मुंबई। शिवसेना उद्धव बालासाहेब ठाकरे (यूबीटी) ने भाजपा पार्षद रितु तावडे के निर्विरोध बृहन्मुंबई महानगरपालिका (बीएमसी) मेयर चुने जाने पर तीखी प्रतिक्रिया दी है। उद्धव ठाकरे की पार्टी ने आरोप लगाया कि सत्ताधारी पार्टी का नेतृत्व मराठी लोगों के बजाय उद्योगपतियों के हितों को प्राथमिकता देगा और बड़े व्यवसायों के लिए जमीन अधिग्रहण को आसान बनाएगा।
शिवसेना-यूबीटी ने मुखपत्र 'सामना' में कहा कि मुंबई शहर में भाजपा के मेयर का आना एक संकट है। यह महाराष्ट्र के लिए काला दिन है। यह एक ऐसा दिन है जो मराठी लोगों को दुखी करता है। मुंबई नगर निगम में भाजपा की जीत और मुंबई शहर में उनका मेयर बनना मराठी लोगों के संघर्ष पर एक काला साया है। इसके कारण साफ हैं। भाजपा एक ऐसी पार्टी है जो व्यापारियों और अमीरों के हितों का ध्यान रखती है।
संपादकीय में कहा गया कि भाजपा ने मराठी मतदाताओं के बीच 'दरार पैदा करके' सत्ता हासिल की। भाजपा ने मुंबई का महापौर बनाने के लिए दौलत की नदियां बहा दीं। अगर शिवसेना (यूबीटी) को बीएमसी की चाबी मिल जाती तो भाजपा को मुंबई को लूटने से रोका जा सकता था। उन्होंने यह साजिश रची और उसे अंजाम दिया ताकि मुंबई में शिवसेना का विशुद्ध मराठी महापौर न हो।
पार्टी ने दावा किया कि संयुक्त महाराष्ट्र संघर्ष के दौरान मोरारजी देसाई ने जिस क्रूरता से मराठी लोगों पर गोलियां चलवाईं, उसी क्रूर तरीके से भाजपा मुंबई के हौसले को तोड़ रही है। इसीलिए भाजपा का महापौर बनना मुंबई और महाराष्ट्र के लिए काला दिन है।
मेयर रितु तावडे के मुंबई को गड्ढा और भ्रष्टाचार मुक्त व एक सुरक्षित शहर बनाने के दावों को हास्यास्पद बताते हुए 'सामना' में लिखा गया है, "मेयर की मंशा अच्छी है, लेकिन यह सब करना उनके बस की बात नहीं है।
मुंबई को महिलाओं के लिए सुरक्षित बनाने के वादों पर संपादकीय में लिखा है, "इसका मतलब है कि इस मामले में देवेंद्र फडणवीस का गृह मंत्रालय विफल रहा है। बांग्लादेशी और रोहिंग्या मुसलमानों को बाहर करने का मुद्दा उनके एजेंडे में शामिल है। यह गृह मंत्रालय की विफलता का भी प्रमाण है।"
संपादकीय में कहा गया है कि चार साल तक मुंबई की सत्ता प्रशासकों के हाथों में रही और इस दौरान 'गुजरात लॉबी' के ठेकेदारों ने बीएमसी के खजाने को लूटा है। हजारों करोड़ रुपए के उन कामों के बिल बनाए, जो किए ही नहीं गए और उसका एक बड़ा 'कट' शहरी विकास विभाग को भेजा गया। मेयर को इस भ्रष्टाचार का पर्दाफाश करना चाहिए।
इसके साथ ही कहा गया है कि अगर मेयर भ्रष्टाचार को रोकना चाहती हैं, तो वह इस बारे में बात कर सकती हैं। नहीं तो, इस भ्रष्टाचार से लड़ने की जिम्मेदारी मजबूत विपक्ष पर छोड़ देनी चाहिए।
मुंबई मेयर के तौर पर रितु तावडे का चुनाव मराठी पहचान के खिलाफ एक साजिश : शिवसेना-यूबीटी
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Saurabh Shukla
18 अगस्त 2026, 02:08 am IST
Saurabh Shukla18 अगस्त 2026, 02:08 am IST
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