिप्पणी करने और 'पर्चा निकालने वालों को दंडे मारकर पंडाल खाली कराने' वाले बयान पर पंडोखर सरकार ने बेहद कड़ा और आक्रामक पलटवार किया है। दामोदर यादव की चुनौती पर प्रतिक्रिया देते हुए पंडोखर सरकार ने कड़े शब्दों में कहा: "जो कहता है कि पर्चा निकालने वालों को दंडे मारो और उनका पंडाल खाली करा दो, अगर उसमें दम है तो आकर मार के देखे दंडे! इतना खदेड़ा जाएगा कि पता भी नहीं चलेगा।" उन्होंने चेतावनी भरे अंदाज में कहा, "तुम हमारा कुछ नहीं उखाड़ पाओगे। हम कोई बच्चे नहीं हैं, तुम्हारा पाला इस बार पंडोखर सरकार से पड़ा है।" दिव्य दरबार और पर्चा बनाने की व्यवस्था पर उठ रहे सवालों पर पंडोखर सरकार ने स्पष्ट किया: "रहा सवाल पर्चे का, तो पर्चे तो पंडोखर धाम में बनते हैं और आगे भी बनते ही रहेंगे। जिसमें हिम्मत और दम हो, रोक सकता हो तो रोक ले।" उन्होंने दरबार की कार्यप्रणाली समझाते हुए कहा कि उनके दरबार के कुछ नियम हैं, जिन्हें सभी को फॉलो करना होता है; जैसे पहले टोकन लेना पड़ता है। उन्होंने खुला दावा किया, "टोकन लेकर आओ, अगर मैं तुम्हारे बारे में न बता पाया तब कहना! मैं पहली ही कलम में वही लिखूंगा, जो तुम मन में पूछने आए हो।" मध्य प्रदेश में बीते कुछ समय से अंधविश्वास, पाखंड और कथित चमत्कारिक पर्चा व्यवस्था को लेकर कुछ सामाजिक और राजनीतिक संगठनों के नेता लगातार सवाल उठा रहे हैं। दामोदर यादव ने हाल ही में कथावाचकों और पर्चा निकालने वाले धामों के खिलाफ कड़ा रुख अपनाते हुए जनता से विरोध करने का आह्वान किया था, जिसके बाद पंडोखर सरकार का यह तीखा बयान सामने आया है।