नई दिल्ली। 11वें आयुर्वेद दिवस के अवसर पर बुधवार को पटना के अगमकुआं स्थित क्षेत्रीय आयुर्वेद अनुसंधान संस्थान (आरएआरआई) में प्रदर्शनी-सह-मिनी एक्सपो और पारंपरिक खाद्य कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस वर्ष आयुर्वेद दिवस “स्वस्थ कल के लिए आयुर्वेद” विषय के तहत मनाया जा रहा है। कार्यक्रम का उद्देश्य आयुर्वेद, पारंपरिक एवं पौष्टिक खाद्य पदार्थों, मोटे अनाज (श्री अन्न) और स्वस्थ जीवनशैली से जुड़ी आदतों के बारे में जागरूकता बढ़ाना था।कार्यक्रम का उद्घाटन आईसीएमआर-आरएमएनआईएचआर के निदेशक डॉ. कृष्णा पांडे ने किया। आरएआरआई के प्रभारी डॉ. बनमाली दास ने आयुर्वेद में वर्णित पारंपरिक और पौष्टिक खाद्य पदार्थों के महत्व पर प्रकाश डाला और संतुलित आहार में स्थानीय, मौसमी और विविधतापूर्ण खाद्यान्नों की भूमिका पर जोर दिया।
मिनी एक्सपो में स्थानीय खाद्य सामग्री, श्री अन्न (मिलेट्स) और स्वास्थ्यवर्धक घटकों से तैयार पारंपरिक व पौष्टिक व्यंजनों का प्रदर्शन किया गया। आगंतुकों को उनके पोषण संबंधी महत्व, स्वास्थ्य लाभों और दैनिक आहार में उनके उचित उपयोग के बारे में जानकारी दी गई।
कार्यक्रम के दौरान मरीजों, उनके परिजनों और आम लोगों के लिए स्वास्थ्य जांच और चिकित्सकीय परीक्षण भी किए गए। आवश्यकता के अनुसार आयुर्वेदिक दवाएं वितरित की गईं। इसके अलावा आयुर्वेद, पोषण, रोगों से बचाव और स्वस्थ जीवनशैली से संबंधित पुस्तकों तथा सूचना, शिक्षा एवं संचार सामग्री का भी वितरण किया गया।
प्रतिभागियों को संतुलित पोषण, नियमित दिनचर्या, उचित खान-पान, योग और स्वस्थ जीवनशैली के महत्व के बारे में जागरूक किया गया। आयुर्वेद के सिद्धांतों के अनुरूप मौसम और व्यक्ति की प्रकृति के अनुसार आहार तथा जीवनशैली अपनाने पर भी विशेष जोर दिया गया।
आयुर्वेद दिवस के नोडल अधिकारी डॉ. बालाजी पोतभारे, अनुसंधान अधिकारी (आयुर्वेद) डॉ. अशोक कुमार सिन्हा, अनुसंधान अधिकारी (आयुर्वेद) डॉ. रितिका मिश्रा, अनुसंधान अधिकारी (आयुर्वेद) डॉ. कुमारी अर्चना तथा संस्थान के अधिकारियों और कर्मचारियों ने कार्यक्रम के आयोजन में योगदान दिया।
कार्यक्रम में मरीजों, उनके परिजनों और आम लोगों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। इससे पौष्टिक एवं संतुलित भोजन, पारंपरिक आहार पद्धतियों और आयुर्वेद आधारित स्वस्थ जीवनशैली के प्रति जागरूकता को बढ़ावा मिला।











