पन्ना। मध्य प्रदेश के पन्ना और छतरपुर जिले में केन-बेतवा लिंक परियोजना सहित विभिन्न विकास योजनाओं से प्रभावित परिवारों के विस्थापन, उचित मुआवजे और पुनर्वास की मांग को लेकर संघर्ष कर रहीं 25 वर्षीय युवा सामाजिक कार्यकर्ता दिव्या अहिरवार आखिरकार पन्ना जिला जेल से रिहा हो गई हैं। मध्य प्रदेश हाईकोर्ट से जमानत मिलने के बाद आवश्यक अदालती व जेल औपचारिकताओं को पूरा कर उन्हें शुक्रवार शाम को जेल से रिहा कर दिया गया। जेल के मुख्य द्वार से बाहर आते ही वहां पहले से मौजूद बड़ी संख्या में समर्थकों, परिजनों और विस्थापित परिवारों ने उनका जोरदार स्वागत किया और उनके संघर्ष के समर्थन में नारे लगाए।


इससे पूर्व मध्य प्रदेश हाईकोर्ट के जस्टिस विवेक अग्रवाल की एकलपीठ ने मामले की सुनवाई करते हुए पुलिस द्वारा की गई कार्रवाई को संदेहास्पद माना और उस पर गंभीर सवाल खड़े करते हुए दिव्या अहिरवार को नियमित जमानत का लाभ प्रदान किया। करीब 35 दिनों तक जेल में रहने के बाद मिली इस रिहाई से आंदोलन से जुड़े लोगों और विस्थापित परिवारों में भारी उत्साह और खुशी की लहर है।


गौरतलब है कि केन-बेतवा लिंक और मझगांय डैम परियोजना से विस्थापित होने वाले परिवारों के अधिकारों को लेकर दिव्या अहिरवार लंबे समय से सामाजिक कार्यकर्ता अमित भटनागर और सैकड़ों स्थानीय महिलाओं के साथ मिलकर आंदोलन का नेतृत्व कर रही थीं। आंदोलनकारियों ने शासन-प्रशासन तक अपनी आवाज पहुंचाने के लिए 'चिता सत्याग्रह', 'जल सत्याग्रह' और 'फांसी आंदोलन' जैसे कड़े व अहिंसक विरोध के रास्ते अपनाए थे। 'न्याय दो या फिर मार दो' के नारों के साथ महिलाओं की बढ़ती लामबंदी के बीच प्रशासन और आंदोलनकारियों के बीच टकराव की स्थिति बन गई थी। इसके बाद 28 सितंबर की रात पन्ना पुलिस ने दिव्या अहिरवार सहित चार आंदोलनकारियों पर भारतीय दंड संहिता की धारा 307 (हत्या के प्रयास) जैसी गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज कर उन्हें गिरफ्तार कर लिया था।


अधिवक्ता अंजना कुरारिया के अनुसार, गिरफ्तारी के बाद जहां अन्य तीन साथियों को 12 अक्टूबर को ही राहत मिल गई थी, वहीं दिव्या अहिरवार को जेल में ही रहना पड़ा था। उच्च न्यायालय में सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष ने दलील दी कि विस्थापन और पुनर्वास जैसी बुनियादी संवैधानिक मांगों को लेकर शांतिपूर्ण आवाज उठा रहे आंदोलनकारियों पर हत्या के प्रयास जैसे झूठे मुकदमे लगाना लोकतांत्रिक अधिकारों का दमन है। हाईकोर्ट ने तथ्यों और परिस्थितियों का अवलोकन करने के उपरांत पुलिस कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए जमानत अर्जी स्वीकार कर ली थी।


दिव्या की गिरफ्तारी के बाद यह आंदोलन प्रदेश ही नहीं, बल्कि राष्ट्रीय स्तर पर भी चर्चा का विषय बन गया था। पूर्व राज्यसभा सांसद वृंदा करात ने पन्ना पहुंचकर सीधे आंदोलन की कमान संभाली थी। इसके अलावा विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार, प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी, आदिवासी कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. विक्रांत भूरिया और आम आदमी पार्टी की प्रदेश अध्यक्ष रानी अग्रवाल सहित कई प्रमुख नेताओं ने आंदोलन स्थल का दौरा कर प्रभावित परिवारों की मांगों और पुलिसिया कार्रवाई के खिलाफ आवाज उठाई थी। जेल से रिहा होने के बाद दिव्या अहिरवार और उनके समर्थकों ने स्पष्ट किया है कि जमानत मिलना न्याय की दिशा में एक महत्वपूर्ण पड़ाव है, लेकिन विस्थापितों के उचित मुआवजे, सम्मानजनक पुनर्वास और बुनियादी अधिकारों की लड़ाई आगे भी पूरी मजबूती और लोकतांत्रिक तरीके से जारी रहेगी।